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Kanpur News: बदलते मौसम में फसल सुरक्षा के लिए स्मार्ट साथी बनेगा फार्मर फर्स्ट एप

Thu, 12 Mar 2026 02:14 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 12 Mar 2026 02:14 AM IST
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'Farmer First' App to Become a Smart Companion for Crop Protection Amidst Changing Weather Conditions
कानपुर। जलवायु परिवर्तन और अचानक होने वाले मौसमी बदलावों को ध्यान में रखते हुए चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय ने फार्मर फर्स्ट एप तैयार किया है। इसके माध्यम से किसानों और आम लोगों को मौसम की जानकारी, फसल सुरक्षा, अनुदान और मुआवजे संबंधी जानकारी दी जाएगी। इस एप से महानगर समेत उत्तर प्रदेश के 17 जिलों के किसानों के लिए अलग-अलग एडवाइजरी जारी की जाएगी। एप किसानों को जंगली पशुओं के खेत चर लेने, भारी बारिश या ओलावृष्टि से फसल नुकसान होने की स्थिति में भी मार्गदर्शन देगा।
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जलवायु परिवर्तन का मौसमी गतिविधियों पर असर देखने को मिल रहा है। कभी बारिश बिल्कुल नहीं होती तो कहीं अचानक भारी वर्षा हो जाती है। सूखे के बाद ओले पड़ते हैं और मौसम की अवधि आगे-पीछे हो जाती है। इससे फसलों में नए रोग फैलते हैं, सूक्ष्म कीट प्रभावित होते हैं और बुवाई पर असर पड़ता है। इन बदलते मौसम की परिस्थितियों से निपटने के लिए फार्मर फर्स्ट एप तैयार किया गया है।
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सीएसए के मौसम विभाग के तकनीकी अधिकारी अजय मिश्रा ने बताया कि एप का काम लगभग पूरा हो गया है। 12 जिलों की जानकारी अपलोड कर दी गई है और शेष पांच जिलों की जानकारी अपलोड की जानी बाकी है। अगले महीने एप को प्ले स्टोर में प्रदर्शित कर दिया जाएगा। इसके साथ ही एप से जुड़ा एक व्हाट्सएप ग्रुप भी बनाया जाएगा, जिसमें किसान जुड़कर अपनी बात रख सकते हैं और समय-समय पर एडवाइजरी प्राप्त कर सकते हैं। क्यूआर कोड जारी कर इस ग्रुप से जुड़ने की सुविधा दी जाएगी।
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इन जिलों को एप में जोड़ा
कानपुर नगर, कानपुर देहात, औरैया, इटावा, फिरोजाबाद, हरदोई, हाथरस, कासगंज, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, मैनपुरी, मथुरा, उन्नाव, एटा, आगरा, लखनऊ और कन्नौज।
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इसलिए मौसम का पूर्वानुमान जरूरी
- किसान वर्षा, तापमान, हवा की दिशा और आर्द्रता के आधार पर सही समय पर बोआई, खाद डालने, कीट-रोग नियंत्रण और कटाई का निर्णय ले सकते हैं।

- पूर्वानुमान के आधार पर किसान क्षेत्र के लिए सबसे उपयुक्त फसल और किस्म चुन सकते हैं।

- संसाधनों जैसे पानी, बीज, उर्वरक और कीटनाशकों का बेहतर उपयोग होता है, लागत कम होती है और दक्षता बढ़ती है।

- अचानक बाढ़, सूखा, ओलावृष्टि या पाले जैसी मौसमी आपदाओं से होने वाले नुकसान में कमी आती है।

- कीटों और बीमारियों के फैलने का अनुमान लगाकर समय पर रोकथाम की जा सकती है।

- सही समय पर प्रबंधन से फसल की गुणवत्ता में सुधार होता है

- बदलते मौसम के अनुसार स्मार्ट खेती करने का ज्ञान मिलता है।
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