{"_id":"0f309078d41c273b73596e1930d976b0","slug":"financly-help-to-house-collapse-suffer-family-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"परिवार को दी आर्थिक मदद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
परिवार को दी आर्थिक मदद
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर देहात
Updated Sat, 07 Feb 2015 01:28 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जिलाधिकारी मासूम अली सरवर ने कलेक्ट्रेट सभागार में भरथू गांव के पीड़ित मां-बाप को 9 लाख 15 हजार 595 रुपये की चेक के माध्यम से आर्थिक मदद दी। जिलाधिकारी ने अन्य तरीके मदद दिलाए जाने का भरोसा दिलाया है।
शुक्रवार को जिलाधिकारी मासूम अली सरवन ने पीड़ित मां मीना देवी और पिता छु्ट्टू को हर संभव मदद का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि उन्हें जो तकलीफ मिली है। उनकी भरपाई कोई नहीं कर सकता है।
वह दुख की इस घड़ी में उनके साथ है। इसी दौरान जिलाधिकारी ने 9 लाख 15 हजार 595 रुपये की छह चेक पीड़ित दंपति को दी। शुक्रवार की सुबह गांव में घुसते ही मीना की आंखें भर आईं।
विज्ञापन
जैसे-जैसे उसके कदम आगे बढ़ रहे थे, चेहरे पर अजीब सा डर झलक रहा था। पति छुट्टू और पड़ोसी महिलाओं ने मीना की बांहे कसकर पकड़ ली। जैसे ही मीना अपने घर के सामने पहुंची। वह फूट-फूट कर रोने लगी।
मीना का दुख देख महिलाएं भी भावुक हो गई। सभी ने मीना को संभाला। लेकिन, मीना का दर्द सिसकी बनकर बार-बार उभर रहा था।
कोई मीना के लिए गर्म दूध लाया तो कोई मुंह में पानी पिलाता रहा लेकिन मीना पथराई आंखों से मलबा को निराहती रही।
विज्ञापन
शुक्रवार को जिलाधिकारी मासूम अली सरवन ने पीड़ित मां मीना देवी और पिता छु्ट्टू को हर संभव मदद का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि उन्हें जो तकलीफ मिली है। उनकी भरपाई कोई नहीं कर सकता है।
विज्ञापन
वह दुख की इस घड़ी में उनके साथ है। इसी दौरान जिलाधिकारी ने 9 लाख 15 हजार 595 रुपये की छह चेक पीड़ित दंपति को दी। शुक्रवार की सुबह गांव में घुसते ही मीना की आंखें भर आईं।
विज्ञापन
जैसे-जैसे उसके कदम आगे बढ़ रहे थे, चेहरे पर अजीब सा डर झलक रहा था। पति छुट्टू और पड़ोसी महिलाओं ने मीना की बांहे कसकर पकड़ ली। जैसे ही मीना अपने घर के सामने पहुंची। वह फूट-फूट कर रोने लगी।
मीना का दुख देख महिलाएं भी भावुक हो गई। सभी ने मीना को संभाला। लेकिन, मीना का दर्द सिसकी बनकर बार-बार उभर रहा था।
कोई मीना के लिए गर्म दूध लाया तो कोई मुंह में पानी पिलाता रहा लेकिन मीना पथराई आंखों से मलबा को निराहती रही।