आवास आवंटन में खेल: डूडा का इंजीनियर पात्र को अपात्र…अपात्र को बनाता था पात्र, नगर आयुक्त बोले- जांच की जाएगी
Kanpur News: डूडा के सीएलटीएस ने 1631 आवेदनपत्रों की सूची नगर निगम के जोनल प्रभारियों को भेजी, जिसमें दिव्यांगों के कागजों में गलती निकालकर अपात्र बनाकर हटा दिया और सामान्य लोगों के नाम शामिल कर दिए।
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कानपुर के डूडा में आवास आवंटन में बड़ा खेल चल रहा है। चार वर्षों से विभाग में सीएलटीसी (इंजीनियर) के पद पर तैनात रहा रवित रंजन ऑनलाइन आवेदनपत्रों में खेल कर रहा था।पहले से आवेदकों को कार्यालय बुलाकर सेटिंग करता था। दिव्यांगों को अपात्र और सक्षम को पात्र बना रहा था। जोनल प्रभारी छह की शिकायत के बाद उसे नौकरी से हटा दिया गया है। अब जांच में फर्जीवाड़े सामने आ रहे हैं।
अमर उजाला ने इसकी पड़ताल की तो हकीकत पता चली। मार्च की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 2.0 का शुभारंभ किया था। डूडा कार्यालय में 15 हजार आवेदनपत्र पहुंचे। सत्यापन के लिए सदर तहसील क्षेत्र के करीब 7600 आवेदकों की सूची बनाई गई। पहले चरण में शासन की प्राथमिकता थी कि विधवा, दिव्यांग, वृद्ध और अविवाहित या विदुर को आवास उपलब्ध कराया जाए।
20 दिन पहले सर्वे शुरू किया गया
डूडा के सीएलटीएस ने 1631 आवेदनपत्रों की सूची नगर निगम के जोनल प्रभारियों को भेजी, जिसमें दिव्यांगों के कागजों में गलती निकालकर अपात्र बनाकर हटा दिया और सामान्य लोगों के नाम शामिल कर दिए। दूसरे चरण में 3500 और बाद में शेष आवेदनपत्रों को संबंधित जोनल प्रभारियों को भेज दिए। पहली सूची का 20 दिन पहले सर्वे शुरू किया गया।
40 से 50 हजार रुपये की मांग की गई
इसमें अपने करीबियों को पहले योजना का लाभ दिलाने के लिए नगर निगम के आरआई और डूडा में तैनात सर्वेयर और सीएलटीसी का गैंग पूरी तरह से सक्रिय हो गया। एक आवास के नाम पर 40 से 50 हजार रुपये की मांग की गई, जिसमें आधे पैसे पहले और आधे बाद में देने की बात भी तय हुई। पड़ताल में ऐसे जरूरतमंद लोगों के आवेदनपत्र पहले से निरस्त कर दिए गए।
केस वन: पति-पत्नी दोनों दिव्यांग, फिर भी अपात्र
कल्याणपुर के पहलवानपुरवा निवासी राजकुमार पुत्र राम शंकर दिव्यांग हैं। इनकी पत्नी राजश्री भी दिव्यांग हैं। ई रिक्शा चलाकर परिवार का लालन पालन करते हैं। सीएलटीसी ने आवेदनपत्र के सत्यापन के बाद निरस्त कर अपात्र कर दिया। कई बार कार्यालय पहुंचे, लेकिन किसी ने नहीं सुनी।
केस दो: दिव्यांग पति सब्जी का ठेला लगा पाल रह परिवार, अपात्र
कल्याणपुर क्षेत्र के कश्यपनगर की रहने वाली दीपमाला हाथ-पैर दोनों से दिव्यांग हैं। पति राम संजीवन भी पैरों से दिव्यांग हैं। सब्जी का ठेला लगाकर परिवार का पालन पोषण करते हैं। आवास के लिए आवेदन किया था, कागजों का जब डूडा कार्यालय से सत्यापन किया गया तो अपात्र कर दिया गया।
केस तीन: न दिव्यांग न विधवा, बना दिया पात्र
गूबा गार्डेन के अशोकनगर निवासी गिरजेश तिवारी, जगदीश शरण और मिर्जापुर की रहनी वाली रागिनी शुक्ला, बाल कृष्णा सामान्य आवेदक थे। ये न तो दिव्यांग, विधवा थे और न ही वृद्ध थे। फिर भी आवेदकों से सांठगांठ कर पहली सूची में नाम जोनल प्रभारी को भेज दिया। सत्यापन कराकर इन्हें पात्र बना दिया गया।
पीएम आवास में शहरी योजना की पात्रता शर्तें
आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्ति की आय तीन लाख तक होनी चाहिए। आवेदक के पास जमीन होनी चाहिए। वो शहरी क्षेत्र का निवासी हो। अगर पिता को लाभ मिल चुका है और उसके पुत्र की भी शादी हो गई तो उसे भी पात्र मानकर योजना का लाभ दिया जाएगा। दिव्यांग, बुजुर्ग, विधवा को प्राथमिकता दी गई है।
सर्वेयर से कोई भी जांच नहीं कराई जाएगी। जोनल प्रभारी ही प्रमुखता से जांच करेंगे। वर्तमान परियोजना अधिकारी को हटा दिया गया है। परियोजना अधिकारी का प्रभार अपर नगर आयुक्त को साैंपा जा रहा है। सभी खामियों की जांच कर उन्हें दूर किया जाएगा। -सुधीर कुमार, नगर आयुक्त