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कंट्रोल रूम कोमा में
अमर उजाला ब्यूरो/कानपुर
Updated Wed, 02 Mar 2016 12:58 AM IST
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कानपुर। शहर का पुलिस कंट्रोल रूम आउट ऑफ कंट्रोल हो चुका है। क्राइम लोकेशन पर सबसे पहले पहुंचने की जिसकी जिम्मेदारी है उन गाड़ियों की लोकेशन खुद कंट्रोल रूम को ही नहीं मिल रही है। वहीं इंटरनेट सेवा बंद होने से कंट्रोल रूम किसी काम का नहीं रहा। शहर के सारे सीसीटीवी कैमरे कंट्रोल रूम से कट गए हैं। दरअसल, सीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट में से एक ‘डायल 100’ की व्यवस्थाएं ध्वस्त हो चुकी हैं। शहर के 44 थानों को मिली 58 गाड़ियां(इनोवा, इंडिका) ‘कंट्रोल’ से बाहर हैं। कंट्रोल रूम का एनुअल मैंटीनेंस कांट्रैक्ट स्माप्त होने से रिचार्जेबल ट्रैकिंग डिवाइस की चार्जिंग नहीं हो पा रही है और डिवाइस डिब्बा बन गए हैं। कंट्रोल रूम में लगा गाड़ियों को ट्रैक करने वाले डिवाइस की बैटरी ठप हो चुकी है। मेंटेनेंस कांट्रैक्ट 3 फरवरी को खत्म हो चुका है। नतीजा कंट्रोल रूम को अपनी गाड़ियों की लोकेशन नहीं मिल पा रही है। वहीं ज्यादातर डायल 100 कारों में लगे ट्रैकिंग डिवाइस की बैटरी बुझ चुकी है।
कांट्रैक्ट में था लफड़ा
एनुअल मेंटेनेंस कांट्रैक्ट बनाते समय की गई लापरवाही का नतीजा अब सामने आ रहा है। इनबिल्ट ट्रैकिंग डिवाइस की जगह डायल 100 कारों में कंट्रोल रूम ट्रैकिंग के लिए अलग से ट्रैकिंग डिवाइस दी गई थी। सभी ट्रैकिंग डिवाइस बैटरी से चलती हैं जिनका मेंटेनेंस बहुत जरूरी होता है। बीती 3 फरवरी को ट्रैकिंग डिवाइस की बैटरी खत्म होने से कंट्रोल रूम से इनका संपर्क खत्म हो गया है। कंट्रोल रूम को किसी भी घटना की सूचना मिलने के बावजूद नहीं पता होता कि किस थाने की गाड़ी घटनास्थल के सबसे करीब है।
वायरलेस सेट से चल रही डायल 100 की गाड़ियां
डायल 100 की गाड़ियों से संपर्क के लिए कंट्रोल रूम को फिर से पुराना तरीका अपनाना पड़ा है। सभी गाड़ियों से अब वायरलेस सेट द्वारा संपर्क किया जा रहा है। कुछ गाड़ियों में वायरलेस सेट भी नहीं है, ऐसी स्थिति में कोई घटना होने पर थाने से संपर्क किया जाता है। थाने के माध्यम से डायल 100 के सिपाहियों को फोन किया जाता है।
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कंट्रोल रूम में इंटरनेट कनेक्टिविटी भी खत्म
दो साल पहले बने हाईटेक कंट्रोल रूम में इस समय ब्रॉडबैंड सेवाएं भी खत्म हो चुकी हैं। कंट्रोल रूम चालू करते समय रिलायंस को दो साल के लिए ब्रॉडबैंड कनेक्शन का ठेका दिया गया था, जो 3 फरवरी को समाप्त हो चुका है। कंट्रोल रूम की सभी 58 गाड़ियां इंटरनेट के माध्यम से कंट्रोल रूम से जुड़ी रहती हैं। इंटरनेट समाप्त होने से किसी भी डिवाइस से काल या मैसेज नहीं हो पा रहा है।
ऐसे काम करती है ट्रैकिंग डिवाइस
