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Kanpur News: विकसित भारत और लेट-लतीफी एक साथ नहीं चल सकते
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कन्नौज। मंत्री असीम अरुण को गुरुवार को रोमा स्मारक काशीमुक्ता मंच पर एक कार्यक्रम में 45 मिनट तक इंतजार करना पड़ा। मेजबान अधिकारियों के अनुपस्थित रहने के कारण उन्हें बिना कार्यक्रम में शामिल हुए ही लौटना पड़ा। इस घटना पर उन्होंने शुक्रवार को फेसबुक पर अपनी नाराजगी व्यक्त की, जिसमें उन्होंने विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने के लिए समयबद्धता को अनिवार्य बताया।
मंत्री ने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा कि यह विषय किसी मंत्री का व्यक्तिगत अपमान का नहीं है। उन्होंने इसे हर नागरिक के समय के मूल्य से जुड़ा एक गहरा प्रश्न बताया। सवाल उठाया कि क्या पद पर बैठे व्यक्तियों को दूसरों का समय नष्ट करने का नैतिक अधिकार है। उन्होंने कहा कि उनके कई साथी इस घटना पर प्रदर्शन करना चाहते थे। हालांकि, जिलाधिकारी द्वारा व्यक्तिगत रूप से माफी मांगने और लिखित खेद व्यक्त करने के बाद उन्होंने इसकी आवश्यकता नहीं समझी। मंत्री ने जोर दिया कि इस घटना से एक बड़ा सबक लेने की जरूरत है। उन्होंने कहा, यदि हमें विकसित भारत बनाना है, तो हमें अपनी कार्य-संस्कृति से अधकच्चेपन और लापरवाही को तुरंत त्यागना होगा। समयबद्धता को हमें अपने डीएनए में उतारना होगा। उन्होंने जापान, जर्मनी और स्विट्जरलैंड जैसे देशों का उदाहरण देते हुए भारत को भी एक झटके में समय का पाबंद बनने का आह्वान किया। यह घटना प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल उठाती है और कार्य संस्कृति में सुधार की आवश्यकता पर बल देती है।
इनसेट--
आवागमन से मिला सकते घड़ी
मंत्री ने प्रेरणा के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के आवागमन से लोग अपनी घड़ियां मिला सकते हैं। मुख्यमंत्री योगीभी सदैव समय पर पहुंचकर अनुशासन का मानक स्थापित करते हैं। असीम अरुण ने कहा कि हमें अपने नेतृत्व से प्रेरणा लेकर इस सांस्कृतिक परिवर्तन को धरातल पर लाना होगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विकसित देश बनने के लिए विकसित नागरिक होना पहली शर्त है।
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कमेंट में अफसरों को कोस रही जनता
मंत्री की इस फेसबुक पोस्ट पर सैकड़ाें लोगों ने कमेंट भी किए हैं, जिनमें वह अफसरों को कोस रहे हैं। कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने लिखा कि अधिकारियों की निरंकुशता की वजह से आम जनता को न्याय नहीं मिल पा रहा है। जब एक अफसर नेता बना तो उसने अफसरशाही को सही आईना दिखाया है।
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मंत्री ने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा कि यह विषय किसी मंत्री का व्यक्तिगत अपमान का नहीं है। उन्होंने इसे हर नागरिक के समय के मूल्य से जुड़ा एक गहरा प्रश्न बताया। सवाल उठाया कि क्या पद पर बैठे व्यक्तियों को दूसरों का समय नष्ट करने का नैतिक अधिकार है। उन्होंने कहा कि उनके कई साथी इस घटना पर प्रदर्शन करना चाहते थे। हालांकि, जिलाधिकारी द्वारा व्यक्तिगत रूप से माफी मांगने और लिखित खेद व्यक्त करने के बाद उन्होंने इसकी आवश्यकता नहीं समझी। मंत्री ने जोर दिया कि इस घटना से एक बड़ा सबक लेने की जरूरत है। उन्होंने कहा, यदि हमें विकसित भारत बनाना है, तो हमें अपनी कार्य-संस्कृति से अधकच्चेपन और लापरवाही को तुरंत त्यागना होगा। समयबद्धता को हमें अपने डीएनए में उतारना होगा। उन्होंने जापान, जर्मनी और स्विट्जरलैंड जैसे देशों का उदाहरण देते हुए भारत को भी एक झटके में समय का पाबंद बनने का आह्वान किया। यह घटना प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल उठाती है और कार्य संस्कृति में सुधार की आवश्यकता पर बल देती है।
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आवागमन से मिला सकते घड़ी
मंत्री ने प्रेरणा के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के आवागमन से लोग अपनी घड़ियां मिला सकते हैं। मुख्यमंत्री योगीभी सदैव समय पर पहुंचकर अनुशासन का मानक स्थापित करते हैं। असीम अरुण ने कहा कि हमें अपने नेतृत्व से प्रेरणा लेकर इस सांस्कृतिक परिवर्तन को धरातल पर लाना होगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विकसित देश बनने के लिए विकसित नागरिक होना पहली शर्त है।
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कमेंट में अफसरों को कोस रही जनता
मंत्री की इस फेसबुक पोस्ट पर सैकड़ाें लोगों ने कमेंट भी किए हैं, जिनमें वह अफसरों को कोस रहे हैं। कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने लिखा कि अधिकारियों की निरंकुशता की वजह से आम जनता को न्याय नहीं मिल पा रहा है। जब एक अफसर नेता बना तो उसने अफसरशाही को सही आईना दिखाया है।