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महिला के गिड़गिड़ाने पर पसीजे अधिकारी, शेल्टर होम में ठहरे बेटों को दूर से मिलवाया
Mon, 06 Apr 2020 03:46 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हमीरपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हमीरपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Mon, 06 Apr 2020 03:46 PM IST
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शेल्टर होम में ठहरे बेटों से मिली महिला
- फोटो : अमर उजाला
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हमीरपुर जिले में दरियापुर के शेल्टर होम में ठहराए गए सूरत से आए अपने कलेजे के टुकड़ों से मिलने पत्योरा गांव निवासी विधवा सुनीता पहुंच गई। झोले में वह बच्चों को खाना लेकर पहुंची तो शेल्टर होम के बाहर मौजूद उपजिलाधिकारी द्वारा उसके आने का कारण पूछते ही वह फूट-फूटकर रोने लगी।
रोती बिलखती पत्योरा गांव निवासी सुनीता बोली कि उसके पति की पिछले साल मौत हो चुकी है। मेहनत मजदूरी करती है, बेटे ही उसका सहारा हैं। इसलिए मन बिचलित होने पर वह बच्चों के लिए खाना झोले में भरकर 21 किमी पैदल आई है।
उसने कहा कि बेटे प्रेमचंद्र ने फोन कर बताया था कि वह छोटे भाई धनीराम के साथ दरियापुर के आश्रम पद्धति विद्यालय में ठहरे हैं। कहने लगी कि बच्चों से मिलने की इच्छा को वह रोक नहीं सकी।
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रोती बिलखती पत्योरा गांव निवासी सुनीता बोली कि उसके पति की पिछले साल मौत हो चुकी है। मेहनत मजदूरी करती है, बेटे ही उसका सहारा हैं। इसलिए मन बिचलित होने पर वह बच्चों के लिए खाना झोले में भरकर 21 किमी पैदल आई है।
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उसने कहा कि बेटे प्रेमचंद्र ने फोन कर बताया था कि वह छोटे भाई धनीराम के साथ दरियापुर के आश्रम पद्धति विद्यालय में ठहरे हैं। कहने लगी कि बच्चों से मिलने की इच्छा को वह रोक नहीं सकी।
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विद्यालय में मौजूद एसडीएम राजेश कुमार चौरसिया ने सुनीता से कहा कि यहां रहने व खाने की कोई दिक्कत नहीं है। उसके बच्चों को 12 अप्रैल को छोड़ा जाएगा। मगर वह बच्चों को अपने हाथ का बना खाना खिलाने की जिद कर रोने लगी। इस पर कर्मचारियों ने उसे विद्यालय गेट के बाहर खड़ाकर उसके बच्चों से मिलवा दिया।
विधवा के बेटे प्रेमचंद्र ने बताया कि उसकी दो साल पूर्व शादी हुई है। जबकि छोटा भाई धनीराम अविवाहित है। वह लोग सूरत में साड़ी बनाने वाली फैक्ट्री में पिछले करीब पांच साल से काम कर रहे हैं। लाकडाउन होने पर पिछले 25 मार्च को आए तो कुछेछा के राजकीय महाविद्यालय में उन्हें रोक लिया था।
इसके बाद 31 मार्च से दरियापुर के शेल्टर होम में रखा गया है। फिलहाल करीब 20 मिनट ठहरी महिला बच्चों से मिल अपने खुशी के आंसू बहाते पैदल ही पत्योरा गांव चली गई।
विधवा के बेटे प्रेमचंद्र ने बताया कि उसकी दो साल पूर्व शादी हुई है। जबकि छोटा भाई धनीराम अविवाहित है। वह लोग सूरत में साड़ी बनाने वाली फैक्ट्री में पिछले करीब पांच साल से काम कर रहे हैं। लाकडाउन होने पर पिछले 25 मार्च को आए तो कुछेछा के राजकीय महाविद्यालय में उन्हें रोक लिया था।
इसके बाद 31 मार्च से दरियापुर के शेल्टर होम में रखा गया है। फिलहाल करीब 20 मिनट ठहरी महिला बच्चों से मिल अपने खुशी के आंसू बहाते पैदल ही पत्योरा गांव चली गई।