हाईटेक युग में बीहड़ों का स्वरूप भले ही न बदला हो लेकिन बीहड़ों में रहने वाले खूंखार डकैतों का काम करने का तरीका बिल्कुल बदल चुका है। ये अब पहले से भी ज्यादा खतरनाक होते जा रहे हैं। नये जमाने की टेक्नलॉजी के साथ हाईटेक हथियार रखने वाला यूपी का सबसे बड़ा ‘गब्बर’ इस समय पुलिस के लिए ‘बिग चैलेन्ज’ बन चुका है।
Criminal Story:हाईटेक युग में ‘बीहड़ों का गब्बर’ बना ये डकैत, STF के एनकाउंटर से हर बार बच निकला
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जानें, कौन है बबुली कोल
बबुली कोल की उम्र इस समय करीब 38 साल होगी। बबुली कोल पर इस समय साढ़े पांच लाख का इनाम है। चित्रकूट जिले के डोडा सोसाइटी क्षेत्र के के गांव कोलान टिकरिया के मजदूर रामचरन के घर में 1979 में हुआ था। बबुली गांव के ही प्राथमिक स्कूल से क्लास आठ तक की पढ़ाई की। फिर 12वीं की पढ़ाई के लिए वह बांदा चला गया। लेकिन 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद आर्थिक स्थित ठीक न होने के चलते गांव आ गया और किसानी करने लगा।
जेल जाने की वजह से बना डकैत
साल 2007 में पुलिस ने उसे ठोकिया की मदद के आरोप में गिरफ्तार कर लिया और तमंचा दिखाकर जेल भेज दिया। छह माह जेल के अंदर रहने के दौरान ठोकिया के साथी लाले पटेल से इसकी मुलाकात हो गई। जेल से छूटने के बाद बबली ने लाले को छुड़ाने के लिए जाल बिछाया। जब पेशी नें लाले आया तो उसे वहां से बबली कोल फरार करा ले गया और दोनों पाठा के जंगल में कूद गए। पिछले कुछ महीनों से पुलिस इलाके की काम्बिंग कर रही थी। पुलिस का मानना है कि बारिश के दौरान डकैत जंगल से गांव की तरफ आते हैं। बारिश के बाद घने होते जंगल इनके छिपने का मुफीद इलाका होता है। तब इन्हें तलाशना बहुत मुश्किल हो जाता है।
सब इंस्पेक्टर जेपी सिंह हुए थे शहीद
बबुली कोल गैंग की 20 दिन पहले पुलिस से मुठभेड़ हुई थी। इस एनकाउंटर में एक डाकू पकड़ा गया तो दूसरी ओर सब इंस्पेक्टर जेपी सिंह शहीद हो गए। इससे पहले भी कई बार बाबली कोल की पुलिस से मुठभेड़ हो चुकी है, लेकिन वह हमेशा पुलिस की पकड़ से दूर ही रहा है।
कभी ददुआ का चेला था फिर बलखड़िया गैंग में शामिल हुआ
यूपी के बुंदलेखंड में इस समय दहशत का सबसे बड़ा नाम बबुली कोल है। उसके नाम से बकायदा लेटरपैड से रंगदारी वसूली जाती है। पुलिस को बबुली कोल के कई लेटरपैड भी बरामद हुए हैं। डकैत बबुली कभी डकैत ददुआ का चेला हुआ करता था। ददुआ की मौत के बाद वो दस्यु सरगना बलखड़िया उर्फ बाल खड़े उर्फ सुदेश पटेल के गिरोह में शामिल हुआ। एक मुठभेड़ में बलखड़िया के मरने के बाद बबली कोल गैंग का सरदार बन गया।