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सरकारी नौकरी में ठगी का मामला: क्राइम ब्रांच की टीम ने फ्रीज कराए खाते, आरोपियों को भेजा जेल

Thu, 13 Jan 2022 04:03 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Thu, 13 Jan 2022 04:03 PM IST
सार

कानपुर क्राइम ब्रांच की टीम ने सरकारी नौकरी के नाम पर ठगी करने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ किया है। गिरोह चलाने वाले आरोपी बेहद शातिर हैं। वह पहले बेरोजगारों को अपने जाल में फंसाते फिर नौकरी दिलाने के नाम पर उनसे लाखों रुपए की ठगी करते थे।

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Government job fraud case: Crime branch team freezed accounts, accused sent to jail
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कानपुर में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाला गिरोह बेहद शातिर है। यही वजह है कि आरोपियों ने अधिकतर लेनदेन नकद में ही किया था। जिन बेरोजगारों को वह अपने जाल में फंसाते थे। उनसे कैश ही तीन से चार लाख रुपये लेते थे।
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जब पुलिस ने आरोपियों के खाते खंगाले तो कुछ खास रकम नहीं मिली। फिर भी क्राइम ब्रांच खातों के विवरण का सत्यापन करवा रही है। जिससे पता चल सके कि रकम कहां से जमा हुई और किसको भेजी गई। अब तक छह खातों का पता चला है। जिनको फ्रीज कराया गया है।
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क्राइम ब्रांच ने मंगलवार को गिरोह का राजफाश कर छह आरोपियों को जेल भेजा था। इसमें आर्डनेंस फैक्टरी कर्मी प्रदीप सिंह भी था। डीसीपी क्राइम सलमान ताज पाटिल ने बताया कि गिरोह पर गैंगस्टर लगाया जाएगा। दूसरे शहरों में फैले एजेंटों का पता लगाया जा रहा है।
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ओएफसी कर्मी के खिलाफ विभागीय जांच शुरू
प्रदीप सिंह आर्डनेंस फैक्टरी में टर्नर के पद पर कार्यरत है। वह एक-एक आवेदक का पांच हजार रुपये लेता था। जिसमें वह महीने भर की ट्रेनिंग व फिजिकल करवाता था। अब उसके खिलाफ विभागीय जांच शुरू हो गई है।


सूत्रों से पता चला है कि प्रदीप सिंह ने 2010 में ओएफसी में नौकरी ज्वाइन की थी। उसकी अनुपस्थिति बहुत रहती थी। उसके खातों की भी पड़ताल विभाग कर रहा है। उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई तय है। क्योंकि इसकी आरोपियों से सीधे फोन पर बातचीत होती थी। कई छोटे ट्रांजेक्शन भी मिले हैं।
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