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फ्लाईदुबई हाइजैक की नई कहानी: अपने नागरिक थे सवार, फिर भी विमान को मार गिराने को क्यों तैयार था इस्राइल?
Tue, 06 Oct 2026 12:44 PM IST
पवन पांडेय
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: पवन पांडेय
Updated Tue, 06 Oct 2026 12:44 PM IST
सार
जब फ्लाईदुबई की फ्लाइट 1073 इस्राइल की तरफ बढ़ रही थी और कॉकपिट से कोई जवाब नहीं आ रहा था, तब इस्राइल अपने ही 150 से ज्यादा नागरिकों को लेकर उड़ रहे उस विमान को मार गिराने के लिए तैयार था। साथ ही जांच में खुलासा हुआ कि हमलावर पायलट की असली मंशा क्या थी और उसने यह सब क्यों किया...
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इस्राइल ने क्यों एक्टिव किया था शूट डाउन प्रोटोकॉल?
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
इस्राइल 150 से ज्यादा अपने नागरिकों को लेकर उड़ रहे फ्लाईदुबई के विमान को मार गिराने के लिए तैयार था। विमान के 14,000 फीट नीचे गिरते ही इस्राइली वायुसेना ने कॉकपिट से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद लड़ाकू विमान रवाना किए गए और इस्राइल का हवाई क्षेत्र बंद कर दिया गया। पूरे घटनाक्रम की जांच और हमलावर ओमानी पायलट से पूछताछ में नए खुलासे हुए हैं। जानिए...
इस्राइल अपने ही नागरिकों को लेकर उड़ रहे विमान को मार गिराने के लिए तैयार क्यों था?
सीबीएस न्यूज ने इस मामले की जांच से जुड़ी सीधी जानकारी रखने वाले दो इस्राइली सूत्रों के हवाले से बताया कि इस्राइल के पास इस किस्म की संभावित 9/11 जैसी घटना के लिए एक प्रक्रिया है, जिसका लंबे समय से अभ्यास किया गया है। अगर कोई विमान इस्राइल की प्रमुख इमारतों, बेन गुरियन हवाई अड्डे या किसी या किसी हाई-वैल्यू टारगेट से टकराता और सैकड़ों लोग मारे जाते, उससे बेहतर यही विकल्प था कि विमान को ही मार गिराया जाए। यानी इस्राइली सुरक्षा बलों की सोच यह थी कि 150 जानें बचाने की कोशिश में अगर विमान किसी बड़े टारगेट से टकराया तो हजारों जानें जा सकती हैं। इसलिए प्रोटोकॉल में यह पीड़ादायक, लेकिन एकमात्र विकल्प रखा गया था।
यह भी पढ़ें- बाब अल-मंदेब पर हूती विद्रोहियों को बड़ा झटका: सऊदी गठबंधन ने छीने कई अहम इलाके; क्या अमेरिका भी साथ आया?
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जब विमान 14,000 फीट नीचे आया, उस वक्त इस्राइल में क्या हुआ?
जैसे ही विमान तेजी से नीचे आया, इस्राइली वायुसेना ने कॉकपिट से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कोई जवाब नहीं आया। इस घटना ने पूर्व-स्थापित प्रक्रिया को तुरंत सक्रिय कर दिया। एक पहले से तय समिति फौरन बुलाई गई और कमांड सेंटर स्थापित किया गया। लड़ाकू विमान रवाना किए गए। इस्राइल का हवाई क्षेत्र बंद कर दिया गया, लेकिन जैसे ही इस्राइल को पता चला कि विमान इस्राइल से करीब 400 मील दूर सऊदी अरब की तरफ मुड़ गया है, लड़ाकू विमान वापस बुला लिए गए। सऊदी अरब ने अपने विमान स्क्रैंबल किए और विमान तबूक में सुरक्षित उतरा।
अगर विमान इस्राइल की तरफ बढ़ता रहता तो लड़ाकू विमान क्या करते?
सीबीएस न्यूज के अनुसार, अगर फ्लाइट 1073 एक निश्चित दूरी के भीतर आ जाती तो इस्राइल जॉर्डन के हवाई क्षेत्र में अपने लड़ाकू विमान भेजता। इस्राइली लड़ाकू पायलट कॉकपिट के जितना करीब हो सके, पहुंचते और पायलट को देख पाने और स्थिति का आकलन कर पाने की कोशिश करते। फिर वे केबिन की भी उसी तरह जांच करते और यात्रियों की स्थिति देखते। अगर यात्रियों में घबराहट दिखती तो उसके निष्कर्ष वायुसेना और जांच समिति को भेजे जाते। अगर यह तय हो जाता कि विमान हाईजैक हो गया है, हाईजैकरों ने रेडियो साइलेंस बनाए रखी है और कोई मांग नहीं रखी है, तो समिति रक्षा मंत्री और प्रधानमंत्री को एक कॉल पर जोड़ती।
विमान को मार गिराने का अंतिम फैसला कौन करता?
