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आवाजाही से परेशान हुईके प्रयाग वाले रिश्तेदार करिगे पलायन: राजू श्रीवास्तव
Mon, 21 Jan 2019 06:10 PM IST
shubham
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: shubham
Updated Mon, 21 Jan 2019 06:10 PM IST
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दोस्तों पिछली दफा हम आपका बताय रहेन कि कइसे हम आपन चार दोस्तन के साथ बैटरी वाले ई-रिक्सा से प्रयागराज कुंभ नहाय निकसे रहन.. तो भईया मलवां केर पेड़ा खाय के बाद हम लोगन केर सवारी फिर आगे बढ़ चली.. फतेहपुर होत भये प्रयागराज पहुंचे वाले रहें.. पुलिस वाले हम लोगन का दस किलोमीटर पहिलेहै रोक लिहिन कि आगे एंट्री बंद है.. अब पैदल जाओ.. वहीं साइड केर मैदान मा पार्किंग केर इंतिजाम रहा तो मनोहर आपन ई-रिक्सा वहीं खड़ा किहिन अउर हम पंचै पैदलेन चलि पड़े..
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हम कहा चलौ यहीं कटरा बाजार मा हमरे रिश्तेदार रहत हैं.. वहीं रुका जाई.. गेस्ट हाउस केर पइसा बचि.. खैर जब हम लोग हुंवा पहुहंचै तो उनके दरवज्जे पे बड़ा सा ताला लटकत भया मिला.. अउर दरवज्जे पे एक ठो कागज चिपका रहा जिस पे लिखा रहा कृपया कुंभ मेला केर दौरान संपर्क करे का कष्ट ना करैं.. संकठा कहिन अब का करिहौ.. वहीं बगल वाले मकान केर दरवज्जे पे एक ठो महिला खड़ी रहीं.. हम उनसे पूछा बहिनी ई लोगे कहां गे.. तो उई बोली भईया परेसान होय के पूरा परिवार बनारस पलायन करि गा.. जेका देखौ इनके हियां कुंभ नहाय चला आय रहा है.. सबका स्टेसन लेवे जाओ.. छोड़े जाओ.. खावे पिए का, रहै का इंतिजाम करौ..
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कहिन अब कुंभ मेला केर बादै वापस अइबै.. हम कहा यार बड़ा होसियार गजब आदमी है भईया.. खैर हम लोग बम भोले का जयकारा लगाय संगम की तरफ बढ़ि चले.. मेला पहुंचे तो शाम हुई चुकी रहै.. मगर पूरा मेला मा अईस लाइटिंग रही जानौ दिन होय.. हम सबै थके रहन तो वहीं साइड मा अलाव जलाय कुछ लोग बइठे रहैं तो हम लोगे भी बईठ गेन.. सब पंचे आपन आपन किस्सा कहानी बतावत रहैं.. तबहीं संतोस केसरवानी पूछिन कि नागा लोग बनत कइसे हैं.. तो वहीं आग ताप रहे एक सज्जन बोले अरे कोऊ कोऊ निसंतान दंपत्ति नागा लोगन से आशीर्वाद लैके मन्नत मान लेवत हैं..
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वचन दई के जात हैं कि बाबाजी हमरे संतान होई तो पहिला बच्चा आपके अखाड़ा का सौंप देबे.. वही लोग दई जात हैं तो उई बाल नागा बनत हैं.. फिर इनकी ट्रेनिंग सुरू होत है .. तबहीं एक अउर सज्जन बोलि पड़े नागा बनब आसान ना आय.. कि हलवा की तरा खाय लेव.. बहुत बड़ी तपस्या आय.. अउर मिलिट्री वालन से भी भयंकर ट्रेनिंग होत है.. एमा सबसे पहिला पाठ ई सिखावा जात है कि त्याग करौ.. मानव जात केर रक्षा करौ.. इन लोगन का आपन खाना खुद बनाय का पड़त है अउर इनका ई सिखावा जात है कि पहिले सबका खवाओ फिर खुद खाओ..
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चाहे सरदी होय.. गरमी होय या बरसात.. इन लोगन का नंगे बदन खाली भभूत मल के रहे का पड़त है.. इन लोगन का दहकती भई आग पे चलावा जात है.. तलवारबाजी.. त्रिसूल-बल्लम कइसे चलावें.. शाष्त्र अउर शष्त्र दुइनो का ज्ञान दिया जात है.. अउर जौने दिन ई नागा बनत हैं.. ई सबसे पहिले आपन परिवार का पिंडदान करत हैं फिर आपन श्राद्ध अउर पिंडदान करत हैं.. कि आज से सब हमरे लिए अउर हम सबके खातिर मरिगेन .. यही सब बात करत भये भूख लाग गै.. एक तो ई संकठा का भूख बहुत जल्दी लग जात है.. दिनभर चरा करत हैं तबहूं भुखान रहत हैं..