Triple Talaq: कानपुर में दर्ज हुई थी पहली तीन तलाक की एफआईआर, बहकावे में लिखा दिया मुकदमा, पढ़े पूरा मामला
कानपुर शहर में दर्ज हुई पहली तीन तलाक की एफआईआर के मामले में कोर्ट ने आरोपी को बरी कर दिया, लेकिन मामले में कानून के दुरुपयोग की बात सामने आई है। कोर्ट में पीड़िता और पिता के बयान से खुलासा हुआ है।
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उत्तर प्रदेश के कानपुर में दर्ज हुए तीन तलाक के पहले मुकदमे में कोर्ट ने फैसला सुनाकर शौहर को बाइज्जत बरी कर दिया। वहीं, इस मामले में कानून के दुरुपयोग की बात भी सामने आई। शौहर-बीवी के बीच मनमुटाव से लगी चिंगारी को लोगों ने हवा देकर शादीशुदा जिंदगी में आग लगाने का काम किया।
तीन तलाक का कानून लागू होते ही उसका सहारा लेकर झूठी रिपोर्ट दर्ज कराई और शौहर को जेल भी भिजवा दिया। बीवी को जब गलती का अहसास हुआ तो उसने कोर्ट में दिए बयान में लोगों के बहकावे में मुकदमा दर्ज कराने की बात बताई थी।
बांसमंडी के पटाखा कारोबारी अंजुम नैयर की बेटी फारिया का निकाह कैंट निवासी रियल इस्टेट कारोबारी साजिद नफीस से वर्ष 2007 में हुआ था। घरेलू बातों को लेकर फारिया और ससुरालीजनों में तनाव होने लगा। फारिया को साजिद पर दूसरी शादी करने का शक था। लोगों ने शक को यकीन में बदलने के लिए फारिया से साजिद द्वारा तीन तलाक देने की बात कह दी।
साजिद ने फारिया के सामने तीन तलाक दिया ही नहीं। फारिया ने कोर्ट में दिए बयान में खुद स्वीकार किया कि लोगों के बहकावे में आकर उसने मुकदमा लिखा दिया था। पति व ससुर ने न तो कभी दहेज मांगा, न ही गाली-गलौज या मारपीट की और न ही उसे तीन तलाक दिया गया।
फारिया के पिता अंजुम ने भी कोर्ट में दिए बयान में फारिया की ही बातों को दोहराया। तीन तलाक न दिए जाने की बात कही। साजिद ने भी वर्ष 2020 में ग्वालटोली थाने में फारिया, उसके पिता अंजुम नैयर व सौतेली सास उज्मा के खिलाफ धोखाधड़ी व जालसाजी का मुकदमा दर्ज कराया है।
साजिद का आरोप है कि डॉक्टरी रिपोर्ट के अनुसार फारिया मां नहीं बन सकती। वर्ष 2019 में तीनों ने मिलकर नगर निगम से एक बच्चे का फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनवा लिया। बच्चे को साजिद का बताकर जबरन संपत्ति हड़पने का षड्यंत्र रचा और झूठे मुकदमे में फंसा दिया। साजिद का कहना है कि रुपये ऐंठने के लिए झूठे मुकदमे में फंसाया गया था। मानहानि का वाद दायर किया जाएगा।