बच्चों को कीड़ा काट लेने का मामला: पापा जहरीला कीड़ा फिर तो नहीं आएगा, बार-बार यही पूछती है रचना
बांदा में एक ही परिवार के चार भाई-बहनों को जहरीले कीड़े ने काट लिया था। इस घटना में तीन बच्चों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि एक बच्ची रचना आईसीयू में भर्ती है। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य का कहना है कि धीरे-धीरे सेहत में सुधार हो रहा है। वहीं, बच्ची बार-बार भाई और बहनों के बारे में पूछती है।
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उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में तीन बहनों और एक भाई समेत चार को जहरीला कीड़ा काट लेने का रहस्य अभी भी सुलझा नहीं है। दो बहनों और छोटे भाई की मौत के बाद गंभीर हालत में राजकीय मेडिकल कॉलेज में भर्ती बड़ी बहन रचना की हालत में सुधार हो रहा है। हालांकि अभी भी वह वेंटीलेटर पर है। रचना डॉक्टरों से पैर में किसी कीड़े के काटने की बात कहती है।
परिजनों से लड़खड़ाती आवाज में भाई-बहनों के बारे में बार-बार पूछती है और कहती है कि पापा जहरीला कीड़ा कहीं फिर तो नहीं आ जाएगा। आठ अगस्त की रात शहर के ज्योति नगर में रहने वाले कामता राजपूत की तीन बेटियां और छोटा बेटा एक ही पलंग पर सो रहे थे। सुबह करीब छह बजे चारों को गंभीर हालत में जिला अस्पताल लाया गया था। यहां से राजकीय मेडिकल कॉलेज ले जाया गया।
बेटे अमन, बेटी दीक्षा और रक्षा को डॉक्टरों में मृत घोषित कर दिया था। रचना का इलाज मेडिकल कॉलेज में चल रहा है। प्राचार्य डॉ. मुकेश यादव ने बताया कि रचना की सेहत में सुधार हो रहा है। होश आ गया है। थोड़ा बोलने भी लगी है, लेकिन अभी उसे आईसीयू में ही रखा जाएगा। पिता कामता राजपूत का कहना है कि चारों बच्चों को जहरीले कीड़े ने काटा है। बच्चों के शरीर पर बारीक निशान देखे हैं।
हालांकि डॉक्टर उन निशानों को नहीं मान रहे। अमन के नाक, दीक्षा के हाथ और रक्षा के पेट में बारीक छेद थे। कामता का कहना है रचना भाई और बहनों के बारे में पूछती है। वह बार-बार कहती है कि पापा कीड़ा फिर तो नहीं आ जाएगा। कामता ने बताया कि उसे पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं मिली है। बताया गया कि लखनऊ से बिसरा की जांच आने के बाद रिपोर्ट दी जाएगी।
अभी तक नहीं मिली कोई आर्थिक मदद
पिता कामता और उनकी पत्नी आरती का कहना है कि वे गरीब हैं। घटना के छह दिन हो गए और अभी तक कोई आर्थिक मदद नहीं मिली। न ही कोई अधिकारी उनके घर आया। कोई पार्टी का नेता भी उनके घर सांत्वना देने नहीं आया है।