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Corona Vaccination: वैक्सीनेशन के तीन सप्ताह बाद मजबूत हो रही प्रतिरोधकता, जांच में खुलासा
Sun, 04 Apr 2021 07:31 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sun, 04 Apr 2021 07:31 PM IST
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कोरोना वायरस टीकाकरण
- फोटो : पीटीआई
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कोरोना वैक्सीन लगने के तीन सप्ताह के बाद शरीर में एंटीबॉडीज की फौज खड़ी हो जा रही है। इसके बाद भी एंटीबॉडीज का बनना जारी रहता है। वैक्सीन की दूसरी डोज के दो सप्ताह के बाद से शरीर में कोरोना के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होनी शुरू हो जाती है।
यह खुलासा तीन सौ लोगों की आईजीजी एंटीबॉडीज टाइटर जांच में हुआ है। वैक्सीनेशन करवाने वाले लोगों की अलग-अलग जांचों में पाया गया कि पहली डोज लगने के बाद से ही व्यक्ति के शरीर में एंटीबॉडीज बनने लगती हैं लेकिन इनकी संख्या कम रहती है।
दूसरी डोज लगने के बाद एंटीबॉडीज में इजाफा होता रहता है। तीन सप्ताह के बाद व्यक्ति के शरीर में एंटीबॉडीज की पर्याप्त संख्या हो जाती है और इम्यूनिटी मजबूत हो जाती है। इससे संक्रमण से बचाव होता है। संक्रमण हो भी गया तो रोग खतरनाक नहीं हो पाता।
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इसके अलावा कोरोना संक्रमित हो चुके ऐसे लोगों की भी जांच की गई, जिन्होंने अभी वैक्सीन नहीं लगवाई। उनकी जांच से निष्कर्ष निकला है कि प्राकृतिक संक्रमण से एंटीबॉडीज कम संख्या में बनती हैं और डेढ़-दो महीने में नष्ट हो जाती हैं।
इसके पहले जीएसवीएम मेडिकल कालेज के ब्लड ट्रांसफ्यूजन विभाग में हुई रोगियों की जांच में भी इसी तरह का नतीजा सामने आया था। वैक्सीन से बनी एंटीबॉडीज अधिक दिनों तक रहती हैं। कानपुर नर्सिंगहोम एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. एमके सरावगी ने बताया कि वैक्सीन लगवाना जरूरी है।
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यह खुलासा तीन सौ लोगों की आईजीजी एंटीबॉडीज टाइटर जांच में हुआ है। वैक्सीनेशन करवाने वाले लोगों की अलग-अलग जांचों में पाया गया कि पहली डोज लगने के बाद से ही व्यक्ति के शरीर में एंटीबॉडीज बनने लगती हैं लेकिन इनकी संख्या कम रहती है।
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दूसरी डोज लगने के बाद एंटीबॉडीज में इजाफा होता रहता है। तीन सप्ताह के बाद व्यक्ति के शरीर में एंटीबॉडीज की पर्याप्त संख्या हो जाती है और इम्यूनिटी मजबूत हो जाती है। इससे संक्रमण से बचाव होता है। संक्रमण हो भी गया तो रोग खतरनाक नहीं हो पाता।
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इसके अलावा कोरोना संक्रमित हो चुके ऐसे लोगों की भी जांच की गई, जिन्होंने अभी वैक्सीन नहीं लगवाई। उनकी जांच से निष्कर्ष निकला है कि प्राकृतिक संक्रमण से एंटीबॉडीज कम संख्या में बनती हैं और डेढ़-दो महीने में नष्ट हो जाती हैं।
इसके पहले जीएसवीएम मेडिकल कालेज के ब्लड ट्रांसफ्यूजन विभाग में हुई रोगियों की जांच में भी इसी तरह का नतीजा सामने आया था। वैक्सीन से बनी एंटीबॉडीज अधिक दिनों तक रहती हैं। कानपुर नर्सिंगहोम एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. एमके सरावगी ने बताया कि वैक्सीन लगवाना जरूरी है।