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हत्यारों ने सुनाई डकैतों की झूठी कहानी, पूछताछ में सामने आया बेरहमी से हत्या का 'खौफनाक सच'

Mon, 18 Dec 2017 03:54 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर Updated Mon, 18 Dec 2017 03:54 PM IST
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brutally murder of labour contractor in chitrakut
मृतक के रोते बिलखते परिजन, मृतक का पैनकार्ड
यूपी के चित्रकूट में 20 दिन पहले डकैतों द्वारा अगवा किए गए लेबर कॉन्ट्रैक्टर की लाश जंगल से बरामद होने के बाद कहानी में नया मोड़ आ गया है। चित्रकूट पुलिस ने प्रेसवार्ता कर ये खुलासा किया है कि लेबर कॉन्ट्रैक्टर मोहनलाल पटेल का अपहरण डकैतों ने नहीं किया था बल्कि उसके दो साथियों ने ही उसे मौत के घाट उतारा था। पुलिस और ठेकेदार को हत्यारोपियों ने डकैतों का नाम लेकर गुमराह किया। 
brutally murder of labour contractor in chitrakut
मोहनलाल अपहरण कांड का खुलासा
पुलिस टीम ने गहनता से जांच के दौरान पाया कि रामनरेश और राजकरन लोध ने लेबर कॉन्ट्रैक्टर मोहनलाल पटेल (30) को व्यक्तिगत दुश्मनी के चक्कर में मौत के घाट उतार दिया और  उसके ठेकेदार को डकैतों द्वारा उसका अपहरण किए जाने की झूठी कहानी सुनाकर गुमराह किया। पुलिस को चक्कर में डालने वाले रामनरेश और राजकरन आखिर पूछताछ के दौरान सच उगल बैठे और उन्हीं की निशानदेही पर चित्रकूट पुलिस ने मोहनलाल की लाश और मोबाइल फोन का सिम बरामद कर लिया। पूछताछ में दोनों अभियुक्तों ने ये बताया कि पैसे के लेनदेन के चक्कर में उनका मोहनलाल से विवाद हुआ था। विवाद गहराता गया जिसके बाद दोनों ने मोहनलाल को खत्म करने की योजना बना डाली। 
 
brutally murder of labour contractor in chitrakut
मोहनलाल अपहरण कांड का खुलासा
दोनों ने ऐसे दिया घटना को अंजाम
चित्रकूट खरौंद निवासी लेबर कॉन्ट्रैक्टर मोहन लाल पटेल (30) का अपहरण उसके ही दो साथियों राजकरन और रामनरेश ने इलाहाबाद के थाना करछना इलाके से कर लिया। उसके बाद 6 लाख की फिरौती उसके घरवालों से मांगी। पुलिस ने घटना का खुलासा करने के लिए तीन टीमों का गठन किया था। पुलिस की तीनों टीमें लगातार घटना के खुलासे में जुटी रहीं। आखिर पुलिस को कामयाबी हाथ लगी। रामनरेश और राजकरन को हिरासत में ले लिया गया।
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brutally murder of labour contractor in chitrakut
मोहनलाल अपहरण कांड का खुलासा
पूछताछ में ये मामला सामने आया कि दोनों अभियुक्तों का 28 नवंबर 2017 को पैसों के लेनदेन को लेकर मोहनलाल से विवाद हो गया था। विवाद के चलते मोहनलाल को चित्रकूट में ही खेतों की तरफ पकड़ कर ले गए और नंगे तारों से बांधकर करंट दौड़ा दिया। मोहनलाल की मौके पर ही मौत हो गई। मोहनलाल जब वापस नहीं लौटा तो ठेकेदार को अभियुक्तों ने झूठी कहानी गढ़कर डकैतों द्वारा उसके अपहरण का किस्सा सुना दिया और थाने में मुकदमा लिखा दिया। घटना को छिपाने के लिए दोनों ने रात में उसके शव को वाल्मीकि नदी में फेंक दिया। दूसरे दिन जब लाश पानी में उतराने लगी तो दोनों ने दोबारा लाश को बाहर निकालकर पत्थरों से बांधकर पानी में फिर से फेंक दिया था। 
 
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