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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   Chitrakoot No paved road even after 78 years patient had to be carried in a makeshift sling

चित्रकूट: 78 साल बाद भी पक्की सड़क नसीब नहीं, टाट में टांगकर ले जाना पड़ा मरीज, ग्रामीण बोले- प्रशासन बेपरवाह

Fri, 18 Sep 2026 05:23 PM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चित्रकूट
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चित्रकूट Published by: Himanshu Awasthi Updated Fri, 18 Sep 2026 05:23 PM IST
सार

Chitrakoot News: थरपहाड़ गांव में आजादी के दशकों बाद भी पक्की सड़क न बनने से गंभीर रूप से बीमार युवक को परिजन टाट में बांधकर कंधे पर लादने को मजबूर हुए। विकास के तमाम दावों के बीच एम्बुलेंस न पहुंचने और प्रशासनिक हीला-हवाली से आक्रोशित ग्रामीणों ने व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

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Chitrakoot No paved road even after 78 years patient had to be carried in a makeshift sling
वीडियो ग्रैब - फोटो : amar ujala

विस्तार

इसे सिस्टम की बेशर्मी कहें या लापरवाही। चित्रकूट जिले में नगर परिषद के थरपहाड़ गांव में आजादी के 78 साल बाद भी एक पक्की सड़क नसीब नहीं हुई। नतीजा- 28 साल का गोरे सिंह उल्टी-दस्त से तड़पता रहा और ग्रामीण उसे टाट में बांधकर कंधे पर लादने को मजबूर हुए।

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ये कोई पहला मामला नहीं। यहां हर बीमार, हर गर्भवती महिला की यही कहानी है। एम्बुलेंस गांव में आ ही नहीं सकती। मरीज को झोली में डालो, कंधे पर टांगो, फिर भागो अस्पताल।और प्रशासन? सिर्फ कागजी घोड़े दौड़ा रहा है। टेंडर हो गया, भोपाल से स्वीकृति आएगी, काम जल्द शुरू होगा...यही घिसा-पिटा जवाब।

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एक सड़क से भी कम है कीमत?
जमीन पर एक फावड़ा तक नहीं चला। विकास के नाम पर पल्ला झाड़ लिया जाता है। सवाल सीधा है - जब नगर परिषद क्षेत्र में ही सड़क नहीं, तो विकास के दावे कहां हैं? थरपहाड़ के लोग पूछ रहे हैं, क्या उनकी जान की कीमत एक सड़क से भी कम है?

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