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Chitrakoot: पुल का लिंटर ढहने के मामले में तीन जेई निलंबित, एक से मांगा जवाब

Sat, 21 Jun 2025 11:17 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चित्रकूट
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चित्रकूट Published by: शिखा पांडेय Updated Sat, 21 Jun 2025 11:17 PM IST
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Chitrakoot: Three JEs suspended in case of collapse of bridge lintel, answer sought from one
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
लगभग ढाई करोड़ की लागत से जमोहरा नाले पर बन रहे पुल के पिलर का लिंटर ढहने के मामले में लोक निर्माण विभाग के इंजीनियरों को भी दोषी माना गया है। इस मामले में तीन जेई को निलंबित कर एक को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इसी मामले में एक दिन पूर्व पुल बनाने और शटरिंग लगाने वाले ठेकेदार के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।
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परदवां बरियारी मार्ग पर स्थित जमोहरा नाले पर बन रहे पुल का लिंटर पड़ते ही 18 जून को ढह गया। अमर उजाला ने इस खबर को 19 जून के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित की। इस पर शासन से लेकर जिला प्रशासन तक हरकत में आया। लोक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता एसके रावत ने मऊ एसडीएम के साथ मौके पर जाकर जांच की। मऊ विधायक के साथ डीएम शिवशरणप्पा भी रात में निरीक्षण करने पहुंचे। शुक्रवार को इसी मामले में सहायक अभियंता श्यामलाल की तहरीर पर ठेकेदार दलबीर सिंह व शटरिंग लगाने वाले ठेकेदार भीम सिंह के खिलाफ लापरवाही की रिपोर्ट दर्ज कराई गई। दोनों को पुलिस ने हिरासत में भी ले लिया है।
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इसी मामले में शनिवार को जिला प्रशासन की रिपोर्ट के आधार पर शासन ने तीन जेई को निलंबित करने व एक जेई को नोटिस जारी करने के आदेश दिए हैं। लोनिवि के अधिशासी अभियंता अखिलेश कुमार ने बताया कि अधीक्षण अभियंता बांदा एसके रावत के निर्देश पर जेई सिंधुराज, जेई महेश यादव व जेर्ई पीपी सिंह को निलंबित कर दिया गया है। जेई श्यामलाल को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
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जवाबदेही से नहीं पाए जेई
पुल बना रहे ठेेकेदार दलबीर सिंह ने शटरिंग का ठेका बांदा के भीम सिंह को दिया। शटरिंग लगी तो 12 जून और 17 जून को जूनियर इंजीनियरों ने मौके पर जाकर जांच की थी। तीनों जेई ने माना कि शटरिंग सही न लगी होने पर ठेकेदार को लिंटर डालने से मना किया था। इसके बाद भी ठेकेदार ने लिंटर डाला है। जांच रिपोर्ट में सामने आया कि जब तीनों जेई मान रहे थे कि शटरिंग सही नहीं लगी है तो उन्हें हर हाल में लिंटर डालने से रोकना चाहिए था, उनकी सहमति से ही ठेकेदार ने लिंटर डाला, जो ढह गया। शटरिंग कमजोर होने की जानकारी जेई ने अपने अधिकारियों को समय से नहीं दी। शायद उनके निलंबन की यही वजह बनी है। घटना के बाद इंजीनियरों ने पूरा ठीकरा ठेकेदार पर फोड़ा था, लेकिन वे अपनी जवाबदेही से नहीं बच सके। आखिर उन पर भी कार्रवाई हो गई।
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