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यूपीएसआईसी में संविदाकर्मियों को रखने में फर्जीवाड़ा, अवैध रूप से जारी आदेश पर लगे रहे कर्मचारी

Fri, 06 Sep 2019 01:05 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Fri, 06 Sep 2019 01:05 PM IST
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Kanpur News: Fraud in keeping contract workers in UPSIC
फर्जीवाड़ा
उत्तर प्रदेश लघु उद्योग निगम (यूपीएसआईसी) में संविदाकर्मियों को रखने में फर्जीवाड़ा सामने आया है। टेंडर अवधि समाप्त होने बाद अवैध रूप से जारी आदेश पर प्रदेश भर के अलग-अलग विभागों में कर्मचारी तैनात रहे। कर्मचारी उपलब्ध कराने वाली कंपनियों का भुगतान भी होता रहा।
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विभागीय जांच में फर्जीवाड़े की पुष्टि हुई। अब शासन के आदेश पर आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) कानपुर ने जांच शुरू की है। आशंका है कि फर्जीवाड़े में करोड़ों रुपये की वित्तीय गड़बड़ियां भी हुई हैं। यूपीएसआईसी तमाम सरकारी विभागों में संविदाकर्मियों को उपलब्ध करवाता है।
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इसके लिए अलग-अलग कंपनियों का निगम में पंजीकरण होता है। ईओडब्ल्यू एसपी बाबूराम ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश भर में निगम के जरिए 3884 कर्मचारियों को विभागों व संस्थानों में रखा गया है। टेंडर की अवधि 12 जनवरी 2019 को समाप्त हो गई थी।

फिर नया आदेश जारी कर बगैर टेंडर के कर्मचारी उपलब्ध करवाने वाली कंपनियों (वेंडरों) को ठेका दे दिया गया। विभागीय जांच में फर्जीवाड़ा पकड़ में आया। आलाधिकारियों के हस्ताक्षर भी दस्तावेजों पर मिले। 

छह कंपनियों को पहुंचाया गया फायदा, नोटिस
निगम ने छह वेंडरों को ठेका दे रखा है। इसमें से एक कंपनी वाराणसी की है, पांच कंपनियां शहर की हैं। इन कंपनियों को सीधेतौर पर फायदा पहुंचाया गया। आखिर टेंडर बगैर निकाले ठेका कैसे दिया गया। जांच से संबंधित कुछ दस्तावेज निगम से मिल गए हैं, कुछ बाकी हैं।

कंपनियों को नोटिस भेजा जा रहा है। कंपनी मालिकों व प्रतिनिधियों के बयान दर्ज किए जाएंगे। जांच के बाद रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। शासन की मंजूरी के बाद एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी। 

करोड़ों हो सकता है फर्जीवाड़ा 
आशंका है कि फर्जीवाड़े में करोड़ों रुपये का घोटाला भी किया गया है। वेंडरों को काम मिलने से लेकर कर्मचारियों को रखने में भी गड़बड़ियां की गईं। उदाहरण के तौर पर कम कर्मचारियों को रखकर अधिक का भुगतान करवा लेना। कुछ ऐसे मामले भी सामने आए हैं, जिनमें कर्मचारियों को वेंडरों ने भुगतान ही नही किया। जबकि यूपीएसआईसी से भुगतान उन्हें कर दिया गया। आर्थिक अनियमितता की आशंका के कारण ही जांच ईओडब्ल्यू जांच ट्रांसफर की गई है।
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