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बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे: जमीन ने उगला सोना, लाखों आए तो किसानों ने ख्वाब सजाए, पढ़ें खास खबर

Sun, 04 Apr 2021 01:45 PM IST
शिखा पांडेय शैलेश अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर
शैलेश अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Sun, 04 Apr 2021 01:45 PM IST
सार

- किसी ने ली सियासी अंगड़ाई, पंचायत चुनाव में कूदा तो कुछ किसान बने व्यवसायी

- कोई मैरिजहाल, बाजार बना रहा, किसी ने जमीन खरीद ली तो किसी ने एफडी कर दी

- कुछ शौक पर पैसा फूंक रहे, कोई पैसे के लिए प्यार जता रहा तो कोई झगड़े पर उतारू

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exclusive: Bundelkhand express way
चित्रकूट के गोडा करारी गांव के पास निर्माणाधीन बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

विधानसभा चुनाव करीब होने से पूरे प्रदेश में विकास कार्यों में बेहद तेजी देखी जा रही है। इसी कड़ी में बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे का निर्माण भी रफ्तार पकड़े है। इसे चुनाव से पहले यानी फरवरी 2022 तक पूरा करने का लक्ष्य है। इसके बन जाने से बुंदेलखंड के पांच महत्वपूर्ण जिले दिल्ली से जुड़े आगरा-लखनऊ और यमुना एक्सप्रेस-वे से कनेक्ट हो जाएंगे और इससे एक तरह से बुंदेलखंड की बुलंदी का हाईवे खुलेगा।

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एक्सप्रेस-वे के लिए हजारों की किसानों की जमीन सरकार ने खरीदी और उन्हें फटाफट मुआवजा भी दे दिया। इससे अपनी कम उपजाऊ या बंजर जमीनों का दुखड़ा रोने वाले कई किसानों पर छप्परफाड़ रुपये आ बरसे। शैलेश अवस्थी ने बुंदेलखंड के उन जिलों, गांवों का जायजा लिया, जहां से एक्सप्रेस वे गुजर रहा है।

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बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे के लिए अधिगृहीत जमीन के बदले सरकार से मिली मोटी रकम ने खेती से उकताए किसानों का आर्थिक सूखा किसी हद तक खत्म कर दिया है। कोई इस पैसे का इस्तेमाल समझदारी से कर रहा तो कोई बौरा गया है। कोई शौक के लिए पैसा फूंक रहा तो कोई पैसे से पैसा बनाने की जुगत कर रहा। कहीं पैसा झगड़े तो कहीं खुशहाली का कारण बन रहा।

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एक्सप्रेस-वे के लिए सात जिलों के करीब 11 हजार किसानों की हजारों बीघा जमीन सरकार ने खरीदी है। इसके लिए 2.5 लाख से लेकर 32 लाख रुपये प्रति बीघा की दर से मुआवजा दिया गया। इसमें उन किसानों की बल्ले-बल्ले हो गई जिनकी भूमि ऊसर, बंजर, पथरीली-कंकड़ीली और बेकार थी। कुछ की जमीन पर कब्जे थे तो कुछ कचरा डालने के काम आ रही थी। किसी के खाते में इतनी रकम आ गई कि अपने ही दुश्मन बन बैठे तो कुछ के लिए रकम संभाल के रखना मुश्किल हो गया है। कुछ किसानों ने जानकारी देने से इसलिए इनकार कर दिया कि उन्हें खतरा हो सकता है।

एक किसान ने बताया कि बंजर जमीन के कारण फसल कौड़ी भर भी नहीं होती थी। अपनों ने भी मुंह फेर लिया था। अब 2.5 करोड़ मिल गए तो सब प्यार जता रहे हैं। अब दोनों लड़के गांव आ गए। एक किसान का सपूत पैसा निठल्लों के बीच लुटा रहा है। चित्रकूट के डबरापुरवा मजरे के गोपाल ने बताया कि एक किसान को 3.19 करोड़, एक को 75 लाख, एक को 70 लाख मिले हैं। एक किसान ने तीन प्लाट खरीदने के बाद बाकी रकम एफडी कर दी। बेटों को अभी तक धेला नहीं दिया। एक किसान के तीन बेटे बंटवारे के लिए झगड़ रहे हैं। न जाने कितने घरों में मारपीट की नौबत है तो कई पैसे खपाने के विकल्प तलाश रहे हैं।

केस-1

चित्रकूट (डबरापुरवा मजरा) गोंडा गांव के ही गोपाल पांडे के हिस्से में बंटवारे के बाद मुआवजे के कोई 80 लाख रुपये आए हैं। यह रकम 3.5 बीघा जमीन की है। गले में सोने की मोटी चेन, जींस-शर्ट, हाथ में मोटा कलावा चमक रहा है और ख्वाब हैं ब्लाक प्रमुख बनने का। कर्वी ब्लाक में 60 गांव से 127 बीडीसी सदस्य चुने जाने हैं। गोपाल कहते हैं कि बीडीसी सदस्य का चुनाव लड़ेंगे और फिर ब्लाक प्रमुख का। पक्का घर बनवाया है। पास बैठे अपने दादा की तरफ इशारा कर कहते हैं कि ये हमसे नाराज हैं। कहते हैं, अरे नेता बनेंगे तो क्या खानदान का नाम नहीं होगा।

केस- 2

चित्रकूट भरतकूप के गांव गोडा करारी निवासी रामप्रसाद (70) की सात बीघा जमीन का मुआवजा 25 लाख रुपये के हिसाब से 1.75 करोड़ रुपये मिला। यह रकम दो भाइयों की बीच बंट गई। रामप्रसाद ने बिना देर किए पास ही तीन लाख रुपये बीघा के हिसाब से 10 बीघा जमीन खरीद ली। कुछ पैसा दोनों बेटों को दे दिया और बाकी बैंक में। एक पुत्र रामनारायण होटल बनाने की जिद पर अड़ा है। उसने एक्सप्रेस-वे के किनारे टट्टर का नाश्ताघर खोल लिया है और उसका सपना है यहां स्टार होटल बनाने का। वहीं सोता, खाता और योजना बनाता है। कहता है कि उसे ख्वाब में ताज होटल दिखता है।

केस-3

बांदा के मवई गांव निवासी पंचम की 16 बीघा जमीन एक्सप्रेस-वे के काम आ गई। इसका मुआवजा 28 लाख रुपये प्रति बीघा की दर से मिला। उनके पुत्र अनिल प्रजापति ने बताया कि गांव के पास तत्काल तीन से चार लाख रुपये की दर से 20 बीघा जमीन खरीद ली। रोड किनारे बड़ा गेस्टहाउस बनवा रहे हैं और साथ ही 17 दुकानों का बाजार भी। उनके एक भाई कानपुर में कोचिंग सेंटर चला रहे हैं। अब उसे और बढ़ाएंगे। अचानक आए करोड़ों रुपये से कारोबार बढ़ाने में मदद मिली और नए काम शुरू करने का मनोबल भी बढ़ गया।

बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे

कुल लागत - 4,816.26 करोड़ रुपये

कुल लंबाई - 296.070 किलोमीटर

कुल चौड़ाई -110 मीटर (छह लेन)

काम शुरू   -29 फरवरी 2020

पूरा होगा  -36 महीने में (फरवरी 2022 तक)

प्रभावित क्षेत्र- 3655 हेक्टेयर (182 गांव)

सात जिले - चित्रकूट, बांदा, महोबा, हमीरपुर, जालौन, औरैया, इटावा से गुजरेगा

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