Fake PMO Officer: दो मोबाइल के खुलवाए थे लॉक, अब डिटेल सार्वजनिक करने से कतरा रही पुलिस, जानिए क्या है वजह
Kanpur Crime: ठग संतोष ने एसटीएफ को बताया था कि उसे भारत भ्रमण का शौक है। वह जहां भी जाता था, वहां किसी ने किसी आईपीएस, पीपीएस अफसर के माध्यम से अपना वीवीआईपी सम्मान पा लेता था। अमर उजाला के हाथ शातिर ठग की एक तस्वीर लगी है।
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कानपुर में बिल्डर निखिल शर्मा से 22 लाख की ठगी करने वाले शातिर ठग अभिषेक प्रताप सिंह उर्फ संतोष सिंह के खिलाफ मजबूत साक्ष्य जुटा पाने में पुलिस सफल नहीं हो पा रही है। इसके पीछे पुलिस की क्या मजबूरी है, यब बड़ा प्रश्न है? दरअसल, पुलिस ने ठग के दो मोबाइलों के लॉक चार दिन पहले ही खुलवा लिए थे। मोबाइल फोन भी खंगाले, अब मोबाइल फोन के राज खोलने से पुलिस खुद घबरा रही है
शातिर ठग संतोष सिंह के संबंध वर्ष 2014 के बाद से कई आईएएस, आईपीएस अफसरों से होने की बात प्रकाश में आई थी। इन्हीं अधिकारियों की छत्रछाया में उसने सरकारी महकमे में दखल देकर करोड़ों की कमाई की। वह बीते 10 साल से अपनी ठगी की दुकान चला रहा था। सूत्रों के अनुसार उसके इन्हीं संबंधों के चलते अगस्त 2023 के पहले तक उसके खिलाफ कोई मुकदमा दर्ज नहीं हो सका। बिल्डर के प्रकरण में धोखाधड़ी और रंगदारी का मुकदमा बिठूर थाने में 20 अगस्त को दर्ज हो सका।
फिंगर टच लॉक खुलवाकर जांचे थे मोबाइल
पुलिस ने बीते दो सितंबर को जेल भेजे गए ठग संतोष सिंह को छह घंटे के लिए रिमांड पर लिया था। रिमांड पूरी होने के बाद पुलिस ने उसे कोर्ट में दाखिल किया। ठग के अधिवक्ता मोहित श्रीवास्तव के अनुसार इस दौरान संतोष से उनकी बात हुई थी। संतोष ने उन्हें बताया था कि पुलिस ने आईआईटी चौकी में उससे पूछताछ के दौरान उसके दो मोबाइल फोन के फिंगर टच लॉक खुलवाकर फोन खंगाले थे।
कुछ वीवीआईपी नंबर और व्हाट्सएप चैट पुलिस के हाथ लगी
ऐसे में बड़ा सवाल उठता है कि पुलिस ठग के मोबाइल में मिले नंबरों और चैट को देखने के बाद भी उसकी डिटेल सार्वजनिक करने से क्यों कतरा रही है?सूत्रों के अनुसार मोबाइल कुछ वीवीआईपी नंबर और व्हाट्सएप चैट पुलिस के हाथ लगे थे, लेकिन इनको सार्वजनिक करने की पुलिस हिम्मत नहीं जुटा पा रही है। वहीं, बिठूर पुलिस का दावा है कि मोबाइल सील हैं और उन्हें शुक्रवार को जांच के लिए एफएसएल भेजा जाएगा।
अधिकारियों के सरकारी नंबरों पर होती थी लंबी बात
पुलिस ने संतोष के मोबाइल नंबरों की सीडीआर निकलवा ली है। सूत्रों के अनुसार सीडीआर में करीब एक दर्जन आईएएस, आईपीएस अफसरों के सरकारी नंबर मिले हैं। इन नंबरों पर संतोष की अधिकारियों से लंबी बात होती थी। हालांकि, पुलिस की तरफ से यह तो बताया जा रहा है कि अफसरों के सीयूजी नंबर मिले हैं, लेकिन किसी अधिकारी से कितनी देर बात हुई, इसका जवाब बिठूर पुलिस के पास भी नहीं है।
पारदर्शिता चाहती तो कोर्ट से इजाजत ले सकती थी पुलिस
दूसरी तरफ अपने शातिर ठग संतोष का केस लड़ रहे उसके अधिवक्ता मोहित श्रीवास्तव के अनुसार पुलिस ने जिस तरह से संतोष के फोन खुलवाकर उसे चेक किया वो कानूनन ठीक नहीं था। वहीं, उनका कहना है कि यदि पुलिस पारदर्शिता चाहती थी तो कोर्ट से संतोष के मोबाइल फोन को खुलवाकर उनकी जांच कर सकती थी। इसके बाद भी पुलिस ने अपने इस अधिकार का लाभ नहीं लिया। प्रकरण की जांच को जल्द पूरा करने के बजाय इसे कानूनी दांवपेंच में फंसाकर और लंबा खींचने की कोशिश की जा रही है।
कद बढ़ाने के लिए दोनों गाड़ियों से जाता था लखनऊ
शातिर ठग संतोष सिंह की लखनऊ तक पकड़ है। अपने परिचित के वीवीआईपी के बीच अपना कद बढ़ाने के लिए वह अक्सर अपनी दो गाड़ियों हांडा सिटी व इनोवा में लाव लश्कर के साथ लखनऊ जाता था, जबकि वह सिर्फ एक गाड़ी से भी लखनऊ आनाजाना कर सकता था। पुलिस सूत्रों के अनुसार एसटीएफ ने जब उसे लखनऊ के विभूतिखंड से गिरफ्तार किया था उस वक्त भी वह दो गाड़ियों से था। हांडा सिटी में वह खुद व उसका ड्राइवर धर्मेंद्र थे। जबकि, इनोवा में खुद को उसका पीआरओ बताने वाला प्रदीप सिंह था, जो फरार हो गया था।
जहां जाता था, वहां अपनी पहुंच से पाता था वीवीआईपी सम्मान
ठग संतोष ने एसटीएफ को बताया था कि उसे भारत भ्रमण का शौक है। वह जहां भी जाता था, वहां किसी ने किसी आईपीएस, पीपीएस अफसर के माध्यम से अपना वीवीआईपी सम्मान पा लेता था। अमर उजाला के हाथ शातिर ठग की एक तस्वीर लगी है। यह तस्वीर करीब छह माह पुरानी वृंदावन की बताई जा रही है। तस्वीर में ठग वीवीआईपी दर्शन करता और साथ में उसकी सुरक्षा के लिए मौजूद पुलिस नजर आ रही है।