कानपुर शहर को स्मार्ट बनाने के लिए पौने तीन साल पहले जोर-शोर से शुरू हुईं तैयारियां कछुआ चाल से भी धीमी चल रही हैं। इतने सालों तक जमीन पर कार्य शुरू न होने पर मुख्यमंत्री ने नाराजगी जताते हुए कानपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड से खर्च का ब्यौरा सहित विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। जिसे इसी हफ्ते भेजना है।
दरअसल, स्मार्ट सिटी विकसित करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने पिछले साल कानपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड (केएससीएल) को 216 करोड़ रुपये आवंटित किए थे। सबसे पहले केएससीएल ने पीएमसी (प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट) नोएडा की कंपनी रुद्राभिषेक को नियुक्त किया। इस कंपनी को अपनी देखरेख में स्मार्ट सिटी विकसित करनी है।
सबसे पहले कंपनी को आधुनिक कूड़ाघर और छह ओपन एयर जिम की डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) बनानी थी। जिसे बनाने में ही लेटलतीफी कर दी गई। टेंडर कमेटी ने 15 दिन पहले आधुनिक कूड़ाघरों और ओपन एयर जिम निर्माण के लिए दो कंपनियों का चयन तो कर लिया लेकिन अब तक अनुबंध न कर पाए। इस कारण जमीन पर कोई काम नहीं उतर पा रहा है।
स्मार्ट सिटी के तहत पूरे शहर का ट्रैफिक कंट्रोल करने के लिए कॉमन कमांड सेंटर भी बनना है। जिसके अभी तक सिर्फ टेंडर ही पड़ सके हैं। 20 दिनों से टेक्निकल बिड का ही अध्ययन चल रहा है। पीएमसी कंपनी ने माल रोड से कंपनीबाग तक 28 किलोमीटर स्मार्ट रोड और नानाराव पार्क के सुंदरीकरण का सिर्फ अभी तक खाका ही खींच रखा है।
छह करोड़ हो गए खर्च
स्मार्ट सिटी का कार्य तो जमीन पर नहीं उतरा लेकिन सरकार से दिए गए 216 करोड़ में छह करोड़ 19 लाख रुपये खर्च भी हो चुके हैं। केएससीएल के प्रभारी अभियंता आरके सिंह का कहना है कि 6.19 करोड़ रुपये में से लगभग 4 करोड़ रुद्राभिषेक कंपनी को दिए गए हैं। 30 लाख रुपये अभी तक विज्ञापन पर खर्च हो चुके हैं। बोर्ड बैठक, फाइलें बनवाने सहित अन्य कार्यों में भी रुपये खर्च हो रहे हैं।