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Etawah: सफारी पहुंचा विदेशी गुलाबी मैना का झुंड, हिमालयन गिद्ध भी दिखे
Thu, 07 Aug 2025 08:55 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इटावा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इटावा
Published by: शिखा पांडेय
Updated Thu, 07 Aug 2025 08:55 PM IST
सार
Etawah News: 350 हेक्टेयर में फैला इटावा सफारी पार्क जैव विविधिता का केंद्र बनता जा रहा है।
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सफारी में आनंद लेती विदेशी गुलाबी मैना
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
इटावा सफारी पार्क पारिस्थितिकी तंत्र बहाली (इकोरेस्टोरेशन) का एक बेहतर उदाहरण बनकर सामने उभरा है। यमुना नदी के बीहड़ के 350 हेक्टेयर क्षेत्रफल में इटावा सफारी पार्क फैला हुआ है। इस सफारी पार्क में न सिर्फ पांच सफारी संचालित हो रही हैं बल्कि इसके अलावा कई प्रजातियों की चिड़ियां, तितलियां, वनस्पतियां, सांप और मोथ आदि भी प्रवास कर रहे हैं। वहीं सफारी पार्क में गुलाबी मैना का झुंड भी प्रवास कर रहा है और हाल ही में लुप्त होता हिमालयन गिद्ध भी दिखाई दिया है।
इटावा सफारी पार्क में इस समय पांच सफारी संचालित हो रही हैं। इनमें लायन सफारी, एंटीलोप सफारी, लेपर्ड सफारी, डीयर सफारी व बीयर सफारी शामिल हैं। इन सभी सफारी में मौजूद वन्य जीवों के अलावा सफारी पार्क के शेष आधे भाग जिसे बफर जोन कहा जाता है। इसमें भी कई प्रजातियों के पक्षी, सांप तितली अपना बसेरा बनाए हुए हैं, जो सफारी के माहौल के और भी ज्यादा मनोरम बनाते हैं। जहां सफारी पार्क में एक ओर अब तक वनस्पतियों की 451 प्रजाति पनप रही हैं तो वहीं चिड़ियों की 241 व तितलियों की 73 प्रजातियां फलफूल रही हैं।
तितली की ही प्रजाति की मोथ की भी 51 प्रजातियां सफारी में सूचीबद्ध की जा चुकी हैं। इसके अलावा सफारी में विभिन्न प्रजातियों के सांप भी बड़ी संख्या में मौजूद हैं। इनमें विशालकाय अजगर भी शामिल हैं। इससे यमुना नदी के बीहड़ का छोटा सा यह भूभाग जैवविविधता से भरा हुआ है। हर वर्ष कुछ नए मेहमान भी सफारी में पहुंच रहे हैं। इससे इनकी संख्या में इजाफा होता जा रहा है। सफारी के डायरेक्टर अनिल पटेल ने बताया कि वर्तमान में गुलाबी मैना (रोजी स्टर्लिंग) नामक विदेशी पक्षी का एक बड़ा समूह सफारी पार्क में प्रवास कर रहा है। गुलाबी मैना का सिर छाती व पूंछ काले रंग का होता है साथ ही शरीर पर नारंगी एवं नीले रंग का चमकीला भाग दिखायी देता है।
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इसके नर और मादा एक ही तरह के दिखते है, लेकिन प्रजनन के समय नर का रंग मादा से अधिक चमकदार प्रतीत होता है। सामान्य तौर पर यह पक्षी अगस्त सितंबर में प्रवास के लिए सफारी में आ रहे थे, लेकिन इस वर्ष कुछ पहले ही इनका आगमन हुआ है। यही नहीं लुप्त होता हिमालयन ग्रिफन वल्चर ( गिद्ध) भी सफारी पार्क में विश्राम करता दिखाई दे चुका है। इन सब के साथ इटावा सफारी पार्क जैव विविधिता का केंद्र बनता जा रहा है।
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इटावा सफारी पार्क में इस समय पांच सफारी संचालित हो रही हैं। इनमें लायन सफारी, एंटीलोप सफारी, लेपर्ड सफारी, डीयर सफारी व बीयर सफारी शामिल हैं। इन सभी सफारी में मौजूद वन्य जीवों के अलावा सफारी पार्क के शेष आधे भाग जिसे बफर जोन कहा जाता है। इसमें भी कई प्रजातियों के पक्षी, सांप तितली अपना बसेरा बनाए हुए हैं, जो सफारी के माहौल के और भी ज्यादा मनोरम बनाते हैं। जहां सफारी पार्क में एक ओर अब तक वनस्पतियों की 451 प्रजाति पनप रही हैं तो वहीं चिड़ियों की 241 व तितलियों की 73 प्रजातियां फलफूल रही हैं।
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तितली की ही प्रजाति की मोथ की भी 51 प्रजातियां सफारी में सूचीबद्ध की जा चुकी हैं। इसके अलावा सफारी में विभिन्न प्रजातियों के सांप भी बड़ी संख्या में मौजूद हैं। इनमें विशालकाय अजगर भी शामिल हैं। इससे यमुना नदी के बीहड़ का छोटा सा यह भूभाग जैवविविधता से भरा हुआ है। हर वर्ष कुछ नए मेहमान भी सफारी में पहुंच रहे हैं। इससे इनकी संख्या में इजाफा होता जा रहा है। सफारी के डायरेक्टर अनिल पटेल ने बताया कि वर्तमान में गुलाबी मैना (रोजी स्टर्लिंग) नामक विदेशी पक्षी का एक बड़ा समूह सफारी पार्क में प्रवास कर रहा है। गुलाबी मैना का सिर छाती व पूंछ काले रंग का होता है साथ ही शरीर पर नारंगी एवं नीले रंग का चमकीला भाग दिखायी देता है।
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इसके नर और मादा एक ही तरह के दिखते है, लेकिन प्रजनन के समय नर का रंग मादा से अधिक चमकदार प्रतीत होता है। सामान्य तौर पर यह पक्षी अगस्त सितंबर में प्रवास के लिए सफारी में आ रहे थे, लेकिन इस वर्ष कुछ पहले ही इनका आगमन हुआ है। यही नहीं लुप्त होता हिमालयन ग्रिफन वल्चर ( गिद्ध) भी सफारी पार्क में विश्राम करता दिखाई दे चुका है। इन सब के साथ इटावा सफारी पार्क जैव विविधिता का केंद्र बनता जा रहा है।