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Kanpur News: भाजपा नेताओं-कार्यकर्ताओं पर पथराव के आरोप में गिरफ्तार नौ कांग्रेसियों को अदालत ने भेजा जेल
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इटावा। भाजपा-कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच हुए संघर्ष के मामले में सोमवार को गिरफ्तार किए गए नौ कांग्रेसी नेताओं को मंगलवार को सीजीएम की कोर्ट में पेश किया गया। कांग्रेसियों का पक्ष रख रहे अधिवक्ता की दलीलों को खारिज करते हुए कोर्ट ने सभी आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक अभिरक्षा में भेजने का आदेश दिया। इसके बाद सभी आरोपियों को महोला स्थित सेंट्रल जेल भेज दिया गया। इससे पहले सभी आरोपियों का मेडिकल कराया गया। इस बीच कांग्रेसियों ने काफी हंगामा भी किया।
प्रधानमंत्री मोदी और उनकी मां पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप लगाकर सोमवार को भाजपा कार्यकर्ता सदर विधायक, जिलाध्यक्ष अरुण गुप्ता और महिला मोर्चा की अध्यक्ष बिमला शाक्य के नेतृत्व में नगर पालिका चौराहा स्थित कांग्रेस कार्यालय का घेराव करने गए थे।
आरोप है कि इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन कर रहे भाजपा नेताओं-कार्यकर्ताओं पर पथराव कर दिया था। इसके बाद सदर विधायक, जिलाध्यक्ष, महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष, भाजयुमो जिलाध्यक्ष समेत कई नेताओं ने घायल होने का दावा किया था। वहीं, कांग्रेस नेताओं ने भाजपा कार्यकर्ताओं की ओर से भी पथराव करने का आरोप लगाया था।
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पथराव के बाद सदर विधायक सरिता भदौरिया, जिलाध्यक्ष अरुण कुमार गुप्ता, क्षेत्रीय उपाध्यक्ष शिव महेश दुबे कार्यकर्ताओं के साथ नगर पालिका के सामने सड़क पर धरना देने बैठ गए थे। पुलिस ने महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष बिरला शाक्य की तहरीर पर छह गंभीर धाराओं में आठ नामजद और 20 अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी। इसके बाद आठ नामजद व एक अन्य कांग्रेसी अमित त्रिपाठी को गिरफ्तार कर लिया था।
मंगलवार को सभी का जिला अस्पताल में स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया। इस दौरान कांग्रेस नेताओं ने नारेबाजी की। इसके बाद सभी को सीजीएम कोर्ट में पेश किया गया। सीजीएम ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद सभी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने के आदेश दिए। आरोपियों को कोर्ट भेजे जाने के दौरान कलक्ट्रेट परिसर रोड पर कांग्रेस नेताओं ने नारेबाजी की। साथ ही अधिवक्ताओं ने भी आरोपी एडवोकेट पल्लव दुबे के पक्ष में नारेबाजी करते हुए भाजपा पर गलत फंसाने का आरोप लगाया।
अधिवक्ताओं ने यह पक्ष रखे
कांग्रेस कार्यकर्ताओं के अधिवक्ता सिद्धार्थ शंकर दीक्षित की ओर कोर्ट को बताया गया कि सत्ता पक्ष के नेताओं के दबाव में कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर झूठे व फर्जी तथ्यों के आधार पर प्रथम सूचना रिपोर्ट अंकित करके गिरफ्तार किया गया है। बताया कि एफआईआर के अनुसार, पत्थरबाजी में कुछ लोग चोटिल हुए हैं, वह सभी साधारण किस्म की चोटें हैं। कांग्रेसियों का पक्ष रखते हुए अधिवक्ता ने कहा कि कोई भी पत्थरबाजी व हमला नहीं किया है न ही किसी को जान से मारने की नीयत से चोटें पहुंचाईं। बताया कि हकीकत में भाजपा कार्यकर्ताओं ने भीड़ एकत्रित करके कांग्रेस कार्यालय पर हमला किया और तोड़फोड़ भी की। कांग्रेस कार्यकर्ताओं की ओर से दी गई तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। अधिवक्ता प्रशांत दुबे ने बताया कि कांग्रेसियों ने एसएसपी और पुलिस महानिदेशक को शिकायती पत्र भेजा है। उधर, भाजपा की ओर से अधिवक्ता ने कांग्रेसियों की ओर से किए गए हमलों के तथ्य पेश किए। कोर्ट ने भाजपा के अधिवक्ता के तथ्यों को सही मानते हुए आदेश दिया।
