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पीआरपी से रतौंधी के 80 फीसदी रोगियों की रोशनी बढ़ी, डॉ. परवेज खान ने 300 रोगियों का किया इलाज
Sun, 28 Mar 2021 02:12 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
दिव्यांश सिंह (संवाद), अमर उजाला, कानपुर
दिव्यांश सिंह (संवाद), अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sun, 28 Mar 2021 02:12 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : गूगल
कानपुर के गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. परवेज खान ने पीआरपी से रतौंधी का इलाज करीब दो साल पहले शुरू किया था। अब तक 300 रोगियों के इलाज में 80 प्रतिशत लोगों की आंखों की रोशनी में वृद्धि पाई गई है।
डॉ. खान ने बताया कि प्लेटलेट रिच प्लाज्मा(पीआरपी) को एक विशेष निडिल से आंख की सतह पर इंजेक्ट किया जाता है। इस प्रक्रिया को 15-15 दिन के अंतराल में पांच बार किया जाता है।
डोज देने के पहले दिन इलेक्टो रेटिनो ग्राम(ईआरजी) जांच करने और पांचवीं डोज के बाद जांच करने पर तीन सौ में 80 प्रतिशत लोगों की आंख की रोशनी में वृद्धि पाई गई है। बताया कि इस तकनीक से युवाओं में परिणाम बेहतर आ रहे हैं। यह इलाज जीएसवीएम के नेत्र रोग विभाग में निशुल्क किया जा रहा है। इलाज में इस्तेमाल होने वाला पीआरपी उसी रोगी का होता है।
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क्या होती है रतौंधी की बीमारी
रतौंधी एक जन्मजात बीमारी होती है। इसमें रेटिना की कोशिकाएं व आंख की नसें सूखने लगती हैं। धीरे-धीरे आंख की रोशनी कम होने लगती है। इस बीमारी से बचने के लिए विटामिन ए से युक्त खाद्य पदार्थों, हरी सब्जियां और फलों का सेवन करना चाहिए। इस रोग के शुरुआती दौर में रात में दिखना कम हो जाता है। उसके बाद दिन में भी देखने में परेशानी होती है। अंत में पूरी तरह से दिखना बंद हो जाता है।
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डॉ. खान ने बताया कि प्लेटलेट रिच प्लाज्मा(पीआरपी) को एक विशेष निडिल से आंख की सतह पर इंजेक्ट किया जाता है। इस प्रक्रिया को 15-15 दिन के अंतराल में पांच बार किया जाता है।
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डोज देने के पहले दिन इलेक्टो रेटिनो ग्राम(ईआरजी) जांच करने और पांचवीं डोज के बाद जांच करने पर तीन सौ में 80 प्रतिशत लोगों की आंख की रोशनी में वृद्धि पाई गई है। बताया कि इस तकनीक से युवाओं में परिणाम बेहतर आ रहे हैं। यह इलाज जीएसवीएम के नेत्र रोग विभाग में निशुल्क किया जा रहा है। इलाज में इस्तेमाल होने वाला पीआरपी उसी रोगी का होता है।
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क्या होती है रतौंधी की बीमारी
रतौंधी एक जन्मजात बीमारी होती है। इसमें रेटिना की कोशिकाएं व आंख की नसें सूखने लगती हैं। धीरे-धीरे आंख की रोशनी कम होने लगती है। इस बीमारी से बचने के लिए विटामिन ए से युक्त खाद्य पदार्थों, हरी सब्जियां और फलों का सेवन करना चाहिए। इस रोग के शुरुआती दौर में रात में दिखना कम हो जाता है। उसके बाद दिन में भी देखने में परेशानी होती है। अंत में पूरी तरह से दिखना बंद हो जाता है।