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नागरिकता कानून पर कानपुर में हुई हिंसा से सिहर उठा था शहर, उपद्रवियों को हो सकती है दस साल तक की सजा
Mon, 23 Dec 2019 12:35 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Mon, 23 Dec 2019 12:35 PM IST
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कानपुर में उपद्रवियाें ने पुलिस चौकी में तोड़फोड़ के बाद लगाई थी आग, पेट्रोल बम से किया था हमला
- फोटो : अमर उजाला
नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में शहर में हुई हिंसा में गोली लगने से घायल हुए एक और प्रदर्शनकारी ने रविवार को हैलट अस्पताल में दम तोड़ दिया। शहर में मरने वालों की संख्या अब तीन हो गई है। एक अन्य की हालत गंभीर है। उधर, पुलिस ने यतीमखाना व बाबूपुरवा की हिंसा में गिरफ्तार 12 उपद्रवियों को जेल भेज दिया है।
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नागरिकता कानून पर कानपुर में भड़की हिंसा
- फोटो : अमर उजाला
दो संदिग्ध युवकों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। आशंका है कि वह बाहरीहैं और बवाल कराने में उनका हाथ है। यतीमखाना और बाबूपुरवा में भारी पुलिस बल तैनात है। सोमवार को शहर में शांति रही। शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद बाबूपुरवा में हिंसा भड़क गई थी। उपद्रवियों के पथराव और फायरिंग करने से हालात बेकाबू हो गए थे। कई पुलिसकर्मी भी भीड़ में घिर गए थे। इस पर पुलिस को मजबूरन गोली चलानी पड़ी थी, जिसमें 13 लोगों को गोली लगी थी।
कानपुर में हिंसा
- फोटो : अमर उजाला
कानपुर हिंसा में 29 लोग हिरासत में
यतीमखाना हिंसा में पुलिस ने अब तक 29 लोगों को हिरासत में लिया है। उनसे पूछताछ चल रही है। पुलिस वीडियो फुटेज व फोटो के जरिये पता कर रही है कि ये लोग हिंसा में शामिल थे या नहीं। एसएसपी ने बताया कि उपद्रवियों की धरपकड़ की जा रही है। सख्त कार्रवाई होगी।
यतीमखाना हिंसा में पुलिस ने अब तक 29 लोगों को हिरासत में लिया है। उनसे पूछताछ चल रही है। पुलिस वीडियो फुटेज व फोटो के जरिये पता कर रही है कि ये लोग हिंसा में शामिल थे या नहीं। एसएसपी ने बताया कि उपद्रवियों की धरपकड़ की जा रही है। सख्त कार्रवाई होगी।
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कानपुर में फिर भड़की हिंसा
- फोटो : अमर उजाला
उपद्रवियों को हो सकती है दस साल तक की सजा
प्रदर्शन के दौरान हिंसा करने वाले उपद्रवियों के खिलाफ पुलिस ने जिन धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है उसमें उन्हें दस साल या उससे अधिक की सजा हो सकती है। कारावास के साथ न्यायालय उनपर अर्थदंड भी लगा सकता है।
प्रदर्शन के दौरान हिंसा करने वाले उपद्रवियों के खिलाफ पुलिस ने जिन धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है उसमें उन्हें दस साल या उससे अधिक की सजा हो सकती है। कारावास के साथ न्यायालय उनपर अर्थदंड भी लगा सकता है।
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नागरिकता कानून पर कानपुर में भड़की हिंसा
- फोटो : अमर उजाला
धारा 147 आईपीसी- बलवा या उपद्रव करना। दो साल की सजा या जुर्माना। गैर जमानती
धारा148 आईपीसी- उपद्रव के दौरान घातक हथियार, ज्वलनशील पदार्थ का प्रयोग। तीन साल की जेल या जुर्माना। सीजेएम कोर्ट से जमानती।
धारा323 आईपीसी- मारपीट करना। एक साल कारावास। एसीजेएम कोर्ट से जमानती।
धारा353 आईपीसी- सरकारी काम में बाधा डालना। दो साल की जेल। गैर जमानती।
धारा332 आईपीसी- लोक सेवक को मारपीट या भयभीत करके सरकारी काम में बाधा डालना। तीन साल कारावास। गैर जमानती।
धारा333 आईपीसी- लोक सेवक को गंभीर रुप से घायल करने सरकारी काम में बाधा डालना। दस साल की जेल। गैर जमानती।
7 लॉ क्रिमिनल एमेंडमेंट एक्ट- समाज में भय व्याप्त करने वाले तत्व। अपराध के मुताबिक न्यायालय निर्धारित करता है।
धारा148 आईपीसी- उपद्रव के दौरान घातक हथियार, ज्वलनशील पदार्थ का प्रयोग। तीन साल की जेल या जुर्माना। सीजेएम कोर्ट से जमानती।
धारा323 आईपीसी- मारपीट करना। एक साल कारावास। एसीजेएम कोर्ट से जमानती।
धारा353 आईपीसी- सरकारी काम में बाधा डालना। दो साल की जेल। गैर जमानती।
धारा332 आईपीसी- लोक सेवक को मारपीट या भयभीत करके सरकारी काम में बाधा डालना। तीन साल कारावास। गैर जमानती।
धारा333 आईपीसी- लोक सेवक को गंभीर रुप से घायल करने सरकारी काम में बाधा डालना। दस साल की जेल। गैर जमानती।
7 लॉ क्रिमिनल एमेंडमेंट एक्ट- समाज में भय व्याप्त करने वाले तत्व। अपराध के मुताबिक न्यायालय निर्धारित करता है।