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आतंक का सायाः कानपुर के चार हथियार डीलरों पर गहराया एटीएस और एनआईए का शक

Fri, 31 Mar 2017 02:02 PM IST
मनीष निगम, अमर उजाला, कानपुर
मनीष निगम, अमर उजाला, कानपुर Updated Fri, 31 Mar 2017 02:02 PM IST
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ats and nia eyes on four arms dealer
डेमो पिक
भोपाल-पैसेंजर ट्रेन ब्लास्ट के आतंकियों को कारतूस बेचने के मामले में कानपुर पुलिस ने शहर के चार और हथियार डीलरों को रडार पर लिया है। कानपुर के गीता नगर स्थित एलआरएस आर्म्स एंड एम्युनिशन के मालिक राघवेंद्र सिंह चौहान की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियों की नजर पर अब बेकनगंज का एक संदिग्ध है। आतंकियों को वह बारूद और हथियार सप्लाई करता था। पुलिस और सभी जांच एजेंसियां उसकी हर एक गतिविधियों पर नजर रख रही है। संदिग्ध के करीबियों के मोबाइल नंबरों भी सर्विलांस पर लगाए गए हैं।
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आतंकी आतिफ, दानिश और फैसल से पूछताछ में जांच एजेंसियों को पता चला है कि राष्ट्र विरोधी संगठनों को असलाहा और विस्फोटक सप्लाई करने की गतिविधियों में शहर के कई लोग लिप्त हैं। तीन दिन पहले गन हाउस मालिक राघवेंद्र की गिरफ्तारी के बाद बेकनगंज के एक शख्स का नाम आतंकियों को कारतूस के साथ-साथ असलहे और विस्फोटक सप्लाई में आया है। संदिग्ध के यहां से खरीदे गए विस्फोटक से तैयार बम की टेस्टिंग उन्नाव और जाजमऊ में की गई थी। कारतूस भी चेक किए थे। इस जानकारी को एटीएस और एनआईए ने स्थानीय पुलिस से भी शेयर किया है। साथ ही उक्त शख्स के बाबत अलर्ट भी किया है। एक पुलिस अफसर का कहना है कि बेकनगंज के संदिग्ध व्यक्ति के जुड़े देश विरोधी संगठनों के लिंक की जानकारी भी जुटाई जा रही है। एसपी सोमेन बर्मा ने बताया कि मेस्टन रोड स्थित खन्ना गन हाउस और सेवा सदन गन हाउस के स्टॉक और सेल रजिस्टर चेक किए गए हैं। इन दोनों जगहों से राघवेंद्र ने कारतूस खरीदे थे। ये कारतूस आतंकियों को सप्लाई किए गए थे। एसपी के मुताबिक अब सभी आर्म्ड डीलरों का रिकार्ड चेक करने का फैसला लिया गया है। उधर एसएसपी आकाश कुलहरि ने भी चेकिंग अभियान चलाने की बात कही है। गड़बड़ी पर आर्म्ड डीलरों के लाइसेंस निरस्त कराने के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।
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राघवेंद्र के आतंकी कनेक्शन पर नजर

आतंकियों और कारतूस सप्लायर राघवेंद्र सिंह चौहान के बीच संबंधों की पड़ताल में जांच एजेंसियां जुटी हैं। बुधवार को एटीएस ने खुलासा किया था कि लखनऊ मुठभेड़ में मारे गए आतंकी सैफुल्लाह ने फकरे आलम के गन हाउस मालिक राघवेंद्र कारतूस हासिल किए थे। फकरे आलम और राघवेंद्र की मुलाकात कैसे हुई? दोनों को मिलाने में कौन मध्यस्थ था? इसकी भी जानकारी जुटाई जा रही है। फिलहाल अफसर यह मानकर जांच कर रहे हैं कि फकरे आलम और राघवेंद्र के बीच की कड़ी कोई शस्त्र लाइसेंसधारी है। वह राघवेंद्र और आतंकियों का भी कोई परिचित हो सकता है। इसके अलावा राघवेंद्र किन डीलरों से कारतूस खरीदता था, इसका भी पता लगाया जा रहा है। 

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राघवेंद्र की रायफल का पता नहीं चला
गन हाउस मालिक राघवेंद्र सिंह चौहान की लाइसेंसी राइफल का पता नहीं चला है। एटीएस और पुलिस को छानबीन में राघवेंद्र की रायफल गायब मिली थी। एटीएस को आशंका है कि राघवेंद्र ने अपनी राइफल आतंकियों को सप्लाई कर दी है। राघवेंद्र ने पूछताछ में भी अफसरों के रायफल के बारे में संतोषजनक जवाब नहीं दिया है। 


शैलेंद्र को कौन पहुंचा था पिस्टलें
सैफुल्लाह और उसके साथियों को अजहर पिस्टलें और कारतूस सप्लाई करता था। अजहर को इटावा के शैलेंद्र, फकरे आलम समेत कुछ और लोगों के जरिए पिस्टलें हासिल होती थीं। शैलेंद्र, फकरे आलम और अन्य लोगों के पास पिस्टलें कहां से आती थी, इसका भी एटीएस पता लगा रही है।
 

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