Chitrakoot: सेवानिवृत्त वरिष्ठ सहायक ने ढाई साल लगाए चक्कर, नहीं मिली पेंशन, निकल गया दम
चित्रकूट जिले में बाल विकास विभाग से सेवानिवृत्त बाबू विनय वाजपेयी पेंशन के लिए विभाग के चक्कर काटते रहे लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। मानसिक बीमारी से जूझ रहे विनय ने गुरुवार को दम तोड़ दिया।
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चित्रकूट जिले में बाल विकास विभाग चित्रकूट से सेवानिवृत्त बाबू विनय वाजपेयी ढाई साल से पेंशन का इंतजार करते रहे। उनकी पत्नी डीपीओ से गुहार लगाती रहीं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। मानसिक बीमारी से जूझ रहे विनय ने गुरुवार को दम तोड़ दिया। कानपुर के आजाद नगर निवासी विनय वाजपेयी बाल विकास में प्रधान सहायक के पद पर चित्रकूट में तैनात थे।
कानपुर देहात में तैनाती के दौरान अस्वस्थता के कारण कई दिन दफ्तर नहीं जा सके तो उनको माती से चित्रकूट स्थानांतरित कर दिया गया। जनवरी 2019 में वह सेवानिवृत्त हो गए। इसके बाद मानसिक बीमारी भी हो गई और याददाश्त खो बैठे। पत्नी साधना वाजपेयी ने बताया कि पेंशन व भविष्यनिधि के रुपये के लिए कई बार चित्रकूट के डीपीओ से संपर्क किया। अधिकारी हर बार यही कहते थे कि फाइल लखनऊ निदेशालय भेज दी गई है। बेटे ने निदेशालय के कई चक्कर लगाए, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। आर्थिक तंगी के कारण वह पति का उपचार नहीं करा पाईं।
बुधवार की रात पति जब कोमा में चले गए तो उन्हें हैलट अस्पताल ले गईं, जहां उनकी मौत हो गई। डीपीओ मनोज कुमार ने बताया कि चित्रकूट कार्यालय से कोई काम बकाया नहीं है। उनकी पत्नी को चित्रकूट का जितना बकाया था, वह दिला दिया गया है। अनुपस्थित वाले मामले व अन्य मामलों के पूरे कागजात की फाइल निदेशालय लखनऊ भेजी गई है। बताया कि विनय वाजपेयी के निधन की जानकारी मिली है। उनके परिजनों को कई बार बताया गया कि चित्रकूट से उनका कोई काम शेष नहीं है लखनऊ निदेशालय कार्यालय से ही फाइनल होना है।