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Kanpur News: चारा उगाने के लिए दी 25 बीघा जमीन, बना डालीं दुकानें
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कानपुर। एडीएम वित्त कोर्ट के फैसले के बाद से गोशाला सोसाइटी की जमीनों पर कब्जे और बढ़ने लगे हैं। कोर्ट ने गोशाला से करीब 700 बीघा जमीन वापस लेने का आदेश दिया है। इसके बाद से सोसाइटी की ओर से लोगों को खेती और गोवंशों के लिए चारा उगाने के लिए दी गई 25 बीघा जमीन पर भी लोगों ने अवैध तरीके से कब्जा कर दुकानें बना ली हैं। जिन लोगों ने दुकानें और गोदाम बनाकर कब्जा किया था वे अब उसके शेड डालकर कब्जा करने लगे हैं। कब्जे का यह सिलसिला बुधवार को भी जारी रहा।
पिछले दिनों प्रशासनिक कोर्ट ने फैसला दिया था कि 164.684 हेक्टेयर जमीन को गोशाला सोसाइटी को गोशाला के लिए दिया गया था। सर्वे में पाया गया कि वहां पर गोशाला की जगह जमीनों पर कब्जे कर ऑक्सीजन सिलिंडर व डिटर्जेंट पाउडर कंपनी के गोदाम बन गए हैं। भाैती से लेकर देहात के अकबरपुर तहसील स्थित ग्राम बारा तक सोसाइटी जिसे अपनी जमीन बताती आ रही है, उसकी अधिकांश जमीन को प्रशासन अब अपने कब्जे में लेने की तैयारी कर रहा है। इसमें वह जमीन शामिल है जिस पर पूर्वी बांग्लादेश से आए विस्थापितों को बसाया गया था और प्रति परिवार पांच-पांच बीघा जमीन खेती के लिए दी गई थी।
विस्थापितों की मांग है कि सरकार ने उन्हें इन जमीनों पर खेती करने का अधिकार तो दिया लेकिन उसका मालिकाना हक आज तक नहीं मिला है। पिछले दिनों इस समस्या को लेकर बांग्लादेश विस्थापित हिंदू परिवारों के लोग मुख्यमंत्री से मिलने लखनऊ गए थे। इन सभी का नेतृत्व विधायक अभिजीत सिंह सांगा ने किया था। उसके बाद ही एडीएम वित्त कोर्ट का यह फैसला आया जिसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चर्चा है कि जल्द ही इन विस्थापितों को उनकी जमीन का मालिकाना हक दिया जा सकता है। इस संबंध में सोसाइटी हाईकोर्ट का रुख करने की तैयारी में है।
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राज्य सरकार में जो भी जमीनें निहित हैं उन पर यदि कब्जे हैं तो उसका नियमानुसार निस्तारण और सदुपयोग किया जाएगा। इसके लिए पूरी जमीन की रिपोर्ट तैयार कराई जा रही है। ........जितेंद्र प्रताप सिंह जिलाधिकारी
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शासन सीलिंग के नाम पर गोशाला सोसाइटी से जमीन ले रहा है, यह ठीक नहीं है। इसके लिए सोसाइटी हाईकोर्ट जाने की तैयारी कर रही है। फिलहाल गोशाला की कितनी जमीन है उसका आकलन किया जा रहा है।
........सुरेश गुप्ता उप सभापति गोशाला सोसाइटी
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पिछले दिनों प्रशासनिक कोर्ट ने फैसला दिया था कि 164.684 हेक्टेयर जमीन को गोशाला सोसाइटी को गोशाला के लिए दिया गया था। सर्वे में पाया गया कि वहां पर गोशाला की जगह जमीनों पर कब्जे कर ऑक्सीजन सिलिंडर व डिटर्जेंट पाउडर कंपनी के गोदाम बन गए हैं। भाैती से लेकर देहात के अकबरपुर तहसील स्थित ग्राम बारा तक सोसाइटी जिसे अपनी जमीन बताती आ रही है, उसकी अधिकांश जमीन को प्रशासन अब अपने कब्जे में लेने की तैयारी कर रहा है। इसमें वह जमीन शामिल है जिस पर पूर्वी बांग्लादेश से आए विस्थापितों को बसाया गया था और प्रति परिवार पांच-पांच बीघा जमीन खेती के लिए दी गई थी।
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विस्थापितों की मांग है कि सरकार ने उन्हें इन जमीनों पर खेती करने का अधिकार तो दिया लेकिन उसका मालिकाना हक आज तक नहीं मिला है। पिछले दिनों इस समस्या को लेकर बांग्लादेश विस्थापित हिंदू परिवारों के लोग मुख्यमंत्री से मिलने लखनऊ गए थे। इन सभी का नेतृत्व विधायक अभिजीत सिंह सांगा ने किया था। उसके बाद ही एडीएम वित्त कोर्ट का यह फैसला आया जिसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चर्चा है कि जल्द ही इन विस्थापितों को उनकी जमीन का मालिकाना हक दिया जा सकता है। इस संबंध में सोसाइटी हाईकोर्ट का रुख करने की तैयारी में है।
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राज्य सरकार में जो भी जमीनें निहित हैं उन पर यदि कब्जे हैं तो उसका नियमानुसार निस्तारण और सदुपयोग किया जाएगा। इसके लिए पूरी जमीन की रिपोर्ट तैयार कराई जा रही है। ........जितेंद्र प्रताप सिंह जिलाधिकारी
शासन सीलिंग के नाम पर गोशाला सोसाइटी से जमीन ले रहा है, यह ठीक नहीं है। इसके लिए सोसाइटी हाईकोर्ट जाने की तैयारी कर रही है। फिलहाल गोशाला की कितनी जमीन है उसका आकलन किया जा रहा है।
........सुरेश गुप्ता उप सभापति गोशाला सोसाइटी