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खुशखबरीः नए साल से घर बैठे लगाएं उद्योग
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Tue, 29 Nov 2016 11:55 AM IST
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आज से शुरू होगी रीटेंडरिंग की प्रक्रिया, पहले सिर्फ एक कंपनी ने लिया था भाग
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उप्र राज्य औद्योगिक विकास निगम (यूपीएसआईडीसी) नए साल से अपनी कार्यशैली में परिवर्तन करेगा। मार्च-2017 से प्रदेश भर के औद्योगिक क्षेत्रों और उनमें उपलब्ध खाली भूखंडों की डिटेल एक क्लिक में मिलेगी। उद्योग लगाने के इच्छुक घर बैठे मनचाहा भूखंड पसंद कर सकेंगे। इसके आवंटन से लेकर विभिन्न प्रकार के शुल्कों का भुगतान भी ऑनलाइन होगा।
निगम की वर्तमान व्यवस्था में उद्योग लगाने वालों को भूखंड का आवेदन करने से लेकर आवंटन और उद्योग लगाने तक मुख्यालय के अनगिनत चक्कर लगाने पड़ते हैं। दूरदराज के उद्यमियों को भी कानपुर स्थित मुख्यालय की दौड़ लगानी पड़ती है। उद्यमियों को छोटे-छोटे कामों के लिए लिपिकों के आगे-पीछे घूमना पड़ता है। बिना कुछ लिए-दिए जल्द काम भी नहीं होता।
इस प्रोजेक्ट से जुड़े निगम के मुख्य प्रबंधक बीके नंदा ने बताया कि ‘ईज ऑफ डुइंग बिजनेस’ में संस्थान की पूरी कार्यप्रणाली को ऑनलाइन माध्यम में बदलना है। इसके लिए सिस्टम डेवलप करने की कार्यवाही शुरू कर दी गई है। 25 अक्तूबर को इसके लिए बिड आमंत्रित की गई थी। 25 नवंबर को कंपनी का चयन होना था, लेकिन एक ही कंपनी आई। मंगलवार से दोबारा टेंडर मंगाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
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यूपीएसआईडीसी प्रबंध निदेशक अमित कुमार घोष ने बताया कि नए साल से औद्योगिक क्षेत्रों के नक्शों, सभी खाली भूखंडों, आवेदन, आवंटन और भुगतान प्रक्रिया, जरूरी फार्मों आदि को ऑनलाइन कर दिया जाएगा। इसके बाद उद्योग लगाने के इच्छुक लोगों या आवंटियों को निगम ऑफिस के चक्कर लगाने से राहत मिलेगी। उद्यमियों से जुड़ी शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए फाइल ट्रैकिंग सिस्टम भी डेवलेप किया जाएगा। शिकायत पर हुई कार्यवाही की प्रत्येक जानकारी अधिकारियों के साथ ही उद्यमी को भी मिलती रहेगी।
यह है ‘ईज ऑफ डुइंग बिजनेस’
केंद्र सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ इंडस्ट्रियल पॉलिसी एंड प्रमोशन ने ‘ईज ऑफ डुइंग बिजनेस’ के अंतर्गत प्रदेश सरकारों से कारोबारी माहौल को बेहतर बनाने की दिशा में काम करने के निर्देश दिए थे। ताकि देश-विदेश की बड़ी निर्माण कंपनियां निवेश और विकास कार्यों के लिए आगे आएं। इसके लिए सरकारी विभागों की कार्यशैली को सुधारने की कवायद की जा रही है। इसी कड़ी में निगम ने इस कांसेप्ट को लागू करने की दिशा में काम शुरू किया है।
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निगम की वर्तमान व्यवस्था में उद्योग लगाने वालों को भूखंड का आवेदन करने से लेकर आवंटन और उद्योग लगाने तक मुख्यालय के अनगिनत चक्कर लगाने पड़ते हैं। दूरदराज के उद्यमियों को भी कानपुर स्थित मुख्यालय की दौड़ लगानी पड़ती है। उद्यमियों को छोटे-छोटे कामों के लिए लिपिकों के आगे-पीछे घूमना पड़ता है। बिना कुछ लिए-दिए जल्द काम भी नहीं होता।
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इस प्रोजेक्ट से जुड़े निगम के मुख्य प्रबंधक बीके नंदा ने बताया कि ‘ईज ऑफ डुइंग बिजनेस’ में संस्थान की पूरी कार्यप्रणाली को ऑनलाइन माध्यम में बदलना है। इसके लिए सिस्टम डेवलप करने की कार्यवाही शुरू कर दी गई है। 25 अक्तूबर को इसके लिए बिड आमंत्रित की गई थी। 25 नवंबर को कंपनी का चयन होना था, लेकिन एक ही कंपनी आई। मंगलवार से दोबारा टेंडर मंगाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
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यूपीएसआईडीसी प्रबंध निदेशक अमित कुमार घोष ने बताया कि नए साल से औद्योगिक क्षेत्रों के नक्शों, सभी खाली भूखंडों, आवेदन, आवंटन और भुगतान प्रक्रिया, जरूरी फार्मों आदि को ऑनलाइन कर दिया जाएगा। इसके बाद उद्योग लगाने के इच्छुक लोगों या आवंटियों को निगम ऑफिस के चक्कर लगाने से राहत मिलेगी। उद्यमियों से जुड़ी शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए फाइल ट्रैकिंग सिस्टम भी डेवलेप किया जाएगा। शिकायत पर हुई कार्यवाही की प्रत्येक जानकारी अधिकारियों के साथ ही उद्यमी को भी मिलती रहेगी।
यह है ‘ईज ऑफ डुइंग बिजनेस’
केंद्र सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ इंडस्ट्रियल पॉलिसी एंड प्रमोशन ने ‘ईज ऑफ डुइंग बिजनेस’ के अंतर्गत प्रदेश सरकारों से कारोबारी माहौल को बेहतर बनाने की दिशा में काम करने के निर्देश दिए थे। ताकि देश-विदेश की बड़ी निर्माण कंपनियां निवेश और विकास कार्यों के लिए आगे आएं। इसके लिए सरकारी विभागों की कार्यशैली को सुधारने की कवायद की जा रही है। इसी कड़ी में निगम ने इस कांसेप्ट को लागू करने की दिशा में काम शुरू किया है।