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सिस्टर डॉली...मरीजों की सेवा कर पेश की मिसाल, कोविड वार्ड में तीन बार ड्यूटी का रिकाॅर्ड

Sat, 25 Jul 2020 02:23 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Sat, 25 Jul 2020 02:23 PM IST
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Corona Warrior Story: Sister Dolly Increased own immunity with patients by service
कानपुर हैलट अस्पताल की सिस्टर वीना डॉली सिंह - फोटो : amar ujala
फेसबुक के साथ अमर उजाला ने कोरोना सेनानियों के जज्बे और जुनून पर यह श्रृंखला शुरू की है। इसके तहत आपको साहसी कोरोना सेनानियों की कथाएं नियमित रूप से पढ़ने को मिलेंगी। 
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कानपुर के हैलट अस्पताल में सिस्टर वीना डॉली सिंह...सेवा और समर्पण का भाव ऐसा की मां की देखभाल के लिए शादी तक नहीं की। अब कोरोना महामारी की चुनौती सामने आई तो उससे भी दो-दो हाथ करने से पीछे नहीं हटी़ं।
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ऐसे दौर में जब ज्यादातर स्टाफ कोविड-19 वार्ड से अपनी ड्यूटी कटवाने की जुगत में लगा रहता है, तब वह लगातार तीन बार कोविड वार्ड में ड्यूटी का रिकॉर्ड बनाए बैठी हैं। डॉली के अनुभव को देखते हुए अब उन्हें जूनियर डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को कोविड-19 वार्ड में ड्यूटी के लिए प्रशिक्षण में लगाया गया है।
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हालांकि उनका मन यह कम लगता है। वह कहती हैं कोरोना मरीजों की सेवा कर जो सुखद अनुभूति मिलती है, वह प्रशिक्षण में कहां। 57 वर्षीय सिस्टर डाॅली को अपनी मां से इतना लगाव रहा कि भाई और उसका परिवार होते हुए भी वे उन्हें अपने साथ ही रखती हैं।

मां से दूर न जाना पड़े इसलिए शादी भी नहीं की। अब कोरोना के दौर में जब उनके सेवाभाव की परीक्षा की घड़ी आई तो ऐसे भी पीछे नहीं हटीं। मदर टेरेसा को आदर्श मानने वाली सिस्टर डॉली ने मां को भाई भाभी की देखरेख में भेजा और जुट गईं कोरोना मरीजों की सेवा में।

यह भी नहीं सोचा कि इस खतरनाक बीमारी, जिसके इलाज की कोई दवा नहीं बनी, उनको भी लग गई तो...। वे लगातार तीन बार कोविड वार्ड में ही ड्यूटी करती रह गईं। वह खुद नहीं चाहतीं और रोस्टर का इंतजार करतीं तो एक के बाद दूसरी ड्यूटी की पारी करीब 40 से 45 दिन बाद आती।

दहशत से टूटे मरीजों को जोड़ा
डॉली कहती हैं कि इंसान जब करुणा की गिरफ्त में आता है तो परिवार भी दूर हो जाता है। इससे मरीज की मर्ज से लड़ने की आधी शक्ति बीमारी का पता चलते ही टूट जाती है। ऐसे में यह एहसास दिलाना होता है कि आपको कुछ नहीं हुआ, यह आम वायरल जैसा ही होता है, आप जल्दी ठीक हो कर परिवार के बीच खिलखिलाएंगे।


सकारात्मक बातों और अच्छी देखभाल से ही मरीजों में बीमारी से लड़कर स्वस्थ होने का संबल मिलता है। मैंने भी यह किया। वायरस की दहशत से टूटे मरीजों को जोड़ा। जिससे उन्हें बीमारी से लड़ने में ताकत मिली।
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