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प्रोफेशनल नहीं हैं कानपुर के उद्यमी
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 03 May 2016 01:44 AM IST
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लैंडमार्क में कंफेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्रीज के सेमिनार में जानकारी देते जयाती केने साथ में एंड्यू हालेंड।
- फोटो : amarujala
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कानपुर। शहर में हर तरह का कारोबार करोड़ों अरबों रुपये के पार है, लेकिन यहां की इंडस्ट्री और बिजनेस में प्रोफेशनलिज्म (पेशेवर रुख) की कमी है। कई उद्यमियों और कारोबारियों ने तो देश के अन्य राज्यों तक भी अपना कारोबार फैला लिया है फिर भी कारोबार के प्रति उनका रवैया नहीं बदला। औद्योगिक नगरी के लिए यह झकझोरने वाली बात अमेरिकी कारोबारी व एम्बिट इन्वेस्टमेंट एडवाइजर प्रा. लि. के सीईओ एंड्यू हॉलैंड ने कही है। वे सोमवार को होटल लैंडमार्क में कंफेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्रीज की ओर से आयोजित सेमिनार में बतौर मुख्य वक्ता बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि कानपुर औद्योगिक शहर जरूर है, लेकिन यहां के अधिकतर उद्योग पैतृक हैं। पिता, बाबा, नाना से वारिस के तौर पर मिले कारोबार ही अधिक बढ़ रहे हैं। यही कारण है कि इन्हें चलाने का ढर्रा भी पुराना है। इसी कारण ग्रोथ भी रुकी है। उद्योगपतियों ने कारोबार को बढ़ाने के लिए अपने बेटों और भतीजों के हाथ में बागडोर सौंप दी जबकि कारपोरेट कल्चर के एक्सपर्ट लोगों को नौकरी देने में तरजीह नहीं दी। इससे प्रोफेशनलिज्म में कमी आई। उन्होंने इससे निजात पाने के लिए वसीयत, ट्रस्ट, कंपनी, कारपोरेट हाउस बनाने के उपाय बताए। इसी बात को आगे बढ़ाते हुए कंफेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री यूपी स्टेट काउंसिल के चेयरमैन व टेस्टी डेयरी के डायरेक्टर अतुल मेहरा ने कहा कि आने वाले समय में हर कारोबारी को तय करना होगा कि कंपनी की बागडोर किसके हाथों होगी। 20 साल से काम कर रहा उनका वफादार मैनेजर या फिर नाकाबिल बेटा। उन्हें खुद तय करना होगा कि वे अपने कारोबार को किस स्तर पर देखना चाहते हैं।
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उन्होंने कहा कि कानपुर औद्योगिक शहर जरूर है, लेकिन यहां के अधिकतर उद्योग पैतृक हैं। पिता, बाबा, नाना से वारिस के तौर पर मिले कारोबार ही अधिक बढ़ रहे हैं। यही कारण है कि इन्हें चलाने का ढर्रा भी पुराना है। इसी कारण ग्रोथ भी रुकी है। उद्योगपतियों ने कारोबार को बढ़ाने के लिए अपने बेटों और भतीजों के हाथ में बागडोर सौंप दी जबकि कारपोरेट कल्चर के एक्सपर्ट लोगों को नौकरी देने में तरजीह नहीं दी। इससे प्रोफेशनलिज्म में कमी आई। उन्होंने इससे निजात पाने के लिए वसीयत, ट्रस्ट, कंपनी, कारपोरेट हाउस बनाने के उपाय बताए। इसी बात को आगे बढ़ाते हुए कंफेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री यूपी स्टेट काउंसिल के चेयरमैन व टेस्टी डेयरी के डायरेक्टर अतुल मेहरा ने कहा कि आने वाले समय में हर कारोबारी को तय करना होगा कि कंपनी की बागडोर किसके हाथों होगी। 20 साल से काम कर रहा उनका वफादार मैनेजर या फिर नाकाबिल बेटा। उन्हें खुद तय करना होगा कि वे अपने कारोबार को किस स्तर पर देखना चाहते हैं।
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