शहीद डीएसपी की बेटियां बोलीं ...मुख्यमंत्री ने अपना वादा निभाया... वो हमारे पिता समान

अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर Updated Mon, 13 Jul 2020 06:28 AM IST
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शहीद सीओ देवेंद्र मिश्र की बेटियां...
शहीद सीओ देवेंद्र मिश्र की बेटियां... - फोटो : अमर उजाला

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सार

  • शहीद के परिजनों से अमर उजाला की खास बातचीत
  • परिजनों की मांग, वारदात में शामिल सभी आरोपियों पर जल्द हो कार्रवाई

विस्तार

मेरे पिता ने परिवार की फिक्र छोड़ अपने कर्तव्य को निभाने में जीवन लगा दिया। उनकी शहादत ने साबित कर दिया कि उन्होंने निडर होकर अपराधियों से मोर्चा लिया। अपराधियों पर कभी नरमी नहीं बरती। घटना के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि अपराधियों पर सख्त कार्रवाई होगी। वो वादा उन्होंने पूरा किया है। ये भगवान का न्याय है। सीएम हमारे पिता समान हैं। मुझे पूरा भरोसा है कि बचे अपराधियों पर जल्द कड़ी कार्रवाई होगी। शहीद डीएसपी (सीओ बिल्हौर) देवेंद्र कुमार मिश्र की बेटी वैष्णवी और वैशार्दी ने अमर उजाला से खास बातचीत में ये बातें रखीं।
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पत्नी ने कहा... एनकाउंटर पर सवाल उठाने वाले देशद्रोही
शहीद डीएसपी की पत्नी आशा ने कहा कि देवेंद्र ने नौकरी को प्राथमिकता दी। निडर होकर कार्रवाई की। कभी किसी के दबाव में नहीं आए। फर्ज निभाने में उनको नृशंस तरीके से मार दिया गया। अब जब उस पापी विकास दुबे का अंत हुआ तो लोग सवाल खड़े कर रहे हैं। ये शर्मनाक है। शहीदों का अपमान है। उन्होंने कहा कि एनकाउंटर पर सवाल उठाने वाले भी विकास की मानसिकता के हैं। ये देशद्रोही हैं। कहा कि जेल भेजे गए एसओ विनय तिवारी और दरोगा केके शर्मा को भी दहशतगर्दों के बराबर सजा मिले।
कहते थे सीएम दमदार हैं, अपराधी नहीं बचेंगे
पत्नी आशा ने बताया कि देवेंद्र अक्सर कहा करते थे कि सीएम और सरकार दमदार है। अपराधी नहीं बचेंगे। इसलिए वो कार्रवाई करते रहते थे। आज जब इतनी बड़ी वारदात हुई तो सीएम साथ में खड़े रहे। आज भी वो लगातार हालचाल ले रहे हैं।  मुझे सरकार पर यकीन है कि बदमाश के साथियों को भी सख्त सजा मिलेगी। देवेंद्र कहा करते थे कि नौकरी के कुछ महीने बचे हैं, इसलिए पूरी मेहनत के साथ काम करना है। बाकी तो रिटायरमेंट के बाद आराम मिलेगा ही। वो कहते थे कि नेताओं और अफसरों का दबाव रहता है लेकिन वो कार्रवाई करते रहेंगे।

बेटा कहकर बुलाते थे...
डीएसपी की शहादत के बाद उनका परिवार भीतर ही भीतर टूट गया है। बेटियों का कहना है कि पिताजी उनको हमेशा बेटा कहकर बुलाते थे। जो वो फरमाइश करती थीं, उसे पूरा करते थे। कई बार जन्मदिन या किसी अन्य समारोह में अगर ड्यूटी की वजह से नहीं पहुंच पाते थे तो कॉल और मैसेज कर विश करते थे। पर, अब वो सब कभी नहीं हो पाएगा।

बहादुरी और जनता के विश्वास के किस्से
आशा ने बताया कि जब वो प्रयागराज जीआरपी में पोस्टेड थे तो एक शातिर बदमाश को पकड़ने गए थे। कई अधिकारी दबिश को मना कर रहे थे लेकिन वो नहीं माने थे। घर में घुसकर बदमाश को पकड़ा था। जब देवेंद्र का अहिरवां चौकी इंचार्ज से फजलगंज तबादला हो गया था, तब उस क्षेत्र में मर्डर हुआ था। उस दौरान पीड़ित परिजनों ने एसएसपी से कहा था कि देवेंद्र मिश्र अगर इलाके में होते तो ये घटना न होती। उन पर और उनकी बहादुरी पर कुछ ऐसा विश्वास था लोगों का।

जहां से खत्म किया, वहीं से शुरू करूंगी
शहीद डीएसपी की बड़ी बेटी वैष्णवी बीएससी कर रही हैं। मेडिकल की तैयारी कर रही थीं, देवेंद्र मिश्र उन्हें डॉक्टर बनाना चाहते थे लेकिन अब वैष्णवी का कहना है कि वो पुलिस में भर्ती होकर अपराधियों को सबक सिखाएंगी। जहां से उनके पिता ने खत्म किया है, वो वहीं से शुरुआत करना चाहती हैं।
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