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घर लौटा गांव का बेटा : सोचा न था... परौंख का लाल देश के सर्वोच्च पद पर पहुंचेगा
Mon, 28 Jun 2021 01:38 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर
अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 28 Jun 2021 01:38 AM IST
सार
राष्ट्रपति ने कहा, मैं कहीं भी रहूं, मेरे गांव की मिट्टी की खुशबू और गांव के निवासियों की यादें सदैव मेरे दिल में बसी हैं। मेरे लिए परौंख सिर्फ एक गांव नहीं, मेरी मातृभूमि है।
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परौंख पहुंचने पर राष्ट्रपति ने जन्मभूमि को किया नमन....
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राष्ट्रपति बनने के बाद पहली बार अपने पैतृक गांव परौंख पहुंचे राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि सपने में भी नहीं सोचा था कि गांव के रहने वाले मेरे जैसे सामान्य बालक को देश के सर्वोच्च पद के दायित्व के निर्वहन का सौभाग्य मिलेगा। लेकिन, हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था ने यह करके दिखा दिया।
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स्वतंत्रता सेनानियों और संविधान निर्माताओं के अमूल्य बलिदान व योगदान को याद करते हुए उन्हें नमन किया। सचमुच में आज मैं जहां पहुंचा हूं. उसका श्रेय इस गांव (परौंख) की मिट्टी और यहां के लोगों के स्नेह और आशीर्वाद को जाता है।
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परौंख पहुंचते ही राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने जन्मभूमि को नमन किया। उसकी मिट्टी माथे पर लगाई। राष्ट्रपति सबसे पहले पथरी देवी मंदिर पहुंचे। उनके साथ उनकी पत्नी सविता कोविंद और उनकी बेटी भी मौजूद रहीं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल भी उनके साथ मंदिर पहुंचीं।
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राष्ट्रपति कोविंद ने पथरी देवी मंदिर में माथा टेका और परिक्रमा की। करीब 15 मिनट तक विधि-विधान से पुजारी कृष्ण कुमार बाजपेई ने पूजा संपन्न कराई। राष्ट्रपति इस मौके पर फल-मिष्ठान अपने साथ ही लाए थे। राष्ट्रपति ने देवी के चरणों में 11 हजार रुपये अर्पित किए। पुजारी को 11 सौ रुपये भेंट दी। राष्ट्रपति ने इस मौके पर अपनी बेटी, मुख्यमंत्री योगी और राज्यपाल को पथरी देवी मंदिर के महत्व और अपने पिता द्वारा की गई देखरेख के बारे में भी बताया।
जहां भी हूं, परौंख के बलबूते हूं
राष्ट्रपति ने कहा, मैं कहीं भी रहूं, मेरे गांव की मिट्टी की खुशबू और गांव के निवासियों की यादें सदैव मेरे दिल में बसी हैं। मेरे लिए परौंख सिर्फ एक गांव नहीं, मेरी मातृभूमि है। यहां से मुझे आगे बढ़कर देशसेवा की सदैव प्रेरणा मिली। मातृभूमि की इसी प्रेरणा ने मुझे हाईकोर्ट से सुप्रीमकोर्ट, सुप्रीमकोर्ट से राज्यसभा, राज्यसभा से राजभवन और राजभवन से राष्ट्रपति भवन तक पहुंचा दिया।