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पिता को घुमाते रहे डॉक्टर बेटे की थम गईं सांसें, अस्पताल भी था आयुष्मान कार्ड भी पर इलाज नहीं मिला
Wed, 25 Sep 2019 12:40 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
यूपी डेस्क, अमर उजाला, हरदोई
यूपी डेस्क, अमर उजाला, हरदोई
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Wed, 25 Sep 2019 12:40 AM IST
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एंबुलेंस सेवा
- फोटो : अमर उजाला
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हरदोई जिला अस्पताल तक पहुंचकर भी इलाज में हीलाहवाली और देरी से एक निशक्त के बेटे की जान चली गई। बुखार से तपते 12 वर्षीय बेटे को अस्पताल लाने वाले निशक्त के पास आयुष्मान योजना का गोल्डन कार्ड भी है।
अनहोनी का शिकार हुआ बेहटागोकुल थाना क्षेत्र के ग्राम जमलापुर निवासी निशक्त उमाशंकर का बेटा नितिन। उमाशंकर के मुताबिक सोमवार रात नितिन को तेज बुखार हो गया था। जिला अस्पताल ले जाने के लिए रात 11 बजे से मंगलवार भोर तक एंबुलेंस बुलाने के लिए 108 नंबर पर 11 बार फोन किया, लेकिन फोन नहीं उठा।
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अनहोनी का शिकार हुआ बेहटागोकुल थाना क्षेत्र के ग्राम जमलापुर निवासी निशक्त उमाशंकर का बेटा नितिन। उमाशंकर के मुताबिक सोमवार रात नितिन को तेज बुखार हो गया था। जिला अस्पताल ले जाने के लिए रात 11 बजे से मंगलवार भोर तक एंबुलेंस बुलाने के लिए 108 नंबर पर 11 बार फोन किया, लेकिन फोन नहीं उठा।
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मंगलवार की सुबह आठ बजे टेंपो से बेटे को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। इमरजेंसी में मौजूद डॉक्टर ने 13 नंबर कमरे में बाल रोग विशेषज्ञ के पास ले जाने को कहा, लेकिन वह अवकाश पर थे। वह फिर इमरजेंसी कक्ष पहुंचे, मगर यहां फिर एक अन्य डॉक्टर के ले जाने की सलाह दे दी गई।
उमाशंकर का कहना है कि करीब तीन घंटे भटकने से परेशान होकर वह बुखार से तपते बेटे को लेकर सीएमएस के पास पहुंचे। सीएमएस ने रूम नंबर 13 नंबर में भेज दिया। इस बीच बेटे की हालत ज्यादा बिगड़ने लगी। भागकर फिर इमरजेंसी में पहुंचे लेकिन तब तक बेटे की सांसें थम गईं।
इस बाबत पूछने पर जिम्मेदारों के गोलमोल जवाब सामने आए। इमरजेंसी में ड्यूटी पर मौजूद डॉ. कमर हैदर का कहना है कि बच्चे का प्राथमिक उपचार किया गया था। सीएमएस डॉ. एके शाक्य ने कहा कि बच्चे को ओपीडी में दिखाने भेजा था। बाद में क्या हुआ, जानकारी नहीं है।
उमाशंकर का कहना है कि करीब तीन घंटे भटकने से परेशान होकर वह बुखार से तपते बेटे को लेकर सीएमएस के पास पहुंचे। सीएमएस ने रूम नंबर 13 नंबर में भेज दिया। इस बीच बेटे की हालत ज्यादा बिगड़ने लगी। भागकर फिर इमरजेंसी में पहुंचे लेकिन तब तक बेटे की सांसें थम गईं।
इस बाबत पूछने पर जिम्मेदारों के गोलमोल जवाब सामने आए। इमरजेंसी में ड्यूटी पर मौजूद डॉ. कमर हैदर का कहना है कि बच्चे का प्राथमिक उपचार किया गया था। सीएमएस डॉ. एके शाक्य ने कहा कि बच्चे को ओपीडी में दिखाने भेजा था। बाद में क्या हुआ, जानकारी नहीं है।