{"_id":"5b093a7c4f1c1bb26e8b4b85","slug":"ganges-pollution-increase-in-kanpur","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"चार साल बीते लेकिन आचमन लायक भी नहीं हुआ जल, कुछ ऐसी हो गईं 'कानपुर की गंगा'","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चार साल बीते लेकिन आचमन लायक भी नहीं हुआ जल, कुछ ऐसी हो गईं 'कानपुर की गंगा'
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Sat, 26 May 2018 05:33 PM IST
सार
केंद्र ने गंगा नाम से मंत्रालय बनाया, नमामि गंगे प्रोजेक्ट शुरू किया
1200 करोड़ से अधिक की योजना शुरू हुई, हालात जस के तस
विज्ञापन
गंगा में फैली गंदगी
भाजपा सरकार के केंद्र में सत्ता संभालने के बाद गंगा के प्रदूषण को दूर करने के लिए कई नई योजनाएं घोषित की गईं। पहला और बड़ा काम यह हुआ कि सरकार ने गंगा नाम से एक मंत्रालय भी बना दिया। इसके साथ काम करने के लिए नमामि गंगे नाम से एक एजेंसी भी बनाई गई। नरेंद्र मोदी सरकार के पिछले चार साल में गंगा को निर्मल बनाने के लिए गंगा मंत्रालय और नमामि गंगे की तरफ से 1200 करोड़ से अधिक की योजना शुरू की। इसके बावजूद गंगा में प्रदूषण की स्थिति में कोई सुधार नहीं आया। इतना जरूर है कि चार साल में कानपुर की गंगा में कुछ काम होते दिखने लगा है। प्रदूषण कब दूर होगा, इसकी गारंटी सरकार के पास नहीं है। उम्मीद जताई जा रही है कि अगली सरकार आने के बाद अभी जो योजनाएं बनी हैं, यदि उस पर तेजी से अमल होता रहा तो गंगा का जल निर्मल हो सकता है। गंगाजल आचमन के लायक हो पाएगा इस पर भी संदेह है।
गंगा प्रदूषण
1-मार्च 2018 की प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट कानपुर की गंगा में आक्सीजन की मात्रा तेजी से कम हुई है। जिससे इसमें रहने वाले जीवों को खतरा पैदा हो गया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कानपुर की गंगा में सीधे गिरने वाले 12 बड़े नालों को तीन साल पहले चिह्नित किया था। उसमें से अब जाकर एक नाले को डायवर्ट करने की प्रक्रिया शुरू हो पाई है। सीसामऊ नाला जो गंगा में गिरने वाला सबसे बड़ा नाला है, उसके डायवर्जन की प्रक्रिया में अभी भी एक साल का समय लग सकता है।
गंगा प्रदूषण
2-गंगा किनारे स्थापित 360 टेनरियों को दूसरी जगह शिफ्ट करने के लिए कें द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरफ से लगातार नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) के सामने अपना प्रस्ताव रख रहा था। तत्कालीन जल संसाधन मंत्री उमा भारती भी अपने कानपुर दौरे के दौरान कई बार टेनरियों को हटाने की बात कहती रहीं। टेनरियां तो अभी तक नहीं हटीं, उल्टा उनका मंत्रालय जरूर उनसे हट गया। इसके बाद टेनरियों को दूसरी जगह शिफ्ट करने की बात पर सरकार ने चुप्पी साध ली।
विज्ञापन
विज्ञापन
गंगा प्रदूषण
3-2016 में भी एक बार फिर संसदीय समिति डा. मुरली मनोहर जोशी की अध्यक्षता में यहां निरीक्षण को आई। समिति ने अपनी रिपोर्ट में केंद्र सरकार को साफ लिखा कि कानपुर में गंगा में प्रदूषण की स्थिति काफी खराब है। इसे दूर करने के अभी तक जो भी उपाय किए गए वे सभी असरकारक नहीं हैं। डॉ. जोशी की रिपोर्ट में जो भी बातें लिखी गई थी,गंगा के हालात में अभी कमोवेश खास सुधार नहीं हुआ है। बारिश के मौसम में गंगा में पानी अधिक होने से जरूर प्रदूषण की मात्रा कम हो जाती है लेकिन नालों का कचरा गंगा में गिरने से अभी तक नहीं रोका जा सका है।
विज्ञापन
गंगा प्रदूषण
4-गंगा में टेनरियों का प्रदूषित पानी जाने से रोकने के लिए केंद्र सरकार के गंगा मंत्रालय की तरफ से 400 करोड़ से अधिक की लागत से जाजमऊ में नया एसटीपी (शोधन संयंत्र) निर्माण करने की योजना बनी। केंद्र ने धन भी आवंटित कर दिया। एक साल बाद भी योजना सिर्फ कागज पर ही चल रही है। 15 मई को इसे लेकर एनजीटी में सुनवाई होनी है। मामला एसटीपी के निर्माण खर्च में टेनरी संचालकों से 25 प्रतिशत धनराशि लेने का है। एसटीपी के निर्माण से टेनरियों का प्रदूषित पानी जो अभी सीधे गंगा में जा रहा है, उसका शोधन हो सकेगा।