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गन्ने की खोई से बनी क्रीम रोकेगी झुर्रियां, लाएगी निखार, इस लड़के ने खोज निकाला सुंदरता का राज

Fri, 05 Jul 2019 06:08 PM IST
शिखा पांडेय यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Fri, 05 Jul 2019 06:08 PM IST
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Cream will be made from sugarcane and remove wrinkles
गन्ने की खोई से बनी क्रीम रोकेगी झुर्रियां - फोटो : अमर उजाला
गन्ने की खोई (बगास) से चेहरे की झुर्रियों को कम करने और निखार लाने वाली ब्यूटी क्रीम और बॉडी लोशन तैयार किया गया है। नेशनल शुगर इंस्टीट्यूट (एनएसआई) में इंटर्नशिप कर रहे कानपुर के शारदानगर क्षेत्र के तुषार मिश्रा ने यह खोज की है। तुषार की इस खोज को आर्गेनिक ब्यूटी इंडस्ट्री के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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एनएसआई के निदेशक प्रो. नरेंद्र मोहन ने बताया कि इस खोज को पेटेंट कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 तक विश्व आर्गेनिक ब्यूटी इंडस्ट्री का मार्केट 2500 लाख डॉलर का हो जाएगा।
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प्रो. नरेंद्र मोहन ने गुरुवार को इंस्टीट्यूट में पत्रकारों को बताया कि कार्बनिक रसायन अनुभाग के सहायक आचार्य डॉ. विष्णु प्रभाकर के निर्देशन में तुषार मिश्रा ने दो साल की कड़ी मेहनत के बाद यह खोज की है।

इसे 17 और 19 जुलाई को कोलकाता में आयोजित होने वाले शुगर टेक्नोलोजिस्ट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के वार्षिक अधिवेशन में भी प्रस्तुत किया जाएगा। इस खोज से चीनी मिलें बहुत मुनाफा कमा सकती हैं। इसके साथ ही एंटी एजिंग क्रीम और बॉडी लोशन की कीमत सस्ती हो जाएगी।

तुषार मिश्र ने बताया कि कॉस्मेटिक्स उत्पाद बनाने वालीं कंपनियां एंटी एजिंग क्रीम में सी ग्लाइकोसिटिक अल्कोहल का इस्तेमाल करती हैं। अभी यह बर्च से प्राप्त किया जाता है, जो महंगा पड़ता है।

गन्ने की खोई में जाइजोज होता है, इसे सी ग्लाइकोसिटिक अल्कोहल में परिवर्तित किया जा सकता है। गन्ने की खोई से बनी क्रीम से झुर्रियां कम पड़ेंगी, त्वचा में पोर्स (छेद) नहीं होंगे। अभी जो क्रीम बिक रही हैं, उनसे कीमत आधी हो जाएगी।
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क्या होती है खोई 
पेराई में गन्ने का रस निकालने के बाद बचे कचरे को खोई कहते हैं। अभी तक खोई का इस्तेमाल बिजली बनाने के ईंधन के रूप में होता रहा, लेकिन गैर पारंपरिक स्रोतों और सोलर ऊर्जा के आने से खोई का प्रयोग कम हो गया।

खोई से बनी बिजली दर पांच रुपये प्रति यूनिट पड़ती है और सोलर ऊर्जा की कीमत इससे आधी है। चीनी मिलों से हर वर्ष 950 लाख टन खोई प्राप्त होती है। खोई की कीमत डेढ़ सौ रुपये प्रति किलो है।
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