गाड़ियों को दी गई ट्रैकिंग डिवाइस में गाड़ी के मूवमेंट- कहां से कहां जा रही है बताने का बटन होता है
एटीआर(एक्शन टेकन रिपोर्ट)- घटनास्थल पर कार्रवाई के बाद एटीआर बटन दबाने से पता चला जाता है कि कंट्रोल रूम की गाड़ी ने कार्रवाई कर दी
बीटूबी(बैक टू बेस) बटन दबाकर गाड़ी संदेश देती है कि कार्रवाई खत्म करने के बाद अपनी तय जगह पर आ गई है।
इन बटनों के अलावा डिवाइस में मैसेज भेजने की सुविधा भी होती है।
जानें कंट्रोल रूम को
3 शिफ्ट में 75 पुलिसकर्मी तैनात हैं डायल 100 मे
डायल 100 कंट्रोल रूम मे 8-8 घंटे की तीन शिफ्ट में 75 पुलिसकर्मी 24 घंटे तैनात रहते हैं
इनमे 12 कॉल टेकर, 7 डिस्पैचर और 6 ग्रिड को देखने वाले होते हैं। इनके अलावा मानीटरिंग के लिए 3 रेडियो सबइंसपेक्टर शिफ्ट के हिसाब से 24 घंटे तैनात रहते हैं। इनके अलावा रिलायंस कंपनी के दो इंजीनियर 24 घंटे तकनीकी सहयोग को तैनात रहते थे जिनको अब कंपनी ने हटा लिया है।
सबके पास अपना कंप्यूटर
कंट्रोल रूम में तैनात पुलिसकर्मी के पास अपना सिस्टम होता है। रेडियो अधिकारी एक बड़ी स्क्रीन सबको मानीटर करती है।
6 ग्रिड में बंटा है कंट्रोल रूम
कंट्रोल रूम छह ग्रिड में बंटा है। इसमें सभी एसपी (ईस्ट, वेस्ट, रूरल, साउथ, ट्रैफिक) के क्षेत्र दिखते हैं। हर ग्रिड की जिम्मेदारी के लिए एक कर्मी तैनात है। जो जानकारी और फुटेज देखकर संबंधित अधिकारी को बताता है। एक अतिरिक्त ग्रिड और है जो उच्च अधिकारियों के लिए काम करता है।
समय रहते क्यों नहीं रिनुअल हो पाया
ऐसा नहीं कि अधिकारियों को नहीं मालूम था कि एएमसी खत्म हो रहा है लेकिन पुलिस विभाग की बाबूगिरी के चलते मामला फंसा गया।
कोट--
एनुअल मेंटेनेंस कांट्रैक्ट और इंटरनेट कनेक्टिविटी खत्म होने से गाड़ियों की ट्रैकिंग नहीं हो पा रही है फिलहाल वायरलेस सेट से सभी गाड़ियां कंट्रोल रूम के संपर्क में हैं।
राजेश कुमार, एसपी कंट्रोल रूम
पुलिस हेडक्वार्टर से इस संबंध में पत्राचार किया जा रहा है, रेडियो विभाग के सर्वे के बाद धनराशि मिल जाएगी। तब तक उपलब्ध संसाधनों से काम सुचारु रूप से चल रहा है।
शलभ माथुर, एसएसपी
कांट्रैक्ट में था लफड़ा
एनुअल मेंटेनेंस कांट्रैक्ट बनाते समय की गई लापरवाही का नतीजा अब सामने आ रहा है। इनबिल्ट ट्रैकिंग डिवाइस की जगह डायल 100 कारों में कंट्रोल रूम ट्रैकिंग के लिए अलग से ट्रैकिंग डिवाइस दी गई थी। सभी ट्रैकिंग डिवाइस बैटरी से चलती हैं जिनका मेंटेनेंस बहुत जरूरी होता है। बीती 3 फरवरी को ट्रैकिंग डिवाइस की बैटरी खत्म होने से कंट्रोल रूम से इनका संपर्क खत्म हो गया है। कंट्रोल रूम को किसी भी घटना की सूचना मिलने के बावजूद नहीं पता होता कि किस थाने की गाड़ी घटनास्थल के सबसे करीब है।
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वायरलेस सेट से चल रही डायल 100 की गाड़ियां
