{"_id":"5f0b8ed764dcc21f8c04b51e","slug":"five-dozen-cases-were-on-vikas-dubey-yet-the-arms-license-was-not-canceled","type":"story","status":"publish","title_hn":"दहशतगर्द पर थे पांच दर्जन केस, फिर भी कैंसिल नहीं हुआ शस्त्र लाइसेंस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दहशतगर्द पर थे पांच दर्जन केस, फिर भी कैंसिल नहीं हुआ शस्त्र लाइसेंस
Mon, 13 Jul 2020 03:59 AM IST
दुष्यंत शर्मा
सूरज शुक्ला, कानपुर
सूरज शुक्ला, कानपुर
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 13 Jul 2020 03:59 AM IST
विज्ञापन
Amar dubey-vikas dubey
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दहशतगर्द विकास दुबे लाइसेंसी रायफल रखता था। वारदात की रात उसने उसी से पुलिसकर्मियों पर गोलियां भी बरसाईं थीं। पुलिस व एसटीएफ की जांच में इसकाखुलासा हुआ है। हैरानी की बात ये है कि पांच दर्जन से अधिक आपराधिक मामले दर्ज होने के बाद भी वो लाइसेंसी असलहा रखकर घूमता था। पुलिस से लेकर प्रशासनिक अधिकारी भी सवालों के घेरे में हैं। एसएसपी ने इस मामले को जांच में शामिल किया है।
विज्ञापन
विकास दुबे ने करीब ढाई दशक पहले रायफल का लाइसेंस लिया था। एसएसपी दिनेश कुमार पी ने बताया कि 2001 में संतोष शुक्ला हत्याकांड के बाद पुलिस ने उसके शस्त्र लाइसेंस के निरस्तीकरण के लिए प्रशासन को रिपोर्ट भेजी थी। लाइसेंस निरस्त हुआ या नहीं ये जानकारी नहीं है। मगर वर्तमान में वो रायफल उसके पास ही थी। उसने पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों की मिलीभगत कर लाइसेंस बरकरार रखा।
विज्ञापन
आखिर कैसे मिला लाइसेंस
बदमाश विकास दुबे पर 1990 में पहला केस दर्ज हुआ। 1992 में हत्या का पहला मुकदमा हुआ। इससे उसको किसी भी तरह का लाइसेंस नियमानुसार नहीं मिल सकता है। अब हैरानी की बात ये कि उसको शस्त्र लाइसेंस कैसे मिल गया। हत्या के पांच केस दर्ज होने के बाद भी शस्त्र लाइसेंस बचा कैसे रहा।
विज्ञापन
इनके नाम शस्त्र लाइसेंस निरस्त होंगे
पुलिस के मुताबिक आरोपी विष्णु पाल के नाम पर रिवाल्वर, एक डबल बैरल बंदूक का लाइसेंस है। आरोपी जहान सिंह यादव, ग्राम प्रधान राम सिंह, राजन, श्रीकांत शुक्ला व आलोक के नाम पर डबल बैरल बंदूक है। जेल भेजे गए विकास के नौकर दयाशंकर के पास सिंगल बैरल बंदूक का लाइसेंस है। यादवेंद्र सिंह के पास लाइसेंसी राइफल है। विकास के भाई दीपू के पास लाइसेंसी राइफल व उसकी पत्नी अंजली के नाम एक रिवाल्वर है। डीजीपी ने इसकी रिपोर्ट तलब की है। ये सभी शस्त्र लाइसेंस निरस्त होंगे।
विकास दुबे वर्तमान में एक लाइसेंसी रायफल रखता था। पता किया जा रहा है कि उसका लाइसेंस निरस्त हुआ था कि नहीं। लाइसेंस में पुलिस रिपोर्ट लगाने वाले दरोगा व थानेदार की भी जानकारी की जा रही है। असलहा विभाग से भी जानकारी मांगी गई है।
- दिनेश कुमार पी, एसएसपी कानपुर