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दहेज के लिए पत्नी की हत्या में युवक को आजीवन कारावास
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कानपुर देहात। बरौर थाना क्षेत्र के बम्हनौती गांव में चार साल पहले 50 हजार रुपये दहेज की मांग पूरी न होने पर विवाहिता की जलाकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में कोर्ट ने बुधवार को मृतका के पति को घटना का दोषी मानते हुए आजीवन और ससुर को 18 माह कारावास की सजा सुनाई है। दोनों पर अर्थदंड भी लगाया गया है।
बम्हनौती गांव में 15 नवंबर 2017 को अजय तिवारी की पत्नी श्वेता की आग से जलकर मौत हो गई थी। मामले में मृतका के भाई अंकित दीक्षित ने उसके पति अजय, ससुर वंशलाल तिवारी, ननद ऊषा व ननद के बेटे बाबू पर दहेज हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप था कि वह दहेज में 50 हजार रुपये की मांग कर रहे थे। पूरी न होने पर जलाकर हत्या कर दी। पुलिस ने विवेचना के बाद अजय व उसके पिता वंशलाल पर चार्जशीट दाखिल की थी जबकि घटना के समय वहां मौजूद न होने पर ऊषा व उसके बेटे को मुकदमे से बाहर कर दिया था। सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश सप्तम प्रवीण कुमार पांडेय की अदालत में चल रही थी। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने अजय के दो छोटे बच्चे होने का हवाला देकर सजा कम करने का अनुरोध किया, वहीं सहायक शासकीय अधिवक्ता धनंजय पांडेय ने इन तर्कों को खारिज करते हुए अपराध की गंभीरता का हवाला दिया। कोर्ट ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद फैसला सुरक्षित कर लिया था। बुधवार को अजय तिवारी को आजीवन कारावास व दस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। वहीं, उसके पिता वंशलाल को 18 माह का कारावास दो हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। सहायक शासकीय अधिवक्ता धनंजय पांडेय ने बताया कि वृद्ध की अर्थदंड की राशि जमा न करने पर वंशलाल तिवारी को तीन माह का अतिरिक्त कारावास काटना होगा।
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बम्हनौती गांव में 15 नवंबर 2017 को अजय तिवारी की पत्नी श्वेता की आग से जलकर मौत हो गई थी। मामले में मृतका के भाई अंकित दीक्षित ने उसके पति अजय, ससुर वंशलाल तिवारी, ननद ऊषा व ननद के बेटे बाबू पर दहेज हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप था कि वह दहेज में 50 हजार रुपये की मांग कर रहे थे। पूरी न होने पर जलाकर हत्या कर दी। पुलिस ने विवेचना के बाद अजय व उसके पिता वंशलाल पर चार्जशीट दाखिल की थी जबकि घटना के समय वहां मौजूद न होने पर ऊषा व उसके बेटे को मुकदमे से बाहर कर दिया था। सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश सप्तम प्रवीण कुमार पांडेय की अदालत में चल रही थी। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने अजय के दो छोटे बच्चे होने का हवाला देकर सजा कम करने का अनुरोध किया, वहीं सहायक शासकीय अधिवक्ता धनंजय पांडेय ने इन तर्कों को खारिज करते हुए अपराध की गंभीरता का हवाला दिया। कोर्ट ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद फैसला सुरक्षित कर लिया था। बुधवार को अजय तिवारी को आजीवन कारावास व दस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। वहीं, उसके पिता वंशलाल को 18 माह का कारावास दो हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। सहायक शासकीय अधिवक्ता धनंजय पांडेय ने बताया कि वृद्ध की अर्थदंड की राशि जमा न करने पर वंशलाल तिवारी को तीन माह का अतिरिक्त कारावास काटना होगा।
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