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बच्ची की हत्या में दंपती हिरासत में
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उन्नाव। बांगरमऊ में बच्ची को अगवा कर दुष्कर्म और हत्या करने के मामले में मंगलवार को नया मोड़ आ गया। पड़ोस में रहती प्रेमिका के भाइयों को फंसाने के लिए पिता ने ही अपनी मासूम बेटी की हत्या की थी। दुष्कर्म का आरोप लगाने के लिए बेटी के नाजुक अंग में चोट पहुंचाई। घटना को अंजाम देने में मां ने भी सहयोग किया। पुलिस ने आरोपी दंपती को हिरासत में लिया है। आईजी लक्ष्मी सिंह ने प्रेसवार्ता कर हैरान करने वाली इस घटना का खुलासा किया।
बांगरमऊ कोतवाली क्षेत्र के गांव भिखारीपुर रुल्ल निवासी ध्रुव कुमार की बेटी सोनम (11) का खून से लथपथ शव सोमवार सुबह घर से एक किमी दूर रेलवे लाइन के पास पड़ा मिला था। घटनास्थल पर गड़े सीमेंट के पिलर में सिर पटककर उसकी हत्या की गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बच्ची के नाजुक अंग में भी चोट पहुंचाने की पुष्टि हुई थी। बच्ची की मां राजरानी ने पड़ोसी महिला रीना, उसके जेठ संतोष, देवर बच्चन, भाई राजू व राजेश पर दुष्कर्म के बाद हत्या का आरोप लगाया था।
जघन्य वारदात के बाद मंगलवार दोपहर आईजी ने बांगरमऊ पहुंचकर घटनास्थल का निरीक्षण किया। एसपी दिनेश त्रिपाठी ने अब तक हुई जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट की जानकारी दी। मृतका के परिजनों की संलिप्तता की आशंका जताई। आईजी ने मृतका के पिता व मां को बुलाकर पूछताछ की। पहले तो दोनों गुमराह करते रहे। बाद में अपने ही बुने जाल में फंस गए और सच उगल दिया। आईजी ने बताया कि मृतका के पिता की घर के सामने रहने वाली महिला से गहरी नजदीकियां थीं। तीन माह पहले वह महिला को अपने साथ दिल्ली लेकर गया था।
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महिला की मां ने बेटी को भगा ले जाने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। एक महीने पहले महिला घर लौटी तो परिजनों के दबाव में प्रेमी (बच्ची के पिता) पर दुष्कर्म की रिपोर्ट दर्ज कराने की कोशिश में लग गई। उधर प्रेमिका के जेठ, देवर व दो भाई बच्ची के बड़े होने पर जघन्य कृत्य करने की धमकी दे रहे थे। इससे ऊबे बच्ची के पिता ने प्रेमिका व उसके परिजनों को सबक सिखाने के लिए अक्सर बीमार रहने वाली बेटी को ढाल बनाया। पहले उसकी हत्या की। फिर दुष्कर्म की धारा लगवाने के लिए नाजुक अंग में चोट पहुंचाई। आईजी लक्ष्मी सिंह ने बताया कि जघन्य हत्याकांड में मृतका के पिता के अलावा योजना में मां भी शामिल है। दोनों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
ससुराल से रात में घर पहुंचा था पिता
एसपी दिनेश त्रिपाठी ने बताया कि बच्ची को लेकर उसकी मां 3 जून को अपने मायके माखी थाना क्षेत्र गई थी। वहीं बच्ची का पिता भी मौजूद था। उसने प्रेमिका व उसके परिजनों को सबक सिखाने के लिए उसने पत्नी के सामने बीमार बेटी की हत्या सभी को फंसाने की बात कही। पत्नी ने इसका विरोध किया पर वह नहीं माना। पांच जून रविवार को सुबह उसने जबरन पत्नी के बेटी के साथ बांगरमऊ भेज दिया। शाम सात बजे साले की बाइक लेकर वह भी बांगरमऊ अपने घर के लिए निकला। चकलवंशी में रुककर शराब पी और फतेहपुर चौरासी के हुलासीकुंआ के पास मोबाइल बंदकर घटनास्थल के पास बनी अपनी कोठरी पहुुंच गया। यहां बाइक खड़ी कर घर पहुंचा और छत पर लेटी बेटी को लेकर नीचे उतरा। बच्ची की मां ने पीछे के रास्ते से ले जाने की बात कह दरवाजा खोले। जिस पर पिता उसे लेकर कोठरी के पास रेलवे लाइन के किनारे पहुंचा और वहीं घटना को अंजाम देकर ससुराल माखी चला गया। 10.45 बजे 112 पर बच्ची की मां ने फोन कर बेटी को अगवा करने की जानकारी दी। वहीं रात लगभग 12 बजे आरोपी पिता का मोबाइल खुल गया। सर्विलांस की मदद व फोन लोकेशन से पुलिस का शक पिता पर गहरा गया।
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छत से बेटी को अगवा करने की पटकथा में फंस गया
छत पर लेटी बच्ची को अगवा किए जाने की कहानी ही परिजनों को शक के घेरे में ले आई। पुलिस को यह बात शुरुआत से ही हजम नहीं हो रही थी। मां ने पुलिस को बताया था कि बेटी को अगवा करने वाले उसे लेकर पहले छत के बगल में बने शौचालय की छत पर कूदे फिर जमीन में कूद गए। एएसपी शशिशेखर सिंह ने जब जांच की तो छत से शौचालय की छत की दूरी चार फिट व यहां से जमीन की दूरी छह फिट थी। सिपाही को छत से नीचे कुदवाया गया तो उसका दोनों जगहों से नीचे कूदना संभव नहीं हो पाया। यहीं से पुलिस को परिजनों पर शक हो गया था।
