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बजट मिला पूरा, सोलर पैनल अधूरा

Thu, 24 Nov 2016 08:54 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, कानपुर
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, कानपुर Updated Thu, 24 Nov 2016 08:54 PM IST
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got full budget but unfinished solar panel
डेमो
बांदा के चित्रकूटधाम मंडल के प्राथमिक स्कूलों के बच्चों को सौर ऊर्जा से आरओ का पानी और पंखे की सुविधा देने की मंशा पूरी नहीं हो सकी। शासन ने पिछले साल 80 विद्यालयों में सोलर पैनल लगाने के लिए दो करोड़ 16 लाख रुपये दिए थे। दिल्ली की कंपनी ने प्रति विद्यालय दो लाख 70 हजार रुपये की लागत से सिर्फ 40 स्कूलों में ही सोलर पावर पैनल लगवाए, बाकी स्कूलों में पंखे, सबमर्सिबल और आरओ वाटर संयंत्र अभी तक नहीं लगाए हैं।
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चित्रकूटधाम मंडल में 3880 प्राथमिक विद्यालय हैं। वर्ष 2015-16 में चारों जिलों के 20-20 विद्यालयों को बेस्ट इनवोशन कार्य के रूप में चुना गया था। शासन की मंशा थी कि इन स्कूलों में पढ़ने वाले छह से 14 वर्ष के बच्चों को पब्लिक स्कूलों की तर्ज पर स्वच्छ पेयजल तथा पठन-पाठन की आरामदायक सुविधा मिले। इसके तहत 1.1 किलोवाट के सोलर पावर प्लांट लगाने के लिए प्रति विद्यालय दो लाख 70 हजार रुपये के हिसाब से दो करोड़ 16 लाख रुपये पिछले साल जारी किए।
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सोलर प्लांट से विद्यालय के पांच पंखे, एक डीसी सबमर्सिबल पंप तथा 50 लीटर प्रति घंटा का एक आरओ वाटर संयंत्र चलाया जाना था। इस योजना में एक हजार लीटर की ओवरहेड टंकी भी स्थापित कराई जानी थी। बेसिक शिक्षा विभाग ने चारों जिलों में 20-20 प्राथमिक स्कूलों में संयंत्र लगाने को स्कूल चिह्नित कर नेडा को भेज दिया, लेकिन अभी तक ये 40 स्कूलों में ही लगाए गए हैं।
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अन्य स्कूलों के बच्चों की स्वच्छ पानी और पंखों की ठंडी हवा खाने की मंशा भी पूरी नहीं हो सकी। बांदा में प्राथमिक विद्यालय संहिगा, डिघवट, शिव का डेरा, बंडे, मझीवा सानी, गोपरा, मियां बरौली, उमरहनी, जसपुरा और नारायनपुर में सोलर पैनल सुविधा दी गई है। दिल्ली की जेंक्शन कंपनी ने ये पैनल लगाए हैं। पांच साल तक इनके मेंटेनेंस की भी जिम्मेदारी है। नेडा के परियोजना अधिकारी सुरेंद्र कुमार ने बताया कि यहां बजट नहीं आता। शासन से सीधे कंपनी को भुगतान होता है। चारों जिलों में 10-10 स्कूलों में सोलर पैनल संयंत्र लगे हैं। बाकी के स्कूलों में इस साल लगाना है। 


योजना का मकसद
इस योजना से जहां विद्यालयों में बच्चों को स्वच्छ पेयजल के साथ मिड-डे मील बनाने व बर्तन धोने के लिए साफ जल की व्यवस्था सुनिश्चित कराई जानी थी। वहीं क्लास रूम में लगे पंखों से बच्चों व टीचरों को गर्मी से निजात दिलाने की मंशा थी। साथ ही स्वच्छ पेयजल उपलब्ध होने से छात्र-छात्राओं को तमाम जल जनित बीमारियों से बचाने में मदद भी मिलेगी। 

 
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