डायल 100 की गाड़ियों से संपर्क के लिए कंट्रोल रूम को फिर से पुराना तरीका अपनाना पड़ा है। सभी गाड़ियों से अब वायरलेस सेट द्वारा संपर्क किया जा रहा है। कुछ गाड़ियों में वायरलेस सेट भी नहीं है, ऐसी स्थिति में कोई घटना होने पर थाने से संपर्क किया जाता है। थाने के माध्यम से डायल 100 के सिपाहियों को फोन किया जाता है।
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कंट्रोल रूम में इंटरनेट कनेक्टिविटी भी खत्म
दो साल पहले बने हाईटेक कंट्रोल रूम में इस समय ब्रॉडबैंड सेवाएं भी खत्म हो चुकी हैं। कंट्रोल रूम चालू करते समय रिलायंस को दो साल के लिए ब्रॉडबैंड कनेक्शन का ठेका दिया गया था, जो 3 फरवरी को समाप्त हो चुका है। कंट्रोल रूम की सभी 58 गाड़ियां इंटरनेट के माध्यम से कंट्रोल रूम से जुड़ी रहती हैं। इंटरनेट समाप्त होने से किसी भी डिवाइस से काल या मैसेज नहीं हो पा रहा है।
ऐसे काम करती है ट्रैकिंग डिवाइस
गाड़ियों को दी गई ट्रैकिंग डिवाइस में गाड़ी के मूवमेंट- कहां से कहां जा रही है बताने का बटन होता है
एटीआर(एक्शन टेकन रिपोर्ट)- घटनास्थल पर कार्रवाई के बाद एटीआर बटन दबाने से पता चला जाता है कि कंट्रोल रूम की गाड़ी ने कार्रवाई कर दी
बीटूबी(बैक टू बेस) बटन दबाकर गाड़ी संदेश देती है कि कार्रवाई खत्म करने के बाद अपनी तय जगह पर आ गई है।
इन बटनों के अलावा डिवाइस में मैसेज भेजने की सुविधा भी होती है।
जानें कंट्रोल रूम को
3 शिफ्ट में 75 पुलिसकर्मी तैनात हैं डायल 100 मे
डायल 100 कंट्रोल रूम मे 8-8 घंटे की तीन शिफ्ट में 75 पुलिसकर्मी 24 घंटे तैनात रहते हैं
इनमे 12 कॉल टेकर, 7 डिस्पैचर और 6 ग्रिड को देखने वाले होते हैं। इनके अलावा मानीटरिंग के लिए 3 रेडियो सबइंसपेक्टर शिफ्ट के हिसाब से 24 घंटे तैनात रहते हैं। इनके अलावा रिलायंस कंपनी के दो इंजीनियर 24 घंटे तकनीकी सहयोग को तैनात रहते थे जिनको अब कंपनी ने हटा लिया है।
सबके पास अपना कंप्यूटर
कंट्रोल रूम में तैनात पुलिसकर्मी के पास अपना सिस्टम होता है। रेडियो अधिकारी एक बड़ी स्क्रीन सबको मानीटर करती है।
6 ग्रिड में बंटा है कंट्रोल रूम
कंट्रोल रूम छह ग्रिड में बंटा है। इसमें सभी एसपी (ईस्ट, वेस्ट, रूरल, साउथ, ट्रैफिक) के क्षेत्र दिखते हैं। हर ग्रिड की जिम्मेदारी के लिए एक कर्मी तैनात है। जो जानकारी और फुटेज देखकर संबंधित अधिकारी को बताता है। एक अतिरिक्त ग्रिड और है जो उच्च अधिकारियों के लिए काम करता है।
समय रहते क्यों नहीं रिनुअल हो पाया
ऐसा नहीं कि अधिकारियों को नहीं मालूम था कि एएमसी खत्म हो रहा है लेकिन पुलिस विभाग की बाबूगिरी के चलते मामला फंसा गया।
कोट--
एनुअल मेंटेनेंस कांट्रैक्ट और इंटरनेट कनेक्टिविटी खत्म होने से गाड़ियों की ट्रैकिंग नहीं हो पा रही है फिलहाल वायरलेस सेट से सभी गाड़ियां कंट्रोल रूम के संपर्क में हैं।
राजेश कुमार, एसपी कंट्रोल रूम
पुलिस हेडक्वार्टर से इस संबंध में पत्राचार किया जा रहा है, रेडियो विभाग के सर्वे के बाद धनराशि मिल जाएगी। तब तक उपलब्ध संसाधनों से काम सुचारु रूप से चल रहा है।
शलभ माथुर, एसएसपी