प्रोटोकॉल के अनुसार इस्राइल की तरफ बढ़ रहे किसी भी विमान को आसमान में ही मार गिराने का प्रावधान है, लेकिन यह फैसला सिर्फ और सिर्फ प्रधानमंत्री ही ले सकते थे। यह एक ऐसा फैसला होता जो इतिहास में दर्ज हो जाता यानी अपने ही नागरिकों से भरे विमान को मार गिराना, लेकिन प्रोटोकॉल यही कहता है कि बड़े नुकसान को रोकने के लिए यह दर्दनाक विकल्प सक्रिय रखा जाता है।
हमलावर पायलट की असली साजिश क्या थी, प्लान ए और प्लान बी क्या थे?
इस्राइली मीडिया वाईनेट ने जांच के निष्कर्षों के हवाले से बताया कि ओमानी पायलट हमाम अल-हम्मामी की शुरुआती साजिश विमान को इस्राइल के बेन गुरियन हवाई अड्डे से टकराने की थी। अगर वहां नाकाम रहता तो उसका अगला निशाना जॉर्डन में एक अमेरिकी सैन्य अड्डा था। अल-हम्मामी ने जांचकर्ताओं से कहा, "मैंने खोजा और जांचा कि कौन-सी कंपनी तेल अवीव जाती है और इसीलिए मैंने फ्लाईदुबई को चुना।"
यह भी पढ़ें- पश्चिम एशिया संकट: सऊदी अरब पर हूतियों ने दागी मिसाइलें, रियाद एयरपोर्ट और अरामको रिफाइनरी को बनाया निशाना
हमलावर की मंशा क्या थी, उसने यह कदम क्यों उठाया?
वाईनेट की रिपोर्ट के अनुसार अल-हम्मामी ने जांचकर्ताओं को बताया कि वह गाजा में इस्राइल के सैन्य अभियान का बदला लेना चाहता था। यही उसकी प्रेरणा थी। वहीं, सीबीएस न्यूज को एक इस्राइली अधिकारी ने बताया कि यूएआई में पूछताछ के दौरान को-पायलट ने खुद कबूला कि उसने यह हमला फ्लाईदुबई में नौकरी मिलने से पहले ही प्लान कर लिया था। वह जानबूझकर उस एयरलाइन की तलाश में था जो तेल अवीव जाती हो। इसका मतलब यह है कि यह कोई आवेग में लिया गया फैसला नहीं था। यह एक सुनियोजित आतंकी षड्यंत्र था। अधिकारी ने यह भी बताया कि अल-हम्मामी पहले भी इस्राइल के लिए उड़ान भर चुका था।
क्या यह किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा था?
इस्राइल की शुरुआती जांच में यह लोन-वुल्फ अटैक यानी अकेले व्यक्ति का हमला लग रहा है। हालांकि, जांच अभी जारी है।
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इस्राइल अपने ही नागरिकों को लेकर उड़ रहे विमान को मार गिराने के लिए तैयार क्यों था?
सीबीएस न्यूज ने इस मामले की जांच से जुड़ी सीधी जानकारी रखने वाले दो इस्राइली सूत्रों के हवाले से बताया कि इस्राइल के पास इस किस्म की संभावित 9/11 जैसी घटना के लिए एक प्रक्रिया है, जिसका लंबे समय से अभ्यास किया गया है। अगर कोई विमान इस्राइल की प्रमुख इमारतों, बेन गुरियन हवाई अड्डे या किसी या किसी हाई-वैल्यू टारगेट से टकराता और सैकड़ों लोग मारे जाते, उससे बेहतर यही विकल्प था कि विमान को ही मार गिराया जाए। यानी इस्राइली सुरक्षा बलों की सोच यह थी कि 150 जानें बचाने की कोशिश में अगर विमान किसी बड़े टारगेट से टकराया तो हजारों जानें जा सकती हैं। इसलिए प्रोटोकॉल में यह पीड़ादायक, लेकिन एकमात्र विकल्प रखा गया था।
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जब विमान 14,000 फीट नीचे आया, उस वक्त इस्राइल में क्या हुआ?
