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जानें आखिर क्यों रामभरोसे हुईं गंगा

Sun, 11 Dec 2016 01:15 PM IST
मनोज चौरसिया, अमर उजाला, कानपुर
मनोज चौरसिया, अमर उजाला, कानपुर Updated Sun, 11 Dec 2016 01:15 PM IST
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ganga pollution present position of kanpur
एनजीटी की फटकार पर दौड़े अफसर, क्या करना है पता नहीं
गंगा में जा रहे टेनरियों के जहरीले पानी को निस्तारित करने के लिए जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (जेडएलडी) प्लांट लगेगा या डायल्यूशन प्लांट, अफसर अभी यही तय नहीं कर पाए हैं। एनजीटी की सख्ती के बाद नमामि गंगे के मिशन डायरेक्ट यूपी सिंह ने गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के अफसरों से यह विचार-विमर्श किया कि यहां किस तरह का प्लांट लगवाया जाए लेकिन कोई फैसला नहीं हो सका।
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जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने सात महीने पहले गंगा बैराज में गंगा सफाई अभियान के शिलान्यास समारोह में यहां की टेनरियों के जहरीले पानी को शोधित करने के लिए जेडएलडी प्लांट लगाने का ऐलान किया था। एनजीटी में सुनवाई के दौरान भी अफसरों ने प्लांट स्थापित कराने की बात कही।  लेकिन अभी तक जेडएलडी प्लांट का निर्माण शुरू कराना तो दूर, अफसर यही तय नहीं कर पाए हैं कि यहां जेएलडी या डायल्यूशन प्लांट में से कौन सा प्लांट स्थापित किया जाए। यह बात उस समय उजागर हुई, जब नमामि गंगे के मिशन डायरेक्टर ने गंगा प्रदूषण इकाई के अफसरों से पूछा कि यहां इन दोनों में से कौन सा प्लांट लगाया जाए। मौजूदा स्थितियों और प्रस्तावित दोनों प्लाटों की उपयोगिता, केंद्र सरकार, प्रदेश सरकार और एनजीटी के निर्देशों पर विचार-विमर्श भी हुआ। नमामि गंगे के मिशन डायरेक्टर ने शनिवार को नाव में बैठकर बिठूर मेंनालों से गंगा में गंदगी गिरते देखी। सीसामऊ नाला, सीईटीपी (कॉमन इफ्ल्यूएंट ट्रीटमेंट प्लांट) की स्थिति और संचालन देखने के बाद गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के अफसरों के साथ बैठक कर 2.50 करोड़ लीटर के सीईटीपी निर्माण की प्रक्रिया जल्द शुरू कराने के संकेत दिए। 
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जेडएलडी प्लांट
जेडएलडी प्लांट में टेनरियों से निकलने वाला क्रोमियम युक्त जहरीला पानी गंगा में नहीं जाएगा, बल्कि उसे शतप्रतिशत रीसाइकिल कर पुन: उपयोग में लाया जा सकेगा। यह प्लांट डायल्यूशन प्लांट की तुलना में महंगा है।
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डॉयल्यूशन प्लांट
इस तरह के प्लांट में टेनरियों का क्रोमियमयुक्त पानी पाइप लाइन के माध्यम से ले जाया जाता है, उसमें लगभग तीन गुना सीवेज और केमिकल मिलाकर शोधित किया जाता है। इस प्रकार शोधित पानी सिंचाई के लिए उपयोग में लाया जाता है। जाजमऊ में इसी तरह का 3.6 करोड़ लीटर प्रतिदिन शोधन क्षमता का सीईटीपी प्लांट है, जिसमें 0.9 करोड़ लीटर टेनरी वेस्ट शोधित होता है।
 
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