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मौसम का खुमार, हर ओर प्यार...प्यार...प्यार
अमर उजाला ब्यूरो/कानपुर
Updated Sun, 14 Feb 2016 01:25 AM IST
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ऋतुराज वसंत कहें या वैलेंटाइन वीक, हकीकत यह है कि शानदार मौसम में न ज्यादा गर्मी है और न ज्यादा ठंड इसीलिए मौसम में आदमी का बदल जाता है व्यवहार और छाने लगता है प्यार का खुमार।
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फरवरी और मार्च में रोमांस ज्यादा बढ़ने की वैज्ञानिक वजह अच्छा मौसम है। रोमांस की आग में मेलाटोनिन हार्मोन भी घी की तरह काम करता है। कई दिनों की लुकाछिपी के बाद सूरज की किरणें आंखों के रास्ते होते हुए मेलाटोनिन हार्मोन के स्राव को कम करती हैं। इससे आदमी का मूड चेंज होने लगता है।
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वह कुछ रोमांचक करने के लिए मचलने लगता है और इसमें प्यार भी शामिल हो जाता है। दिमाग में स्थित पीनियल ग्लैंड से इस मेलाटोनिन हार्मोन का स्राव होता है। अंधेरे में इस हार्मोन से स्राव ज्यादा होता है लिहाजा आदमी सुस्ती का अनुभव करता है।
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माना जाता है कि ठंड के मौसम में सूरज की किरणें कम प्रभावशाली होती हैं और पूरा प्रकाश धरती पर नहीं आ पाता इसलिए यह हार्मोन ज्यादा पैदा होता है। वसंत में सूरज की किरणें तेज होने लगती हैं। इस कारण यह हार्मोन कम बनता है और आदमी मन विचलित ज्यादा होता है। हालांकि डॉक्टरों में इसे लेकर कई तरह की अवधारणाएं हैं।
डॉ. अनुराग वाजपेयी बताते हैं वसंत में शरीर रिलैक्स हो जाता है। न तो गर्मी और न ही ठंड से शरीर को बचाने की चिंता रहती है। जब शरीर रिलैक्स होता है तो वह अन्य कार्यों के बारे में सोचता है। इसमें प्यार, सेक्स शामिल है। जब तनाव होता है तो इच्छाएं दबने लगती हैं।
डॉ. अनुभव ठुकराल कहते हैं, यह मौसम खुशनुमा हो जाता है। आदमी का मूड परिस्थितियों पर ही निर्भर करता है। मौसम अच्छा होता है तो मूड भी अच्छा हो जाता है। न्यूरो बिहैवियर बदलने से मस्ती छाने लगती है। आदमी प्यार की बातें करने लगता है और उस पर मादकता छाने लगती है।
वसंत में फागुन सा अहसास
कानपुर(ब्यूरो)। वसंत ऋतु के लगते ही हल्की उमस-ठंड से फागुन जैसा मौसम हो गया है। पछुआ हवाएं भी इसका कारक हैं। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के मौसम विज्ञानी डॉ. अनिरुद्ध दुबे ने बताया कि फागुन में गर्मी और तेज हवाओं के साथ ठंड की वापसी हो जाती है।
उन्होंने बताया कि पछुआ हवाएं मौसम को सामान्य से अधिक गर्मी वाला बना रही है। दिन का तापमान सामान्य से 3.0 डिग्री सेल्सियस व रात का पारा सामान्य से लगभग 1.0 डिग्री सेल्सियस अधिक है।
ऐसे में पड़ रही गर्मी और उमस से वही मौसम बन रहा है, जो फागुन महीने में बनता है। डॉ. दुबे ने बताया कि तापमान लगातार बढ़ रहा है इससे अब ठंड की उम्मीद नहीं है।