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औरैया में छात्रा के हत्यारे सिरफिरे आशिक को सजा ए मौत, एकतरफा प्यार में मारी थी गोली
Fri, 05 Apr 2019 07:02 AM IST
शाहरुख खान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरैया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरैया
Published by: शाहरुख खान
Updated Fri, 05 Apr 2019 07:02 AM IST
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कोर्ट से बाहर निकलता हत्यारा अजय कुमार
- फोटो : अमर उजाला
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एकतरफा प्यार में कक्षा 10 की छात्रा निशा को घर में घुसकर गोली से उड़ा देने के दोषी अजय कुमार कोरी (35) को जनपद न्यायाधीश सुशील कुमार की अदालत से फांसी की सजा सुनाई गई है। अभियुक्त पर 1.15 लाख रुपये अर्थदंड भी लगाया गया है।
मामले में अजय कुमार की पत्नी गीता देवी, मां राधा देवी व भाई विजय को न्यायालय ने दोषमुक्त कर दिया। अभियोजन के अनुसार, ग्राम एरवाटिकुर निवासी रामप्रताप अवस्थी ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 10 अक्तूबर 2014 की शाम साढ़े छह बजे वह घर में बात कर रहा था।
उसकी पुत्री निशा (14) आंगन में पढ़ रही थी। उसी समय पड़ोसी अजय कुमार पुत्र रामनरेश घर में घुस आया और निशा के सीने में तमंचे से गोली मार दी जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
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इस बीच अजय कुमार की मां, भाई व पत्नी ने वहां आकर उसे भगा दिया। रामप्रताप का कहना था कि अजय कुमार उनकी पुत्री निशा को स्कूल आने-जाने में परेशान करता था।
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मामले में अजय कुमार की पत्नी गीता देवी, मां राधा देवी व भाई विजय को न्यायालय ने दोषमुक्त कर दिया। अभियोजन के अनुसार, ग्राम एरवाटिकुर निवासी रामप्रताप अवस्थी ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 10 अक्तूबर 2014 की शाम साढ़े छह बजे वह घर में बात कर रहा था।
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उसकी पुत्री निशा (14) आंगन में पढ़ रही थी। उसी समय पड़ोसी अजय कुमार पुत्र रामनरेश घर में घुस आया और निशा के सीने में तमंचे से गोली मार दी जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
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इस बीच अजय कुमार की मां, भाई व पत्नी ने वहां आकर उसे भगा दिया। रामप्रताप का कहना था कि अजय कुमार उनकी पुत्री निशा को स्कूल आने-जाने में परेशान करता था।
उसे धमकी देता था कि उसे जान से मारकर लड़की को उठा ले जाएगा। इसकी रिपोर्ट एरवाकटरा थाने में अजय कुमार, उसकी मां, भाई और पत्नी के विरुद्ध दर्ज कराई थी।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुशील कुमार ने आईपीसी की धारा 302 के तहत अजय कुमार को मृत्युदंड दिया। कोर्ट ने कहा कि अजय कुमार के गले में फंदा डालकर तब तक लटकाया जाए, जब तक उसकी मौत न हो जाए।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुशील कुमार ने आईपीसी की धारा 302 के तहत अजय कुमार को मृत्युदंड दिया। कोर्ट ने कहा कि अजय कुमार के गले में फंदा डालकर तब तक लटकाया जाए, जब तक उसकी मौत न हो जाए।