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दो राज्यों में एक साथ चुनाव कराने पर भाजपा का गहन मंथन

Thu, 12 Oct 2017 10:33 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर Updated Thu, 12 Oct 2017 10:33 PM IST
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Emphasis on holding elections together in two states
भाजपा प्रदेश कार्य समिति की बैठक में सीएम योगी
यूपी के निकाय और गुजरात के विधानसभा चुनाव भाजपा के लिए चिंता का विषय बन चुके हैं। दोनों चुनाव यदि अलग-अलग होते हैं और किसी राज्य में पार्टी को नुकसान उठाना पड़ता है तो इसका असर दूसरे राज्य में भी दिख सकता है। इसलिए पार्टी नहीं चाहती कि दोनों राज्यों के चुनाव अलग-अलग हों। गुरुवार को कानपुर शहर में हुई भाजपा की प्रदेश कार्य समिति की बैठक में इस विषय पर गहन मंथन हुआ।
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दरअसल, गुजरात का चुनाव इस बार भाजपा के लिए नाक का सवाल बन गया है। कपडे़ पर पांच फीसदी जीएसटी और जीएसटी व्यवस्था की अन्य पेचीदगियों की वजह से गुजरात का व्यापारी अपनी चहेती पार्टी से इस बार नाराज है। पार्टी की चिंता इस बात की है कि यदि कानपुर की व्यापारी बाहुल्य आर्यनगर विधानसभा सीट की तरह गुजरात में भी कुछ सीटें इधर से उधर हो गईं तो इसका संदेश अन्य राज्यों में भी अच्छा नहीं जाएगा।
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यही स्थिति यूपी के निकाय चुनाव के साथ भी है। निकाय चुनाव भले ही स्थानीय मुद्दों पर लड़े जाते हों लेकिन इसमें भी पार्टी की छवि जुड़ी होती है। यूपी के निकाय चुनाव में यदि पार्टी का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा तो यह गुजरात के विधानसभा चुनाव में भी असर डालेगा। इसलिए पार्टी यह कतई नहीं चाहती कि दोनों चुनाव अलग अलग हों। इस बिंदु पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय की प्रेस कांफ्रेंस में सवाल भी उठा।
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हालांकि उन्होंने निकाय चुनाव समय पर ही कराए जाने की बात कही लेकिन कार्य समिति की बैठक से बाहर निकले सदस्यों, पार्टी पदाधिकारियों और कुछ मंत्रियों ने इस बात के संकेत दिए कि पार्टी की मंशा चुनाव एक साथ कराए जाने की ही है। हालांकि  इसके पीछे तकनीकी बात यह कही जा रही है कि एक माह के अंदर मेयर पद के आरक्षण और वार्डों के परिसीमन की आपत्तियों का निस्तारण नहीं हो पाएगा।


इस वजह से चुनाव टल सकते हैं, लेकिन अंदर की बात ये है कि पार्टी दोनों ही चुनाव में रिस्क नहीं लेना चाहती। गुजरात व हिमाचल के विधानसभा चुनाव और यूपी के निकाय चुनाव भाजपा वर्ष 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव के रिहर्सल के तौर पर देख रही है। 
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