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खोखले दावे: 310 गांवों में सिर्फ 4977 की जांच, ग्रामीण बोले आरआरटी आती भी है तो दस-बीस की जांच कर लौट जाती

Sun, 16 May 2021 01:29 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर (घाटमपुर/भीतरगांव)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर (घाटमपुर/भीतरगांव) Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Sun, 16 May 2021 01:29 AM IST
सार

आरआरटी (रैपिड रेस्पांस टीम) घाटमपुर, पतारा और भीतरगांव के कुल 310 गांवों में घर-घर जांच का अभियान चलाकर सिर्फ 4977 लोगों की जांच ही कर पाई है।

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corona test: Hollow claims of teams reaching door to door in rural areas
कोरोना जांच - फोटो : amar ujala

विस्तार

डब्ल्यूएचओ (विश्व स्वास्थ्य संगठन) को प्रदेश सरकार के कोरोना माइक्रो मैनेजमेंट की हकीकत परखनी है तो उसे गांवों का एक चक्कर जरूर लगाना चाहिए। गांवों में कोरोना संक्रमण से सैकड़ों मौतें हो गईं। अधिकतर सरकारी अस्पताल बंद पड़े हैं। आरआरटी (रैपिड रेस्पांस टीम) भी दस-बीस लोगों की जांच कर पूरे गांव की सेहत परख लेने की अलौकिक शक्ति से लैस सी हो गई है।
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भीतरगांव और घाटमपुर ब्लॉक में आरआरटी ने गांवों में घर-घर जाकर बुखार पीङ़ित या उनके परिजनों की एंटीजन किट से कोविड जांच का दावा तो किया है, लेकिन आकड़े बताते हैं कि यह सरासर झूठ है। घाटमपुर, पतारा और भीतरगांव के कुल 310 गांवों में घर-घर जांच का अभियान चलाकर सिर्फ 4977 लोगों की जांच की गई।
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118 गांवों में 1205 की जांच 
घाटमपुर सीएचसी में चले अभियान में ब्लॉक के 118 गांवों में आरआरटी पहुंची और 1205 लोगों की एंटीजन किट से जांच की। यानी हर गांव में औसत 11 लोगों की जांच एंटीजन से की गई। इनमें 53 कोरोना संक्रमित मिले। घर-घर जांच होती तो संक्रमित मरीजों की संख्या कुछ और होती। 
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72 गांवों में 1346 की जांच 
पतारा ब्लॉक में आरआरटी ने 72 गांवों में 1346 मरीजों की जांच की। मतलब औसतन हर एक गांव में 18-19 लोगों की जांच करके घर-घर जांच करने का दावा किया गया। पतारा में कुल 20 संक्रमित मिले हैं।

120 गांवों में 2426
भीतरगांव ब्लॉक के 120 गांवों में 2426 मरीजों में एंटीजन किट से जांच की बात कही गई। मतलब औसतन हर एक गांव से 20-21 लोगों की जांच की गई। इसमें 43 मरीज कोरोना संक्रमित मिले हैं। भीतरगांव इलाके में प्रमुख गांवों को छोड़कर छोटे गांवों और मजरों में टीम ने देखा तक नहीं।

ग्रामीणों ने बताई हकीकत 
भीतरगांव के पासी का डेरा निवासी अनिल पासी ने बताया कि छोटा सा गांव होने के कारण स्वास्थ्य विभाग की कोई टीम नहीं आई। इस समय गांव में राजकुमार (65), अनिल (36) रिंकी देवी (33) बुखार से तप रहे हैं। कुछ दिन पहले ही यहां बुखार से एक बुजुर्ग की मौत हुई थी। बारीगांव का मजरा पासीपुरवा निवासी नीरज पासी बुखार से घर में इलाज कराकर कुछ स्वस्थ हुए हैं। बताते हैं कि गांव में अभी तक कोई मेडिकल टीम नहीं आई। सेमरा गांव निवासी शिवशंकर वर्मा बताते हैं कि गांव में दर्जनों बुखार पीड़ितों ने निजी अस्पतालों या झोलाछाप से इलाज कराया है। गांव में अभी तक कोई भी टीम नहीं आई।
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