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रूरा में चार मंजिला कान, काली स्काप पियो गुड्डन की पहचान
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रूरा कस्बा स्थित गुड्डन त्रिवेदी का घर
- फोटो : AKBARPUR
कानपुर देहात/रूरा। एनकाउंटर में मारे गए विकास दुबे के अंगरक्षक के रूप में पहचान वाले गुड्डन त्रिवेदी उर्फ अरविंद का रूरा में चार मंजिला मकान है। उसके पास काले रंग की स्कॉर्पियो है। उसके पास बुलट बाइक भी है। बिकरू की घटना के बाद से रूरा के मकान में ताला बंद है। मुंबई के थाणे में शनिवार को एटीएस ने उसे दबोचा है।
बिकरू कांड के बाद विकास दुबे के मददगार के तौर पर पुलिस ने 15 वांछितों की सूची जारी की है। उसमें गुड्डन त्रिवेदी भी शामिल है। शनिवार को मुंबई के थाणे में एटीएस मुंबई ने उसे गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार कानपुर देहात या कानपुर नगर में उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है, लेकिन वह काफी समय तक विकास के साथ अंगरक्षक के रुप में रहा है। वह मूल रूप से शिवली कोतवाली के कुढ़वा का रहने वाला है। गांव में अच्छी छवि होने की वजह से वर्ष 2005 में वह कुढ़वा प्रधान निर्वाचित हुआ। इसके बाद 2015 में वह जगनपुर सीट से जिला पंचायत सदस्य बना। 2015 में ही उसने पत्नी कंचन को कुढ़वा से प्रधान सीट का उम्मीदवार बनाया। पत्नी विजयी रही। मौजूदा समय में कुढ़वा प्रधान है। कहा जा रहा है कि गुरुवार को उज्जैन में गिरफ्तारी के बाद विकास दुबे ने पूछताछ में सीओ देवेंद्र कुमार मिश्रा का पैर गुड्डन त्रिवेदी व प्रेम प्रकाश द्वारा कुल्हाड़ी से काटने की बात कबूल की थी।
पत्नी की पिस्टल से गांठता रौब
गुड्डन त्रिवेदी की पत्नी कंचन के नाम गांव के पते से एक पिस्टल का लाइसेंस है। गुड्डन के नाम कोई शस्त्र लाइसेंस नहीं है। हालांकि उसे हथियारों को शौक है। सोशल मीडिया पर उसके इसी शौक को दर्शाने वाली फोटो इस समय वायरल हो रही हैं। इसमें वह एक रायफल व रिवाल्वर के साथ दिख रहा है। बताते हैं कि पत्नी की पिस्टल गुड्डन अपने पास रखता था। इसी से रौब गांठता था। 15 जून को उसने रूरा के पास गुटैहा गांव में बिल्डिंग मैटेरियल की दुकान शुरू की है। दुकान का उद्घाटन विकास दुबे ने किया था।
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बहनोई बोले, विकास को मिला करनी का फल
कानपुर देहात। बहनोई दिनेश तिवारी ने कहा कि विकास दुबे को कर्मों का फल मिला है। उसने बिकरू में निर्दोष पुलिस कर्मियों की बर्बरतापूर्वक हत्या की थी। उसे इसी तरह की सजा मिलनी थी।
विकास दुबे का अंतिम संस्कार कर लौटने के बाद शिवली मेन रोड स्थित अपने घर बातचीत में उन्होंने कहा कि गुस्सा इंसान को पागल कर देता है। विकास भी इसी का शिकार हो गया। गुस्से में ही उसने आठ पुलिस कर्मियों का खून बहा दिया। विकास की पत्नी रिचा के हथियार उठाने की बात पर उन्होंने कहा कि उससे कोई भी वास्ता नहीं है। विकास के अपराधों के चलते उन्होंने पिछले पांच सालों से कोई संबंध नहीं रखा है। एनकाउंटर के दिन पुलिस उन्हें लेने आई थी। कहा गया था कि विकास का अंतिम संस्कार करना है। इस पर वह गए थे। उन्होंने बताया कि विकास के चाचा व अन्य परिवारी शव लेने नहीं आए तो प्रशासन का सहयोग देकर अपने दायित्व को पूरा किया।
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बिकरू कांड के बाद विकास दुबे के मददगार के तौर पर पुलिस ने 15 वांछितों की सूची जारी की है। उसमें गुड्डन त्रिवेदी भी शामिल है। शनिवार को मुंबई के थाणे में एटीएस मुंबई ने उसे गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार कानपुर देहात या कानपुर नगर में उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है, लेकिन वह काफी समय तक विकास के साथ अंगरक्षक के रुप में रहा है। वह मूल रूप से शिवली कोतवाली के कुढ़वा का रहने वाला है। गांव में अच्छी छवि होने की वजह से वर्ष 2005 में वह कुढ़वा प्रधान निर्वाचित हुआ। इसके बाद 2015 में वह जगनपुर सीट से जिला पंचायत सदस्य बना। 2015 में ही उसने पत्नी कंचन को कुढ़वा से प्रधान सीट का उम्मीदवार बनाया। पत्नी विजयी रही। मौजूदा समय में कुढ़वा प्रधान है। कहा जा रहा है कि गुरुवार को उज्जैन में गिरफ्तारी के बाद विकास दुबे ने पूछताछ में सीओ देवेंद्र कुमार मिश्रा का पैर गुड्डन त्रिवेदी व प्रेम प्रकाश द्वारा कुल्हाड़ी से काटने की बात कबूल की थी।
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पत्नी की पिस्टल से गांठता रौब
गुड्डन त्रिवेदी की पत्नी कंचन के नाम गांव के पते से एक पिस्टल का लाइसेंस है। गुड्डन के नाम कोई शस्त्र लाइसेंस नहीं है। हालांकि उसे हथियारों को शौक है। सोशल मीडिया पर उसके इसी शौक को दर्शाने वाली फोटो इस समय वायरल हो रही हैं। इसमें वह एक रायफल व रिवाल्वर के साथ दिख रहा है। बताते हैं कि पत्नी की पिस्टल गुड्डन अपने पास रखता था। इसी से रौब गांठता था। 15 जून को उसने रूरा के पास गुटैहा गांव में बिल्डिंग मैटेरियल की दुकान शुरू की है। दुकान का उद्घाटन विकास दुबे ने किया था।
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बहनोई बोले, विकास को मिला करनी का फल
कानपुर देहात। बहनोई दिनेश तिवारी ने कहा कि विकास दुबे को कर्मों का फल मिला है। उसने बिकरू में निर्दोष पुलिस कर्मियों की बर्बरतापूर्वक हत्या की थी। उसे इसी तरह की सजा मिलनी थी।
विकास दुबे का अंतिम संस्कार कर लौटने के बाद शिवली मेन रोड स्थित अपने घर बातचीत में उन्होंने कहा कि गुस्सा इंसान को पागल कर देता है। विकास भी इसी का शिकार हो गया। गुस्से में ही उसने आठ पुलिस कर्मियों का खून बहा दिया। विकास की पत्नी रिचा के हथियार उठाने की बात पर उन्होंने कहा कि उससे कोई भी वास्ता नहीं है। विकास के अपराधों के चलते उन्होंने पिछले पांच सालों से कोई संबंध नहीं रखा है। एनकाउंटर के दिन पुलिस उन्हें लेने आई थी। कहा गया था कि विकास का अंतिम संस्कार करना है। इस पर वह गए थे। उन्होंने बताया कि विकास के चाचा व अन्य परिवारी शव लेने नहीं आए तो प्रशासन का सहयोग देकर अपने दायित्व को पूरा किया।