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बांगरमऊ कोतवाली क्षेत्र के गांव भिखारीपुर रुल्ल निवासी ध्रुव कुमार की बेटी सोनम (11) का खून से लथपथ शव सोमवार सुबह घर से एक किमी दूर रेलवे लाइन के पास पड़ा मिला था। घटनास्थल पर गड़े सीमेंट के पिलर में सिर पटककर उसकी हत्या की गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बच्ची के नाजुक अंग में भी चोट पहुंचाने की पुष्टि हुई थी। बच्ची की मां राजरानी ने पड़ोसी महिला रीना, उसके जेठ संतोष, देवर बच्चन, भाई राजू व राजेश पर दुष्कर्म के बाद हत्या का आरोप लगाया था।
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जघन्य वारदात के बाद मंगलवार दोपहर आईजी ने बांगरमऊ पहुंचकर घटनास्थल का निरीक्षण किया। एसपी दिनेश त्रिपाठी ने अब तक हुई जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट की जानकारी दी। मृतका के परिजनों की संलिप्तता की आशंका जताई। आईजी ने मृतका के पिता व मां को बुलाकर पूछताछ की। पहले तो दोनों गुमराह करते रहे। बाद में अपने ही बुने जाल में फंस गए और सच उगल दिया। आईजी ने बताया कि मृतका के पिता की घर के सामने रहने वाली महिला से गहरी नजदीकियां थीं। तीन माह पहले वह महिला को अपने साथ दिल्ली लेकर गया था।
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महिला की मां ने बेटी को भगा ले जाने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। एक महीने पहले महिला घर लौटी तो परिजनों के दबाव में प्रेमी (बच्ची के पिता) पर दुष्कर्म की रिपोर्ट दर्ज कराने की कोशिश में लग गई। उधर प्रेमिका के जेठ, देवर व दो भाई बच्ची के बड़े होने पर जघन्य कृत्य करने की धमकी दे रहे थे। इससे ऊबे बच्ची के पिता ने प्रेमिका व उसके परिजनों को सबक सिखाने के लिए अक्सर बीमार रहने वाली बेटी को ढाल बनाया। पहले उसकी हत्या की। फिर दुष्कर्म की धारा लगवाने के लिए नाजुक अंग में चोट पहुंचाई। आईजी लक्ष्मी सिंह ने बताया कि जघन्य हत्याकांड में मृतका के पिता के अलावा योजना में मां भी शामिल है। दोनों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
ससुराल से रात में घर पहुंचा था पिता
एसपी दिनेश त्रिपाठी ने बताया कि बच्ची को लेकर उसकी मां 3 जून को अपने मायके माखी थाना क्षेत्र गई थी। वहीं बच्ची का पिता भी मौजूद था। उसने प्रेमिका व उसके परिजनों को सबक सिखाने के लिए उसने पत्नी के सामने बीमार बेटी की हत्या सभी को फंसाने की बात कही। पत्नी ने इसका विरोध किया पर वह नहीं माना। पांच जून रविवार को सुबह उसने जबरन पत्नी के बेटी के साथ बांगरमऊ भेज दिया। शाम सात बजे साले की बाइक लेकर वह भी बांगरमऊ अपने घर के लिए निकला। चकलवंशी में रुककर शराब पी और फतेहपुर चौरासी के हुलासीकुंआ के पास मोबाइल बंदकर घटनास्थल के पास बनी अपनी कोठरी पहुुंच गया। यहां बाइक खड़ी कर घर पहुंचा और छत पर लेटी बेटी को लेकर नीचे उतरा। बच्ची की मां ने पीछे के रास्ते से ले जाने की बात कह दरवाजा खोले। जिस पर पिता उसे लेकर कोठरी के पास रेलवे लाइन के किनारे पहुंचा और वहीं घटना को अंजाम देकर ससुराल माखी चला गया। 10.45 बजे 112 पर बच्ची की मां ने फोन कर बेटी को अगवा करने की जानकारी दी। वहीं रात लगभग 12 बजे आरोपी पिता का मोबाइल खुल गया। सर्विलांस की मदद व फोन लोकेशन से पुलिस का शक पिता पर गहरा गया।
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छत से बेटी को अगवा करने की पटकथा में फंस गया
छत पर लेटी बच्ची को अगवा किए जाने की कहानी ही परिजनों को शक के घेरे में ले आई। पुलिस को यह बात शुरुआत से ही हजम नहीं हो रही थी। मां ने पुलिस को बताया था कि बेटी को अगवा करने वाले उसे लेकर पहले छत के बगल में बने शौचालय की छत पर कूदे फिर जमीन में कूद गए। एएसपी शशिशेखर सिंह ने जब जांच की तो छत से शौचालय की छत की दूरी चार फिट व यहां से जमीन की दूरी छह फिट थी। सिपाही को छत से नीचे कुदवाया गया तो उसका दोनों जगहों से नीचे कूदना संभव नहीं हो पाया। यहीं से पुलिस को परिजनों पर शक हो गया था।