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कोरोनावायरस के खतरे के बीच फैला बर्ड फ्लू का खौफ, मुर्गी फार्म संचालक छिड़क रहे दवा
Sat, 09 Jan 2021 12:08 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sat, 09 Jan 2021 12:08 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : amar ujala
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कोरोनावायरयस के खतरे के बीच अब पूरे देश में बर्ड फ्लू का खौफ फैल रहा है। कानपुर में मुर्गी फार्म संचालक बर्ड फ्लू से मुर्गियों को सुरक्षित रखने के लिए मुर्गी फार्मों पर केमिकल और वायरस मारने वाली दवाओं का स्प्रे करवा रहे हैं। चौबेपुर, मंधना, भीतरगांव, बिधनू, सचेंडी, सरसौल, बिल्हौर के अलावा कानपुर नगर से सटे इलाकों में दो दर्जन से अधिक मुर्गी फार्मों का संचालन किया जाता है।
शहर में प्रतिदिन 50 हजार मुर्गियों और 20 लाख अंडों की खपत है। मौजूदा समय में खपत आधी रह गई है। कीमतें भी गिरी हैं। पोल्ट्री फार्मर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय तिवारी ने बताया कि बाजार में तीन कंपनियों के रसायन हैं जिन्हें पानी में मिलाकर फार्मों के आसपास और हवा में स्प्रे मशीन के माध्यम से छिड़कवाया जा रहा है। एक लीटर पानी में चार ग्राम दवा या रसायन मिलकर 125 स्क्वायर फीट जगह पर इस्तेमाल किया जा सकता है।
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इससे हवा में ही वायरस मर जाता है। इसका सभी फार्म संचालक उपयोग कर रहे हैं। बाबूपुरवा में चिकन और अंडे के कारोबारी मोहम्मद रईस अंसारी ने बताया कि मुर्गों की खपत आधी रह गई है। प्रतिदिन करीब 15-20 लाख अंडे की मांग होती है जो 12 लाख प्रतिदिन रह गई है। चिकन और अंडे को ज्यादातर लोग पकाकर खाते हैं। लेकिन कच्चा अंडा खाने से लोग परहेज करने लगे हैं।
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शहर में प्रतिदिन 50 हजार मुर्गियों और 20 लाख अंडों की खपत है। मौजूदा समय में खपत आधी रह गई है। कीमतें भी गिरी हैं। पोल्ट्री फार्मर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय तिवारी ने बताया कि बाजार में तीन कंपनियों के रसायन हैं जिन्हें पानी में मिलाकर फार्मों के आसपास और हवा में स्प्रे मशीन के माध्यम से छिड़कवाया जा रहा है। एक लीटर पानी में चार ग्राम दवा या रसायन मिलकर 125 स्क्वायर फीट जगह पर इस्तेमाल किया जा सकता है।
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इससे हवा में ही वायरस मर जाता है। इसका सभी फार्म संचालक उपयोग कर रहे हैं। बाबूपुरवा में चिकन और अंडे के कारोबारी मोहम्मद रईस अंसारी ने बताया कि मुर्गों की खपत आधी रह गई है। प्रतिदिन करीब 15-20 लाख अंडे की मांग होती है जो 12 लाख प्रतिदिन रह गई है। चिकन और अंडे को ज्यादातर लोग पकाकर खाते हैं। लेकिन कच्चा अंडा खाने से लोग परहेज करने लगे हैं।