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आंखें नम, रुंधा गला, हक नहीं मिला
अमर उजाला ब्यूरो, कानपुर
Updated Thu, 22 Oct 2015 02:06 AM IST
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पुलिस लाइन में ‘स्मृति दिवस’ पर बुधवार को सम्मान लेने पहुंची शहीद विजय नारायण की पत्नी माया देवी का दर्द छलक गया। नम आंखों और रुंधे गले से उन्होंने आईजी आशुतोष पांडेय से कहा कि पति 27 नवंबर 2014 को शहीद हुए थे लेकिन अभी तक पूरी पेंशन नहीं मिल रही।
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बेटे ने मृतक आश्रित में नौकरी का आवेदन फार्म भरा है पर कुछ नहीं हुआ। किसी तरह की सरकारी सहायता भी नहीं मिली। इस पर आईजी ने हर संभव मदद दिलाने का भरोसा दिलाया। साथ ही पांच हजार रुपये और शॉल भेंटकर माया देवी को सम्मानित किया। बता दें कि विजय नारायण उन्नाव में ड्यूटी करते हुए शहीद हुृए थे।
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रिजर्व पुलिस लाइन में बुधवार को परेड के साथ पुलिस स्मृति दिवस समारोह आयोजित किया गया। इसका उद्घाटन मुख्य अतिथि आईजी आशुतोष पांडेय, डीआईजी नीलाब्जा चौधरी और एसएसपी शलभ माथुर ने किया।
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पुष्प अर्पित करके शहीदों को श्रद्धांजलि दी और सलामी देकर नमन किया। साथ ही कानपुर देहात के डेरापुर थाने में ड्यूटी के दौरान 17 सितंबर 2014 को शहीद विजय कुमार की पत्नी लता को पांच हजार रुपये और शॉल भेंट करके सम्मानित किया। लता के साथ दस साल का बेटा रहता है।
इससे पहले आईजी ने बताया कि पुलिस के शहीदों की स्मृति में यह सम्मान समारोह हर साल आयोजित किया जाता है। 1 सितंबर 2014 से 31 जुलाई 2015 तक यूपी में 108 पुलिस अधिकारी और कर्मचारी शहीद हुए।
एसएसपी शलभ माथुर ने शहीदों पर लिखी गई पत्रिका ‘पावन स्मृति’ का विमोचन किया। इसके साथ ही शहीदों के आश्रितों को सांत्वना देते हुए हर संभव मदद का भरोसा दिलाया। इस दौरान सभी शहीदों के नाम पढ़ने के साथ ही उन्हें सलामी दी गई।