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डिप्लोमा इन कार्डियोलॉजी करने वाले डॉक्टर कर सकेंगे प्रैक्टिस, स्वास्थ्य मंत्रालय ने दी अनुमति
Sat, 21 Sep 2019 01:46 PM IST
शिखा पांडेय
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sat, 21 Sep 2019 01:46 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : गूगल
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कानपुर में हृदय रोग संस्थान से डिप्लोमा इन कार्डियोलॉजी (डिप कार्ड) को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया (एमसीआई) ने 35 साल बाद मान्यता दी। शुक्रवार को स्वास्थ्य मंत्रालय ने मेडिकल कॉलेज प्राचार्य को पत्र भेजकर इसकी जानकारी दी। इससे डिप कार्ड करने वाले करीब डेढ़ सौ डॉक्टरों को हृदय के मरीजों का इलाज करने का रास्ता साफ हो गया है।
हृदय रोग संस्थान (कार्डियोलॉजी) में 1974 में डिप कार्ड कोर्स शुरू हुआ था। हर साल करीब 15 डॉक्टरों को यह कोर्स कराया जाता था, पर इस कोर्स को एमसीआई ने मान्यता देने से इनकार कर दिया था। मान्यता न मिलने की वजह से 1983 में यह कोर्स बंद हो गया था।
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हृदय रोग संस्थान (कार्डियोलॉजी) में 1974 में डिप कार्ड कोर्स शुरू हुआ था। हर साल करीब 15 डॉक्टरों को यह कोर्स कराया जाता था, पर इस कोर्स को एमसीआई ने मान्यता देने से इनकार कर दिया था। मान्यता न मिलने की वजह से 1983 में यह कोर्स बंद हो गया था।
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तब से हृदय रोग संस्थान प्रशासन की तरफ से इस कोर्स को पुन: शुरू करने और जो डॉक्टर यह कोर्स कर चुके हैं, उन्हें प्रैक्टिस करने की अनुमति दिलाने के लिए प्रयास किए जा रहे थे।
मेडिकल कॉलेज प्राचार्य ने बताया कि एमसीआई और स्वास्थ्य मंत्रालय ने डिपकार्ड को मान्य करार दिया है। साथ ही डिप कार्ड की सीटें इमरजेंसी मेडिसिन में तब्दील कर दी गई हैं। उम्मीद है कि इन सीटों पर अगले शैक्षिक सत्र में दाखिले होंगे। मरीजों को इसका फायदा मिलेगा।
मेडिकल कॉलेज प्राचार्य ने बताया कि एमसीआई और स्वास्थ्य मंत्रालय ने डिपकार्ड को मान्य करार दिया है। साथ ही डिप कार्ड की सीटें इमरजेंसी मेडिसिन में तब्दील कर दी गई हैं। उम्मीद है कि इन सीटों पर अगले शैक्षिक सत्र में दाखिले होंगे। मरीजों को इसका फायदा मिलेगा।