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14 साल बाद प्लाट कर रहे इधर का उधर
मनोज चौरसिया, कानपुर
Updated Mon, 15 Feb 2016 02:08 AM IST
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पनकी-कल्याणपुर रोड पर नगर निगम इनक्लेव आवासीय योजना में ले-आउट के नाम पर आवंटियों के साथ खेल कर दिया गया।
जो प्लाट मुख्य सड़क के किनारे और कार्नर पर थे, वहां से रोड निकालकर उनके आवंटियों को योजना के पीछे वाले हिस्से पर जगह दे दी गई है। इस उलटफेर से प्रभावित आवंटियों ने अफसरों पर कुछ प्लाट धारकों से मिलीभगत कर गड़बड़ी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने नगर आयुक्त को इसका ज्ञापन भी दिया है।
2002 में लांच नगर निगम इन्क्लेव आवासीय योजना में एमआईजी श्रेणी के 63 प्लाट काटे गए। लाटरी के माध्यम से रामप्रभा पाल, सूरज सहाय शर्मा, संजीव मिश्रा सहित 19 आवेदकों को मुख्य मार्ग पर प्लाट आवंटित हुए। कुसुम कुमारी सहित 10 लोगों को कार्नर के प्लाट मिले।
इसी बीच केडीए ने उक्त जमीन पर अपना मालिकाना हक जताकर पेच फंसा दिया। कई बैठकों के बाद करीब सात साल पहले केडीए ने यह जमीन नगर निगम को दी। नगर निगम के अफसर पहले केडीए से विवाद फिर अन्य कारण बताकर रजिस्ट्री की मांग करने वाले आवंटियों को टरकाते रहे। करीब एक साल पहले आवंटी रामप्रभा पाल सहित कई लोग हाईकोर्ट पहुंच गए।
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हाईकोर्ट से चार महीने पहले रजिस्ट्री के निर्देश मिलने के बाद नगर निगम को नक्शा स्वीकृत कराने की सुध आई। केडीए से जो नक्शा स्वीकृत हुआ उसमें प्लाटों की संख्या तो वही रखी गई, लेकिन आगे की सड़क की चौड़ाई बढ़ाने के लिए वहां के प्लाट पीछे कर दिए गए। इससे मुख्य सड़क के पीछे वाली गली के प्लाट मेन रोड पर आ गए।
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जो प्लाट मुख्य सड़क के किनारे और कार्नर पर थे, वहां से रोड निकालकर उनके आवंटियों को योजना के पीछे वाले हिस्से पर जगह दे दी गई है। इस उलटफेर से प्रभावित आवंटियों ने अफसरों पर कुछ प्लाट धारकों से मिलीभगत कर गड़बड़ी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने नगर आयुक्त को इसका ज्ञापन भी दिया है।
2002 में लांच नगर निगम इन्क्लेव आवासीय योजना में एमआईजी श्रेणी के 63 प्लाट काटे गए। लाटरी के माध्यम से रामप्रभा पाल, सूरज सहाय शर्मा, संजीव मिश्रा सहित 19 आवेदकों को मुख्य मार्ग पर प्लाट आवंटित हुए। कुसुम कुमारी सहित 10 लोगों को कार्नर के प्लाट मिले।
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इसी बीच केडीए ने उक्त जमीन पर अपना मालिकाना हक जताकर पेच फंसा दिया। कई बैठकों के बाद करीब सात साल पहले केडीए ने यह जमीन नगर निगम को दी। नगर निगम के अफसर पहले केडीए से विवाद फिर अन्य कारण बताकर रजिस्ट्री की मांग करने वाले आवंटियों को टरकाते रहे। करीब एक साल पहले आवंटी रामप्रभा पाल सहित कई लोग हाईकोर्ट पहुंच गए।
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हाईकोर्ट से चार महीने पहले रजिस्ट्री के निर्देश मिलने के बाद नगर निगम को नक्शा स्वीकृत कराने की सुध आई। केडीए से जो नक्शा स्वीकृत हुआ उसमें प्लाटों की संख्या तो वही रखी गई, लेकिन आगे की सड़क की चौड़ाई बढ़ाने के लिए वहां के प्लाट पीछे कर दिए गए। इससे मुख्य सड़क के पीछे वाली गली के प्लाट मेन रोड पर आ गए।