जैसे ही विमान तेजी से नीचे आया, इस्राइली वायुसेना ने कॉकपिट से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कोई जवाब नहीं आया। इस घटना ने पूर्व-स्थापित प्रक्रिया को तुरंत सक्रिय कर दिया। एक पहले से तय समिति फौरन बुलाई गई और कमांड सेंटर स्थापित किया गया। लड़ाकू विमान रवाना किए गए। इस्राइल का हवाई क्षेत्र बंद कर दिया गया, लेकिन जैसे ही इस्राइल को पता चला कि विमान इस्राइल से करीब 400 मील दूर सऊदी अरब की तरफ मुड़ गया है, लड़ाकू विमान वापस बुला लिए गए। सऊदी अरब ने अपने विमान स्क्रैंबल किए और विमान तबूक में सुरक्षित उतरा।
अगर विमान इस्राइल की तरफ बढ़ता रहता तो लड़ाकू विमान क्या करते?
सीबीएस न्यूज के अनुसार, अगर फ्लाइट 1073 एक निश्चित दूरी के भीतर आ जाती तो इस्राइल जॉर्डन के हवाई क्षेत्र में अपने लड़ाकू विमान भेजता। इस्राइली लड़ाकू पायलट कॉकपिट के जितना करीब हो सके, पहुंचते और पायलट को देख पाने और स्थिति का आकलन कर पाने की कोशिश करते। फिर वे केबिन की भी उसी तरह जांच करते और यात्रियों की स्थिति देखते। अगर यात्रियों में घबराहट दिखती तो उसके निष्कर्ष वायुसेना और जांच समिति को भेजे जाते। अगर यह तय हो जाता कि विमान हाईजैक हो गया है, हाईजैकरों ने रेडियो साइलेंस बनाए रखी है और कोई मांग नहीं रखी है, तो समिति रक्षा मंत्री और प्रधानमंत्री को एक कॉल पर जोड़ती।
विमान को मार गिराने का अंतिम फैसला कौन करता?
प्रोटोकॉल के अनुसार इस्राइल की तरफ बढ़ रहे किसी भी विमान को आसमान में ही मार गिराने का प्रावधान है, लेकिन यह फैसला सिर्फ और सिर्फ प्रधानमंत्री ही ले सकते थे। यह एक ऐसा फैसला होता जो इतिहास में दर्ज हो जाता यानी अपने ही नागरिकों से भरे विमान को मार गिराना, लेकिन प्रोटोकॉल यही कहता है कि बड़े नुकसान को रोकने के लिए यह दर्दनाक विकल्प सक्रिय रखा जाता है।
हमलावर पायलट की असली साजिश क्या थी, प्लान ए और प्लान बी क्या थे?
इस्राइली मीडिया वाईनेट ने जांच के निष्कर्षों के हवाले से बताया कि ओमानी पायलट हमाम अल-हम्मामी की शुरुआती साजिश विमान को इस्राइल के बेन गुरियन हवाई अड्डे से टकराने की थी। अगर वहां नाकाम रहता तो उसका अगला निशाना जॉर्डन में एक अमेरिकी सैन्य अड्डा था। अल-हम्मामी ने जांचकर्ताओं से कहा, "मैंने खोजा और जांचा कि कौन-सी कंपनी तेल अवीव जाती है और इसीलिए मैंने फ्लाईदुबई को चुना।"
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हमलावर की मंशा क्या थी, उसने यह कदम क्यों उठाया?
वाईनेट की रिपोर्ट के अनुसार अल-हम्मामी ने जांचकर्ताओं को बताया कि वह गाजा में इस्राइल के सैन्य अभियान का बदला लेना चाहता था। यही उसकी प्रेरणा थी। वहीं, सीबीएस न्यूज को एक इस्राइली अधिकारी ने बताया कि यूएआई में पूछताछ के दौरान को-पायलट ने खुद कबूला कि उसने यह हमला फ्लाईदुबई में नौकरी मिलने से पहले ही प्लान कर लिया था। वह जानबूझकर उस एयरलाइन की तलाश में था जो तेल अवीव जाती हो। इसका मतलब यह है कि यह कोई आवेग में लिया गया फैसला नहीं था। यह एक सुनियोजित आतंकी षड्यंत्र था। अधिकारी ने यह भी बताया कि अल-हम्मामी पहले भी इस्राइल के लिए उड़ान भर चुका था।
क्या यह किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा था?
इस्राइल की शुरुआती जांच में यह लोन-वुल्फ अटैक यानी अकेले व्यक्ति का हमला लग रहा है। हालांकि, जांच अभी जारी है।