Fatehpur Politics: भगवा किला तोड़ने को सपा की घेराबंदी, पार्टी हर रणनीति पर कर रही है काम, पढ़ें अपडेट
Fatehpur News: सपा को ऐसे प्रत्याशी की तलाश है, जिसका नाम आते ही भाजपा में कम से कम हताश का भाव हो और उनकी पार्टी से एक बड़ा वर्ग जुड़ सके। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा है कि ऐसा चेहरा सपा ने ढूंढ लिया है। भाजपा के नेता राजधानी जाकर सपा के आलानेताओं से मिल भी चुके हैं।
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लोकसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है। फतेहपुर जनपद से भाजपा ने अपना प्रत्याशी एक माह पहले ही घोषित कर दिया है। उसके बाद भी सपा अपने पत्ते खोलने में जल्दबाजी नहीं दिखा रही है। वह ऐसी किलेबंदी में लगी है, कि भाजपा का किला ढहा दिया जाए। इसके लिए हर हथकंडा अपनाया जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में ये भी अटकलें हैं कि भाजपा के एक दिग्गज नेता को सपा का प्रत्याशी बनाकर उतारा जाए।
सपा तीसरी बार भाजपा सांसद का चक्रव्यूह तोड़ने के लिए हर रणनीति पर काम कर रही है। पार्टी ने पहले कुर्मी बिरादरी से उम्मीदवार उतारने की तैयारी की। इसमें सबसे पहले प्रदेश स्तर के एक नेता व दूसरे दो बार के सांसद रह चुके नेता को चेहरा बनाकर जीत का रास्ता तय करने पर मंथन किया जा रहा था। इस बीच क्षत्रिय वर्ग से पार्टी के ही एक नेता का नाम उभरा।
लेकिन वे स्वयं प्रत्याशी चयन को लेकर अपने ही सवालों का जवाब साफगोई से शायद नहीं दे पा रहे थे। इसलिए अब ऐसे प्रत्याशी की तलाश है, जिसका नाम आते ही भाजपा में कम से कम हताश का भाव हो और उनकी पार्टी से एक बड़ा वर्ग जुड़ सके। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा है कि ऐसा चेहरा सपा ने ढूंढ लिया है। भाजपा के नेता राजधानी जाकर सपा के आलानेताओं से मिल भी चुके हैं।
सभी मापदंडों में फिट बैठने वाले पर ही लगेगी अंतिम मुहर
वे अपनी रणनीति के अनुसार अब संतुष्ट हैं। फिलहाल उनके पास अब कुर्मी और क्षत्रिय बिरादरी से दो-दो प्रत्याशी हैं। अगर कोई राजनीतिक समीकरण नहीं बदला, तो उनमें से ही एक के चयन की बात हो रही है। सभी मापदंडों में फिट बैठने वाले पर ही अंतिम मुहर लगेगी। वहीं राजनीतिज्ञों का मानना है कि पार्टी ने दो नेताओं में किसी एक पर दांव खेला, तो हार-जीत मतदाता ही तय करेंगे, लेकिन टक्कर जबरदस्त होगी।
भाजपा में भी खलबली
भाजपा के एक बड़े नेता सपा के लगातार संपर्क में हैं और उनकी लोकसभा प्रत्याशी के रूप में उम्मीदवारी भी मजबूत मानी जा रही है। ये खबर प्रदेश स्तर के भाजपा नेताओं तक पहुंच चुकी है। इसे लेकर पार्टी में हलचल भी तेज हो गई है। मान मनौव्वल का दौर भी शुरू हो गया है। बागी होने का मन बना चुके नेता के घर में डेरा डालना शुरू हो गया है। वहीं मठाधीश मान रहे हैं कि भाजपा के अंदरखाने में भी कुछ चल रहा है। यही वजह है कि तेज रफ्तार में प्रचार नहीं हो रहा है। ऐसे में सपा भी संतुष्ट होना चाहती है कि भाजपा प्रत्याशी अब नहीं बदलेगा। इसके बाद वे सामने उतरे प्रत्याशी को देखते हुए अपना चेहरा साफ करेंगे।
हैट्रिक लगाने के लिए भितरघात से होगा बचना
भाजपा से साध्वी निरंजन ज्योति दो बार सांसद रह चुकी हैं। उन्हें तीसरी बार टिकट मिला है। अगर जीतती हैं तो हैट्रिक लगाने वाली पहली सांसद होंगी। हालांकि उनके इतिहास बनाने में कई रुकावटें भी हैं। एक ऐसा वर्ग भी है, जो जिले में अपनी सत्ता काबिज रखना चाहता है और अन्य बिरादरी को कमान नहीं देना चाहता है। ऐसे में भितरघात रोकना भी भाजपा के लिए बड़ी चुनौती होगी।
बसपा का वार सहना आसान नहीं
जनपद में बसपा भी कमजोर नहीं रही है। पिछले लोकसभा चुनावों में नजर डालें, तो बसपा रनर के रूप में दूसरे नंबर पर थी। बसपा ने भी अपने उम्मीदवार की घोषणा अब तक नहीं की है। दोनों पार्टियों का समीकरण बिगाड़ने में बसपा का मुख्य रोल रहेगा। पार्टी ने किसी जनाधार वाले व्यक्ति को टिकट दिया, तो मुकाबले में रोमांच आएगा।