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प्रधानमंत्री मोदी और उनकी मां पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप लगाकर सोमवार को भाजपा कार्यकर्ता सदर विधायक, जिलाध्यक्ष अरुण गुप्ता और महिला मोर्चा की अध्यक्ष बिमला शाक्य के नेतृत्व में नगर पालिका चौराहा स्थित कांग्रेस कार्यालय का घेराव करने गए थे।
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आरोप है कि इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन कर रहे भाजपा नेताओं-कार्यकर्ताओं पर पथराव कर दिया था। इसके बाद सदर विधायक, जिलाध्यक्ष, महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष, भाजयुमो जिलाध्यक्ष समेत कई नेताओं ने घायल होने का दावा किया था। वहीं, कांग्रेस नेताओं ने भाजपा कार्यकर्ताओं की ओर से भी पथराव करने का आरोप लगाया था।
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पथराव के बाद सदर विधायक सरिता भदौरिया, जिलाध्यक्ष अरुण कुमार गुप्ता, क्षेत्रीय उपाध्यक्ष शिव महेश दुबे कार्यकर्ताओं के साथ नगर पालिका के सामने सड़क पर धरना देने बैठ गए थे। पुलिस ने महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष बिरला शाक्य की तहरीर पर छह गंभीर धाराओं में आठ नामजद और 20 अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी। इसके बाद आठ नामजद व एक अन्य कांग्रेसी अमित त्रिपाठी को गिरफ्तार कर लिया था।
मंगलवार को सभी का जिला अस्पताल में स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया। इस दौरान कांग्रेस नेताओं ने नारेबाजी की। इसके बाद सभी को सीजीएम कोर्ट में पेश किया गया। सीजीएम ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद सभी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने के आदेश दिए। आरोपियों को कोर्ट भेजे जाने के दौरान कलक्ट्रेट परिसर रोड पर कांग्रेस नेताओं ने नारेबाजी की। साथ ही अधिवक्ताओं ने भी आरोपी एडवोकेट पल्लव दुबे के पक्ष में नारेबाजी करते हुए भाजपा पर गलत फंसाने का आरोप लगाया।
अधिवक्ताओं ने यह पक्ष रखे
कांग्रेस कार्यकर्ताओं के अधिवक्ता सिद्धार्थ शंकर दीक्षित की ओर कोर्ट को बताया गया कि सत्ता पक्ष के नेताओं के दबाव में कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर झूठे व फर्जी तथ्यों के आधार पर प्रथम सूचना रिपोर्ट अंकित करके गिरफ्तार किया गया है। बताया कि एफआईआर के अनुसार, पत्थरबाजी में कुछ लोग चोटिल हुए हैं, वह सभी साधारण किस्म की चोटें हैं। कांग्रेसियों का पक्ष रखते हुए अधिवक्ता ने कहा कि कोई भी पत्थरबाजी व हमला नहीं किया है न ही किसी को जान से मारने की नीयत से चोटें पहुंचाईं। बताया कि हकीकत में भाजपा कार्यकर्ताओं ने भीड़ एकत्रित करके कांग्रेस कार्यालय पर हमला किया और तोड़फोड़ भी की। कांग्रेस कार्यकर्ताओं की ओर से दी गई तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। अधिवक्ता प्रशांत दुबे ने बताया कि कांग्रेसियों ने एसएसपी और पुलिस महानिदेशक को शिकायती पत्र भेजा है। उधर, भाजपा की ओर से अधिवक्ता ने कांग्रेसियों की ओर से किए गए हमलों के तथ्य पेश किए। कोर्ट ने भाजपा के अधिवक्ता के तथ्यों को सही मानते हुए आदेश दिया।
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